भाजपा सरकार जानबूझकर बढ़ा रही महंगाई : अखिलेश यादव

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लखनऊ। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा है कि भाजपा सरकार जानबूझकर महंगाई बढ़ा रही है। लगातार बढ़ती महंगाई को यह सरकार रोक नहीं रही है। आज किसान नौजवान सभी दुःखी है। रोटी-रोजगार का कोई इंतजाम नहीं है। इस सरकार में सभी परीक्षाओं के पेपर लीक हो रहे हैं। सरकार में पता …

लखनऊ। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा है कि भाजपा सरकार जानबूझकर महंगाई बढ़ा रही है। लगातार बढ़ती महंगाई को यह सरकार रोक नहीं रही है। आज किसान नौजवान सभी दुःखी है। रोटी-रोजगार का कोई इंतजाम नहीं है। इस सरकार में सभी परीक्षाओं के पेपर लीक हो रहे हैं। सरकार में पता नहीं कौन सा लीकेज है जो बंद नहीं हो रहा है। परीक्षाएं लगातार रद्द हो रही है। समाजवादी सरकार आने पर हम बेहतर इंतजाम करेंगे। नौजवानों को नौकरी और रोजगार मिलेगा। कोई भी परीक्षा रद्द नहीं होगी। किसान को खाद के लिए लाइन में नहीं लगना होगा। उनके लिए नई योजनाएं लाएंगे। उम्मीद से ज्यादा बिजली में राहत मिलेगी। भूख से निजात दिलाएंगे। बुंदेलखंड की किस्मत बदलेगी।

समाजवादी विजय रथ यात्रा के पांचवे चरण के दूसरे दिन बुंदेलखंड के ललितपुर के गिन्नौट बाग में गुरुवार को जनसभा को सम्बोधित करते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि भाजपा सरकार ने बुंदेलखंड की जनता को धोखा दिया है। नीति आयोग के अनुसार सबसे ज्यादा गरीबी यहां है। भाजपा ने साढ़े चार साल में जनता को बहुत दुःख और तकलीफ दिया है। उन्होंने कहा कि सपा सरकार के समय हमने गरीबों के लिए समाजवादी खाद्य पैकेट का इंतजाम किया था। तालाब खुदवाए थे। नौजवानों को लैपटॉप बांटे थे। राहत पैकेट में आटा, चावल, आलू, नमक, घी मिल्क पाउडर दिया गया था। भाजपा मिली-जुली संस्कृति खत्म करने पर तुली है।

उन्होंने कहा कि कोरोना काल में हमारे गरीब और मजदूर अपने घरों को जाने के लिए पैदल चलने पर मजबूर हुए। भाजपा सरकार ने राज्य की सीमाओं को बैरिकेडिंग लगा कर रोक दिया। ऐसा अन्याय और अत्याचार बंटवारे के समय भी नहीं हुआ था। हमारी सरकार होती तो हम बस और गाड़ियों से उन्हें घर भिजवाने का इंतजाम करते। अपने लोगों को पैदल नहीं चलना पड़ता। ललितपुर में एक गर्भवती को पैदल चलना पड़ा और बेटी पैदा हुई।

उसकी भी मदद सरकार ने नहीं की सिर्फ समाजवादियों ने की। इसी तरह कोरोना काल में जिन भी मजदूरों की मृत्यु हुई समाजवादियों ने उनकी मदद की। सत्ता में बैठे लोग परिवारवाद की बात करते हैं लेकिन वे परिवार का दुःख और तकलीफ नहीं समझते। परिवार का दुःख परिवार वाले ही समझ सकते हैं जिनके परिवार नहीं है वे दूसरों के दुःख, तकलीफ और संवेदना नहीं जानते हैं।

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