पीलीभीत: गैंगरेप के बाद छात्रा की हत्या का मामला- निलंबित इंस्पेक्टर-चौकी इंचार्ज पर एफआईआर दर्ज कराएंगे हाईकोर्ट अधिवक्ता
पीलीभीत, अमृत विचार। बरखेड़ा में गैंगरेप के बाद छात्रा की हत्या के मामले में लापरवाही के आरोप में घिरे इंस्पेक्टर धीरज सिंह सोलंकी, चौकी प्रभारी जिरोनिया सतनाम सिंह को चार दिन तक बचाने के बाद आखिरकार एसपी को निलंबित करना पड़ गया था। मगर, अभी पुलिस की मुश्किल कम नहीं हुई है। एक दिन पूर्व …
पीलीभीत, अमृत विचार। बरखेड़ा में गैंगरेप के बाद छात्रा की हत्या के मामले में लापरवाही के आरोप में घिरे इंस्पेक्टर धीरज सिंह सोलंकी, चौकी प्रभारी जिरोनिया सतनाम सिंह को चार दिन तक बचाने के बाद आखिरकार एसपी को निलंबित करना पड़ गया था। मगर, अभी पुलिस की मुश्किल कम नहीं हुई है। एक दिन पूर्व परिवार से मुलाकात कर जानकारी जुटाकर लौट सपा नेता एवं हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता सुधीर तिवारी ने तमाम सवाल उठाते हुए अब पुलिस को साक्ष्य मिटाने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि इसे लेकर पुलिसकर्मियों पर एफआईआर कराएंगे। अफसरों ने न सुनी तो हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक जाएंगे।
हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता और सपा नेता सुधीर तिवारी ने छात्रा के गांव में पूरी घटना का पता लगाने के बाद यह बात कही। उन्होंने कहा कि बरखेड़ा पुलिस को गन्ने के खेत में जिस समय छात्रा का शव मिला तो उसी समय घटनास्थल पर सबूतों से छेड़छाड़ किए बिना डॉग स्क्वायड बुलाना चाहिए था, जो कि नहीं बुलाया गया। फारेंसिक टीम भी मौके पर नहीं बुलाई गई।
यह प्रक्रिया पूरी किए बिना तत्कालीन जिरोनिया चौकी इंचार्ज और इंस्पेक्टर ने छात्रा का शव जबरन खेत से उठवा दिया। यह नियम विरुद्ध है। जब पुलिस पर दबाव बना तो छात्रा के पिता से हस्ताक्षर करा लिए कि शव का पंचनामा मौके पर भरा। छात्रा हत्याकांड में असली दोषी तो बरखेड़ा इंस्पेक्टर और जिरोनिया चौकी इंचार्ज हैं। अफसर हत्या के पांच तक दोनों को बचाते रहे, जबकि दोनों पर इस लापरवाही में तत्काल कार्रवाई करनी थी।
13 घंटे डीप फ्रीजर में रखा शव
हाईकोर्ट अधिवक्ता के मुताबिक बरखेड़ा के छात्रा प्रकरण में पुलिस की घोर लापरवाही सामने आई है। पुलिस ने घटनास्थल पर बिना पंचनामा भराये उसका शव उठाकर कल्याणपुर तक लाए। यहां छात्रा के भाई से डेड बॉडी थाने की गाड़ी से उतारकर दूसरे वाहन में रखी। फिर उसे डीप फ्रीजर में 13 घंटे रखा गया। पंचनामा भरवाने की प्रक्रिया बाद में हुई जबकि यह मौके पर ही होनी चाहिए थी।
पुलिस ने छात्रा की हत्या के साक्ष्य जानबूझकर मिटाए। अगर पुलिस इस केस का खुलासा करना चाहती तो घटनास्थल पर ही डॉग स्क्वायड और फारेंसिक टीम को मौके पर बुलाती। मगर, ऐसा न करना पुलिस की लापरवाही दर्शाता है।
दोनों 120 बी और 201 के मुल्जिम
अधिवक्ता का कहना है कि तत्कालीन बरखेड़ा इंस्पेक्टर धीरज सिंह सोलंकी और चौकी इंचार्ज जिरोनिया सतनाम सिंह भी साक्ष्य मिटाने की धारा 201 और 120 के अपराधी हैं। दोनों पर एफआईआर दर्ज कराने के लिए वह पहले एसपी को तहरीर देंगे। अगर पुलिस ने एफआईआर दर्ज नहीं की तो वह इस मामले को हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक जाएंगे। छात्रा के परिवार को हर हाल में न्याय दिलाकर रहेंगे।
