रायबरेली: जेल के 37 अनुभागों को संभाल रहे कैदी अधिकारी
रायबरेली। जेलों में सुधार को लेकर समय-समय पर परिवर्तन किए जाते हैं, लेकिन जानकर ताज्जुब होगा कि जेल के अंदर भी लोकतंत्र होता है। जेलर और जेल अधीक्षक केवल निगरानी के लिए होते हैं। सारी व्यवस्था बंदी ही करते हैं। यही नहीं सजा काट रहे बंदियों की निगरानी और उनके खाने, पीने की व्यवस्था भी …
रायबरेली। जेलों में सुधार को लेकर समय-समय पर परिवर्तन किए जाते हैं, लेकिन जानकर ताज्जुब होगा कि जेल के अंदर भी लोकतंत्र होता है। जेलर और जेल अधीक्षक केवल निगरानी के लिए होते हैं। सारी व्यवस्था बंदी ही करते हैं। यही नहीं सजा काट रहे बंदियों की निगरानी और उनके खाने, पीने की व्यवस्था भी सीनियर बंदियों के हाथ में होती है।
जिला कारागार में बंद बंदियों के जीवन में सुधार हो और वह भटके हुए रास्ते से निकलकर सामान्य जीवन बसर करें, इसके लिए जेल मैनुअल के हिसाब से व्यवस्था की गई है। जिला जेल में 37 अनुभाग हैं और इनकी जिम्मेदारी पुराने बंदियों के हाथ में है। एक तरह से यह जेल के मैनेजमेंट को बनाए रखते हैं। इस मैनेजमेंट को बनाए रखने वालों को कैदी अधिकारी कहा जाता है।
यह वह बंदी होते हैं जो अपनी सजा का 1/8 भाग काट चुके होते हैं। इस तरह इन्हें जेल में कैदी अधिकारी का पद मिल जाता है। जेल में सुबह उठने से लेकर रात में सोने तक के जो नियम बनाए गए हैं। उसका यही कैदी अधिकारी पालन कराते हैं। जेल प्रशासन सिर्फ नजर रखता है। सारा काम यही कैदी अधिकारी करते हैं। सूत्रों के मुताबिक जिला जेल में 118 कैदी अधिकारी हैं जो विभिन्न अनुभागों में काम कर रहे हैं। खाना बनाना, सफाई कराना, खेती कराना सहित 37 अनुभाग जेल में हैं। जिनकी जिम्मेदारी कैदी अधिकारियों के हाथ में है।
कोई बंदी नहीं हासिल कर सका पक्का
जेल में कैदी अधिकारियों से बड़ी पदवी पक्का की होती है। इन्हें सीटी और बेल्ट भी मिलती है। इन्हें एक माह में 10 दिन की छूट मिलती है। यानि इनकी सजा में इस छूट को सम्मलित किया जाता है। कोई भी बंदी पक्का तभी बनता है जब वह जेल मैनुअल के मुताबिक सुधार की प्रक्रिया में खरा उतरता है। एक तरह से हर दिन बंदियों की निगरानी के साथ उनके कार्य व्यवहार को जेल प्रशासन अपनी रिपोर्ट में शामिल करता है।
जेल पुलिस केवल बाहरी सुरक्षा के लिए
जेल में एक तरह से अपना अलग लोकतंत्र है। किसी कैदी या बंदी को कोई तकलीफ न हो, इसका पूरा ध्यान रखा जाता है। कैदी अधिकारी ही सारी व्यवस्था को संभालते है। जिला जेल की पुलिस केवल बाहरी सुरक्षा और प्रोटोकॉल के लिए हैं। जेल के भीतर तो बंदियों से और बंदियों के द्वारा बनाई गई व्यवस्था काम करती है।
बंदियों की रुचि का रखा जाता ध्यान
जेल में बंद बंदियों को जब काम पर लगाया जाता है तो उनसे उनकी रुचि पूछी जाती है। उसी हिसाब से उनकी मेहनतकश होती है।
जिला कारागार के जेलर सत्य प्रकाश के बताया कि जेल में सुधारों की प्रक्रिया के तहत काम होता है। यहां पर हर बंदी एक समान है। जेल के जो विभिन्न अनुभाग हैं, उसमें कैदी अधिकारी व्यवस्था को देखते हैं।
