बरेली: हसन कमाल की शायरी गूंजेगी, माहेश्वर तिवारी गुनगुनाएंगे नवगीत
बरेली, अमृत विचार। दैनिक अमृत विचार अखबार के सफलतम दो वर्ष पूरे होने पर 27 नवंबर को आयोजित राष्ट्रीय कवि सम्मेलन एवं मुशायरे में देश के जाने माने शायर, गीत-गजलकार और कवि आ रहे हैं। इनमें हसन कमाल का बड़ा नाम है, जोकि 1980 के दशक की फिल्म निकाह के गीत-दिल के अरमां आंसुओं में …
बरेली, अमृत विचार। दैनिक अमृत विचार अखबार के सफलतम दो वर्ष पूरे होने पर 27 नवंबर को आयोजित राष्ट्रीय कवि सम्मेलन एवं मुशायरे में देश के जाने माने शायर, गीत-गजलकार और कवि आ रहे हैं। इनमें हसन कमाल का बड़ा नाम है, जोकि 1980 के दशक की फिल्म निकाह के गीत-दिल के अरमां आंसुओं में बह गए… हजूर आते आते बहुत देर कर दी और बीते हुए लम्हों की कसक साथ तो होगी-जैसे गीतों के लेखक हैं।
मंच पर जहां हसन कमाल की शायरी, गीत-गजल की गूंज होगी तो वहीं वरिष्ठ कवि और यश भारती सम्मान प्राप्त डा. माहेश्वर तिवारी अपने नवगीतों को गुनगुनाएंगे। गुड़गांव के हास्य-व्यंग के सशक्त हस्ताक्षर डा. अरुण जैमिनि अपनी रचनाओं से लोटपोट करेंगे। मशहूर शायर इकबाल अशहर दिलों की शायरी और गजलों से महफिल सजाएंगे। बरेली कालेज, बरेली के हॉकी मैदान में शनिवार को रात 8 बजे से कवि और शायरों की यह खूबसूरत महफिल सजेगी और सर्द भरी रात में आपका उत्साह बढ़ाती रहेगी।
कार्यक्रम में प्रख्यात शायर प्रोफेसर वसीम बरेलवी को सम्मानित किया जाएगा। इसके बाद देश के जाने माने शायर अपनी कलम का जादू दिखाएंगे। मुंबई से आ रहे प्रख्यात गीत-गजलकार हसन कमाल मंच पर अपनी प्रसिद्ध गजल- किसी नज़र को तेरा इंतेज़ार आज भी है, कहां हो तुम के ये दिल बेक़रार आज भी है। इसके साथ ही युवाओं के लिए खासतौर पर तोसे नैना लागे रे पिया सांवरे..नहीं बस में अब ये जिया सांवरे.. जैसे गीतों पर युवाओं को झूमने पर मजबूर करेंगे।
कार्यक्रम में ताहिर फ़राज़ (रामपुर), मंसूर उस्मानी (मुरादाबाद), हसीब सोज (अलापुर), अकील नोमानी (मीरगंज), शबीना अदीब (कानपुर) आ रही हैं। डा. माहेश्वर तिवारी (मुरादाबाद), डा. कीर्ति काले, डा. प्रवीण शुक्ल, डा. विष्णु सक्सेना (दिल्ली) डा. अरुण जैमिनि (गुड़गांव), डा कल्पना शुक्ला (कानपुर), अनामिका अंबर जैन (मेरठ) से अपनी रचनाओं के साथ आ रही हैं।
आज के फिल्मकारों को हिंदी-उर्दू की समझ नहीं : हसन कमाल
प्रख्यात गीतकार हसन कमाल मानते हैं कि आज के फिल्मकारों को हिंदी-उर्दू की समझ नहीं है, इसलिए अब फिल्मों में अच्छी शायरी कम होती जा रही हैं। गीत कम होते जा रहे हैं। अमृत विचार की ओर से 27 नवंबर को होने वाले राष्ट्रीय कवि सम्मेलन एवं मुशायरे में शायर हसन कमाल आमंत्रित हैं। उन्होंने अपने आने की स्वीकृति दे दी है। कई चर्चित फिल्मों के गीतकार हसन कमाल ने कहा कि आज के फिल्मकार तमाम दूसरी भाषाएं तो जानते हैं लेकिन हिंदी और उर्दू उतनी ही जानते हैं जितनी नौकरों से बात करने के लिए काम आती है। वे इतने ही शब्दों वाले गीत भी अपनी फिल्मों में चाहते हैं।
यही कारण है कि शायरों का फिल्मों से रिश्ता कम होता जा रहा है। वे कहते हैं कि उन्होंने ‘अनवर’फिल्म में गीत ‘तोसे नैना लागे पिया बावरे’ लिखा, जो थोड़ा अलग ढंग का था और काफी लोकप्रिय भी हुआ। इससे पहले उन्होंने ‘तेर पायल मेरे गीत’ फिल्म में गीत लिखे थे। हसन कमाल, जिन्होंने दिलीप कुमार, राज बब्बर की मुख्य भूमिकाओं वाली रवि चोपड़ा की फिल्म ‘मजदूर’ में भी संवाद लिखे थे। उनका कहना है कि फिल्मों से गीत गायब होते जा रहे हैं। जोकि चिंता का विषय है। लोगों को गीत और गजल से दूर किया जा रहा है।
कविता सरल और सरस हो ताकि श्रोता अर्थ समझें : डा माहेश्वर तिवारी
वरिष्ठ कवि और यश भारती समेत कई सम्मान प्राप्त कर चुके डा. माहेश्वर तिवारी का कहना है कि कविता तो हर कोई लिख सकता है, लेकिन कविता वही होती है जिसका अर्थ सरल और सरस हो ताकि श्रोताओं के सीधे समझ में आ जाए। उन्होंने कहा कि अमृत विचार के दो साल पूरे होने की सफलता का जश्न मनाया जा रहा है, इसमें 27 नवंबर को होने वाले राष्ट्रीय कवि सम्मेलन और मुशायरे में वह पहुंचेंगे, ऐसे कार्यक्रम आज के माहौल में बहुत जरूरी हैं। उन्होंने कहा कि नवगीत ने हमेशा अपने समय के अधुनातन संदर्भों के यथार्थ को मुक्तछंद की कविताओं के समांतर ही उजागर किया है।
कविता में यथार्थ का अर्थ सपाटबयानी या समाचार-वाचन नहीं होता, सच्ची कविता में यथार्थ की उपस्थिति भी अपनी संवेदनशीलता और काव्यत्व की ख़ुशबू के साथ होती है। नवगीतों में यथार्थ का चित्रण इसी काव्यत्व की ख़ूबसूरती के साथ प्रस्तुत किया गया है। यह आम धारणा के साथ-साथ कड़वी सच्चाई भी है कि आज के समय में राजनीति के क्षेत्र में वही व्यक्ति सफल है या हो सकता है जो छल-छंद, मक्कारी, दबंगई और अनैतिक चातुर्य में निपुण हो। राजनीति के ऐसे ही विद्रूप पक्ष को अपनी पंक्तियों में उन्होंने व्यक्त भी किया है।
कविता इंसान को ढंग से जीना सिखाती है : डा. अरुण जैमिनि
प्रख्यात हास्य-व्यंग्यकार डा. अरुण जैमिनि का कहना है कि साहित्य हमेशा सृजन करता है। सिखाता ही है। कविता इंसान को ढंग से जीना सिखाती है। मनुष्य में संवेदनशीलता लेकर आती है। साहित्य चाहे कोई सा हो नाटक उपन्यास, कहानी से हमेशा सीख मिलती है। शायरी और कविता में कोई अंतर नहीं है। व्यक्त करने के तरीके अलग हैं। शायरी और कविताओं से जीवन की सच्चाई सामने आती है। अगर श्रोता शायरी या कविता करने वाले के भाव को समझ गए तो जीवन सफल है।
उनका कहना है कि अमृत विचार का 27 नवंबर को होने वाला आयोजन एक मिसाल बनेगा। इसमें दुनिया के विख्यात शायर प्रोफेसर वसीम बरेलवी को सम्मानित किया जा रहा है। वसीम साहब को सुनना एक बड़ा अनुभव है। उनका आशीर्वाद हमेशा युवा पीढ़ी को मिलता है। आने वाली पीढ़ी को वह संरक्षण देते हैं। मंच पर भी वह हमेशा दिलों को जोड़ने वाली रचनाएं प्रस्तुत करके दिल खुश कर देते हैं।
समाज को जोड़ता है गीत-गजल का संगम : इकबाल अशहर
प्रसिद्ध शायर इकबाल अशहर का कहना है कि गजल और गीत दो विधाएं हैं। यह विधाएं जन मानस को जोड़ने का काम करती हैं। इनके संगम का श्रोताओं के दिलों पर अच्छा असर होता है। मौजूदा समय में गीत और गजल के कार्यक्रम होने की बहुत जरूरत है क्योंकि मौजूदा दौर में युवा पीढ़ी मोबाइल की तरफ दौड़ रही है, इनको भी इनसे रूबरू कराने की जरूरत है। शायरी से या कविता से समुदाय विशेष का कोई मतलब नहीं है। यह दो भाषाएं एक दूसरे की पूरक हैं। अमृत विचार ने 27 नवंबर को जो कार्यक्रम रखा है वह बहुत अच्छा संदेश देने वाला है। जहां हिंदी और उर्दू जबान का संगम होगा।
उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम में प्रख्यात शायर प्रोफेसर वसीम बरेलवी का सम्मान किया जाना भी बड़ा संदेश है। उन्होंने पूरी दुनिया में अपनी रचनाओं से हिंदी और उर्दू साहित्य का जो नाम रोशन किया है वह किसी से छुपा नहीं है। इस कार्यक्रम में वे खुद भी अपनी रचनाओं के साथ मौजूद रहेंगे।
