पूर्वांचल के बाद अखिलेश का अगला पड़ाव बुंदेलखंड…

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लखनऊ। उत्तर प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनाव के मद्देनजर समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने प्रदेश के पूर्वांचल इलाके में समाजवादी विजय रथ यात्रा की धमाकेदार परिणति के बाद अब बुंदेलखंड को अपना अगला पड़ाव बनाया है। इसका मकसद पूर्वांचल की ही तरह बुंदेलखंड में भी मतदाताओं को यह संदेश देना है कि …

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनाव के मद्देनजर समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने प्रदेश के पूर्वांचल इलाके में समाजवादी विजय रथ यात्रा की धमाकेदार परिणति के बाद अब बुंदेलखंड को अपना अगला पड़ाव बनाया है। इसका मकसद पूर्वांचल की ही तरह बुंदेलखंड में भी मतदाताओं को यह संदेश देना है कि यहां भी भाजपा से सीधे मुकाबले में सपा ही है। जिससे सपा, दलित और पिछड़ी जातियों की बहुलता वाले इस क्षेत्र में अपने जनाधार को फिर से हासिल कर सके।

प्राप्त जानकारी के मुताबिक अखिलेश अगले महीने पहली दिसंबर से बुंदेलखंड के अति पिछड़े क्षेत्र बांदा से समाजवादी विजय रथ यात्रा का आगाज करेंगे। अखिलेश के संभावित कार्यक्रम के अनुसार वह एक दिसंबर को हेलीकॉप्टर से बांदा पहुंचेंगे। यहां विजय रथ यात्रा में शामिल होकर जनसंपर्क करते हुये वह विजय रथ से ही महोबा के लिये रवाना होंगे। वहीं, बांदा के जिलाध्यक्ष विजय करन यादव ने बताया कि बांदा में जनसंपर्क के दौरान यहां स्थित स्थानीय राजकीय इंटर कालेज मैदान में अखिलेश की ओर से एक जनसभा को भी संबोधित करने की संभावना हैं।

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उल्लेखनीय है कि बुंदेलखंड के दो मंडलों (झांसी और चित्रकूट) में कुल 19 विधानसभा सीट आती हैं। पिछले विधानसभा चुनाव में इस क्षेत्र की सभी 19 सीटें भाजपा की झोली में गयी थीं। जानकारों का मानना है कि पिछली बार मोदी लहर में भाजपा ने सभी सीटों पर कब्जा जमाने का करिश्मा कर दिखाया था। लेकिन इस बार चित्रकूट मंडल सहित समूचे बुंदेलखंड में भाजपा के लिये पिछले कीर्तिमान को कायम रख पाना आसान नहीं है।

बांदा चिंत्रकूट मंडल की 10 विधानसभा सीटों में से चार सीट वाले बांदा जिले की सुरक्षित सीट नरैनी पर बसपा के वरिष्ठ नेता गयाचरण दिनकर की सक्रियता ने इस बार मुकाबले को त्रिकोंणीय बना दिया है। वहीं बसपा के कद्दावर नेता रहे बाबू सिंह कुशवाहा और नसीमुद्दीन सिद्दिकी का झुकाव इस बार सपा की ओर होने के कारण बांदा सदर सीट पर भी मुकाबला दिलचस्प रहने के आसार हैं। हालांकि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पहल पर झांसी में 19 नवंबर को रानी लक्ष्मीबाई की जयंती पर राष्ट्र रक्षा समर्पण पर्व का भव्य आयोजन, बुंदेलखंड की राजनीतिक धारा को जाति समीकरणों के बजाय विकास और राष्ट्रवाद की ओर मोड़ने की कोशिश का नतीजा था। यह तो भविष्य ही बतायेगा कि जनता, अखिलेश और मोदी में से किसकी पहल को पसंद करती है।

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