रायबरेलीः पुलिस की मिलीभगत से धड़ल्ले से हो रहा पेड़ों का कटान, कैसे बचेगी प्राण वायु?

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रायबरेली। कोरोना आया तो ऑक्सीजन की डिमांड बढ़ी और लाखों लोगों की जान ऑक्सीजन न मिलने से चली गई। इसके बाद सरकार ने पेड़ों के संरक्षण को लेकर बिगुल फूंक दिया। प्रदेश सरकार ने भी फरमान जारी कर दिया कि पेड़ों का संरक्षण न होने पर अधिकारियों पर कार्रवाई होगी लेकिन क्या इस फरमान का …

रायबरेली। कोरोना आया तो ऑक्सीजन की डिमांड बढ़ी और लाखों लोगों की जान ऑक्सीजन न मिलने से चली गई। इसके बाद सरकार ने पेड़ों के संरक्षण को लेकर बिगुल फूंक दिया। प्रदेश सरकार ने भी फरमान जारी कर दिया कि पेड़ों का संरक्षण न होने पर अधिकारियों पर कार्रवाई होगी लेकिन क्या इस फरमान का असर पड़ा है तो शायद नहीं। डलमऊ के जोहवा नटकी नहर के बगल और हन्नु के पुरवा मार्ग पर लकड़ी माफिया हर दिन हरे पेड़ों का कत्ल कर रहे हैं और पुलिस आंख बंद कर लकड़ी माफियाओं के साथ गलबहियां मिलाए हुए है।

हरे पेड़ों के संरक्षण को लेकर गोष्ठी और अभियान समय-समय पर चलते रहते हैं तो साथ ही हर साल जुलाई में करोड़ों पेड़ रोपित होते हैं और इनके संरक्षण की शपथ ली जाती है। वन विभाग और पुलिस को पेड़ों पर निगाह रखने की जिम्मेदारी दी गई है लेकिन जिले में डलमऊ क्षेत्र लकड़ी माफियाओं का गढ़ बन गया है। पुलिस और वन विभाग की मिलीभगत से हर दिन हरे पेड़ों पर आरा चलता है। इस समय जोहवा नटकी और हन्नु के पुरवा मार्ग पर जमकर हरे पेड़ों की कटान हो रही है और उसे रोकने वाला कोई नहीं है।

अनजान बनी है पुलिस

पुलिस को हरे पेड़ों के कटान के बारे में पूरी जानकारी है लेकिन वह अनजान बनी हुई है। कारण मिलीभगत का दीमक पूरी व्यवस्था पर हावी हो गया है। कार्यवाहक कोतवाल संजय पांडेय तो सिरे से हरे पेड़ों के कटान को इंकार कर रहे हैं। अब देखना यह है कि जिले के बड़े अधिकारी इस कटान को किस तरह रोकते हैं। या फिर पेड़ों का संरक्षण सिर्फ दावों और वादों तक ही सीमित रहेगा।

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