उत्तराखंड में हादसों के कारणों का बनेगा डेटाबेस, तैयारियों में जुटा विभाग
बबीता पटवाल, हल्द्वानी। उत्तराखंड में अब हादसों का भी डेटाबेस बनाया जाएगा। इसके लिए आईआरएडी परियोजना के तहत डेटा संकलन किया जाएगा। इस परिप्रेक्ष्य में शनिवार को आरटीओ कार्यालय में आयोजित कार्यशाला पर इस परियोजना पर गहनता से मंथन किया गया। कार्यशाला में एनआईसी से डीआरएम संजय मेहता ने आरटीओ प्रर्वतन व अन्य अधिकारियों को …
बबीता पटवाल, हल्द्वानी। उत्तराखंड में अब हादसों का भी डेटाबेस बनाया जाएगा। इसके लिए आईआरएडी परियोजना के तहत डेटा संकलन किया जाएगा। इस परिप्रेक्ष्य में शनिवार को आरटीओ कार्यालय में आयोजित कार्यशाला पर इस परियोजना पर गहनता से मंथन किया गया।
कार्यशाला में एनआईसी से डीआरएम संजय मेहता ने आरटीओ प्रर्वतन व अन्य अधिकारियों को इस परियोजना की जानकारी दी। इसमें उन्होंने अधिकारियों को सरकार की ओर से बनाए गए पोर्टल में डेटा फीड करने के संबंध में बताया। इस पोर्टल में शहर में घटित सभी दुर्घटनाओं का पूरा ब्योरा देना है, जिसमें फोटो के साथ ही 10 सेकेंड की वीडियो भी अपलोड करनी है।
प्रवर्तन अधिकारी, आरटीओ, नंद किशोर ने बताया कि सड़क सुरक्षा के क्षेत्र में बेहतर काम करने के लिए यह योजना चलाई जा रही है। इसमें पुलिस, स्वास्थ्य विभाग, पीडब्लूडी, नेशनल हाइवे आदि भी शामिल हैं। इस पोर्टल से दुर्घटनाओं के कारणों का पता लगाने के साथ उन कारणों पर काम भी किया जाएगा, जिससे भविष्य में ऐसी दुर्घटनाओं से बचा जा सके। इन सभी विभागों को भी इस पोर्टल में योगदान के संबंध में प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रशिक्षण में आरआई देवेंद्र सिंह, एआरटीओ प्रवर्तन कुलवंत सिंह शामिल रहे।
यह है योजना
एकीकृत सड़क दुर्घटना डेटाबेस (आईआरएडी) नामक यह परियोजना एक व्यापक वेब-आधारित आईटी समाधान परियोजना है। इस परियोजना में मजबूत सड़क दुर्घटना डेटाबेस प्रबंधन प्रणाली को बनाया जा रहा है। इससे राज्य और केंद्र, सड़क दुर्घटनाओं से संबंधित जानकारियों को समझने, सड़क दुर्घटनाओं के मूल कारणों का विश्लेषण करने तथा दुर्घटनाओं को कम करने के लिए डेटा-नेतृत्व वाले सड़क सुरक्षा उपायों को विकसित और लागू किया जाएगा। दुर्घटना डेटा सड़क सुरक्षा परिदृश्यों का आकलन करने और दुर्घटनाओं को कम करने के लिए आवश्यक हस्तक्षेपों को लागू करने का आधार प्रदान करेगा।
दुर्घटना डेटाबेस वैज्ञानिक सड़क सुरक्षा प्रबंधन अर्जित करने की दिशा में बड़ा कदम है। इससे दुर्घटनाओं में कमी के लाने के उपायों की योजना बनाने में भी सहायता मिलेगी। हालांकि अभी तक शहर या राज्य में घटित किसी भी दुर्घटना का खाका पुलिस को मैनुअली तैयार करना पड़ता है, लेकिन अब यह डिजिटल होगा।
