अयोध्या में स्वच्छता रैंकिंग में पिछड़ने का ठीकरा विस्तारित क्षेत्र पर, जानें क्यों?
अयोध्या। धर्मनगरी अयोध्या का कायाकल्प करने की तमाम कवायदें चल रही हैं। विकास के नए-नए ढांचे तैयार किए जा रहे हैं। लेकिन इन सबके बीच जिम्मेदार अफसर यह भूल गए हैं कि विकास के पैमाने में स्वच्छता भी मायने रखती है। लिहाजा अयोध्या नगरी को राष्ट्रीय स्तर के स्वच्छता सर्वेक्षण में 134वां स्थान मिला है। …
अयोध्या। धर्मनगरी अयोध्या का कायाकल्प करने की तमाम कवायदें चल रही हैं। विकास के नए-नए ढांचे तैयार किए जा रहे हैं। लेकिन इन सबके बीच जिम्मेदार अफसर यह भूल गए हैं कि विकास के पैमाने में स्वच्छता भी मायने रखती है। लिहाजा अयोध्या नगरी को राष्ट्रीय स्तर के स्वच्छता सर्वेक्षण में 134वां स्थान मिला है। हालांकि अधिकारी इसका ठीकरा हाल ही में विस्तारित क्षेत्र में शामिल हुए 41 गांवों पर फोड़ते हैं।
अयोध्या एक पौराणिक स्थल है जहां हर कोई अपने जीवन में एक बार आना चाहता है। शहर का नाम सुनते ही लोग भगवान राम के दर्शन करने को लालायित हो जाते हैं। विश्व पटल पर अपनी अलग पहचान बना चुके अयोध्यावासियों को उस समय झटका लगा, जब राष्ट्रीय स्वच्छता सर्वेक्षण रैंकिंग 2021 में अयोध्या को 134वां स्थान मिला। पिछली बार 97वीं रैकिंग थी। देश के 4320 शहरों में हुई प्रतियोगिता में अयोध्या को 2072 अंक मिले। वहीं प्रदेश स्तर पर अयोध्या ने 1939 अंक हासिल किया। यहां निगम क्षेत्र में तकरीबन 4.5 लाख की आबादी बसती है।
पढ़ें: अयोध्या: अनियंत्रित स्कॉर्पियो पेड़ से टकराई, एक राहगीर की मौत
स्वच्छता रैंकिंग में पिछड़ने के कई कारण हैं। जिसमें मुख्य रूप से कूड़ा निस्तारण, डंपिंग व जगह-जगह गंदगी जैसी समस्या शामिल है। कूड़ा निस्तारण की बात करें तो यहां कूड़े के वैज्ञानिक निस्तारण का समुचित प्रबंधन नहीं है। निगम ने कूड़ा निस्तारण के लिए सरायखरगी में भूमि भी चयनित की थी। लेकिन वहां सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट की स्थापना नहीं हो सकी। सर्वे की टीम ने हाल ही में निगम के विस्तारित 41 गांव का भ्रमण किया था। इस दौरान वहां की सफाई व्यवस्था से असंतुष्ट होकर रिपोर्ट को सर्वे में शामिल किया था। निगम के पास कूड़ा निस्तारण के समुचित प्रबंध नहीं है। अयोध्या में कूडा डंप करने का उपयुक्त स्थान तक नहीं है। यहां 130 मीट्रिक टन कूड़ा निकलता है। इसका समाधान सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट से ही होगा।
प्लांट पिरखौली में लगना है। उसके बाद ही कूड़ा निस्तारण ठीक ढंग से हो सकेगा। सफाई व्यवस्था की बात करें तो निगम के पास 1974 सफाई कर्मी हैं, लेकिन कई इलाके ऐसे हैं जो गंदगी से बजबजाते रहते हैं। 60 वार्डों वाले निगम में संभवता 15 वार्ड तो ऐसे होंगे ही जहां सफाई नाम की चीज नहीं है। गौरतलब है कि फरवरी में सर्वे के लिए आई क्वालिटी काउंसिल ऑफ इंडिया (क्यूसीआई) की टीम ने कई जगहों का निरीक्षण किया था। जिसमें विस्तारित 41 गांव भी शामिल थे। टीम को जहां-जहां जिस चीज का अभाव मिला। उसे वह सर्वे में शामिल करती गई। नतीजा यह रहा कि अयोध्या को सर्वेक्षण में 134वां स्थान मिला।
लोगों को भी होना पड़ेगा जागरूक
अयोध्या को अगर स्वच्छता रैंकिंग की सूची में टॉप पर पहुंचाना है तो लोगों को भी जागरूक होना होगा। जगह-जगह कूड़ा फेंकना बंद करना होगा। जिला शौच मुक्त तो हो ही चुका है। अब जगह-जगह पेशाब करने वालों को भी जागरूक होना होगा कि वे अपने शहर को स्वच्छता की रैंकिंग में टॉप पर पहुंचाएं। स्वच्छता रैकिंग में नगर निगम के विस्तारण के बाद क्षेत्र में शामिल हुए गांवों को टीम ने सर्वे में शामिल किया था। जिस समय विस्तार हुआ उसी समय टीम सर्वे करने आ गई थी, जो भी अभाव दिखा। उसकी टीम ने रिपोर्ट लगा दी थी। इस वजह से अयोध्या को 134वां स्थान मिला है। हमारा प्रयास जारी है इस बार अब रैंकिंग में और अच्छा सुधार लाएंगे। शहर में टॉयलेट की संख्या बढ़ाई जा रही है और मैकेनिज्म स्वीपिंग के इंतजाम किए गए हैं। ताकि लोग इधर-उधर न जाकर टॉयलेट में ही पेशाब करें। यह कहना है विशाल सिंह, नगर आयुक्त, नगर निगम का।
