बरेली: साधारण स्टांप पर जमीन की बिक्री दर्शा कर जता रहे मालिकाना हक
बरेली, अमृत विचार। बरेली विकास प्राधिकरण (बीडीए) की रामगंगानगर आवासीय परियोजना में करोड़ों के विकास के साथ जब भूखंडों के रेट काफी बढ़ गए हैं तो परियोजना में शामिल जमीन पर लोगों ने मालिकाना हक जताना शुरू कर दिया है। बीडीए के अधिकारियों का कहना है कि जमीन पर स्वामित्व बता रहे लोगों ने अधिग्रहण …
बरेली, अमृत विचार। बरेली विकास प्राधिकरण (बीडीए) की रामगंगानगर आवासीय परियोजना में करोड़ों के विकास के साथ जब भूखंडों के रेट काफी बढ़ गए हैं तो परियोजना में शामिल जमीन पर लोगों ने मालिकाना हक जताना शुरू कर दिया है। बीडीए के अधिकारियों का कहना है कि जमीन पर स्वामित्व बता रहे लोगों ने अधिग्रहण के बाद तमाम भू-स्वामियों से ऐसे स्टांप पर ही भूमि बिक्री दर्शा दी है। इसकी कानूनी तौर पर कोई मान्यता नहीं है।
विरोध कर रहे ऐसे लोगों का ब्योरा तैयार किया जा रहा है। शुक्रवार को बिचपुरी के लोगों से वार्ता के दौरान बीडीए सचिव योगेंद्र कुमार का कहना है कि अधिग्रहण के बावजूद मालिकाना हक जता रहे लोगों के नामों की सूची और कागजातों का रिकार्ड मांगा जा चुका है। उधर बीडीए उपाध्यक्ष उपाध्यक्ष भी कह चुके हैं कि इस पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय टीम से जांच करा ली जाए तो सारा मामला अपने आप साफ हो जाएगा।
बीडीए ने डोहरा और बीसलपुर रोड के बीच वर्ष 2004 में करीब 270 हेक्टेयर भूमि पर रामगंगानगर आवासीय परियोजना का खाका तैयार किया था लेकिन विकास कार्यों की कमी और भूखंडों की बिक्री न होने से यह परियोजना लंबे समय से ठप पड़ी थी। पिछले दो साल के दौरान बीडीए ने यहां अटल पथ सहित विकास के दूसरे कई बड़े प्रोजेक्ट प्रारंभ किए हैं। साथ ही तमाम गेटबंद कॉलोनियों को विकसित करने के बाद भू -आवंटियों की तादाद में अप्रत्याशित तौर से बढ़ोत्तरी हुई है।
इसके बाद यहां भूखंडों के रेट और मांग दोनों ही अर्श से फर्श पर पहुंच गई है। इसके बाद बीडीए की ठप पड़ी इस परियोजना में बेशकीमत जमीनों को दबाए बैठे भूमाफिया की भी शामत आ गई है। बताते हैं कि चंदपुर, बिचपुरी, डोहरिया, अहिरोला सहित तमाम दूसरे गांवों की बड़े पैमाने पर जमीन के अधिग्रहण के बाद भी लोगों ने उस पर अब तक अपना कब्जा नहीं छोड़ा है। हालांकि बीडीए ने कब्जा की गई ऐसी जमीन को मुक्त तो करा लिया है लेकिन अभी भी करीब चार हेक्टेयर जमीन के कब्जामुक्त न हो पाने की जानकारी मिली है।
बीडीए इसे भी जल्द से जल्द खाली कराना चाहता है लेकिन कभी कौड़ियों के भाव की इस जमीन को कब्जाए बैठे लोग अब इस पर अपना कब्जा नहीं छोड़ना चाह रहे हैं। बीडीए के अधिकारियों का कहना है कि इस परियोजना के लिए जिस जमीन का अधिग्रहण किया गया था, उस पर कब्जा न हो पाने और काफी समय तक मुआवजा लटका रहने के चलते जिन भूस्वामियों ने अपनी जमीन का बैनामा बीडीए को किया था, उनमें से तमाम लोगों ने ऐसे ही स्टांप पर अपनी जमीन को औने-पाने रेट पर दूसरों के नाम पर किया।
अब रामगंगानगर में जमीन की मांग बढ़ने के बाद जब बीडीए कब्जा लिए लोगों को हटाने की कार्रवाई कर रहा तो लोग अवैध तौर से स्टांप पर ही कराई गई लिखा-पढ़ी के आधार पर संबंधित जमीन पर अपना मालिकाना हक दर्शा रहे हैं। बिचपुरी के तमाम ग्रामीणों ने दो दिन पहले अधिग्रहण की गई जमीन को लेकर विरोध किया था। बीडीए के अधिकारी अब ऐसे मामले का विस्तृत ब्योरा तैयार कर रहे हैं।
नेताओं के संरक्षण में सक्रिय हुए छुटभैया, खुफिया तंत्र सक्रिय
बीडीए काफी समय से पीलीभीत बाईपास, नकटिया, बदायूं रोड, शाहजहांपुर रोड, नैनीताल रोड, मिनी बाईपास सहित कई जगहों पर अवैध तौर से बनी कॉलानियों को ढहाने की कार्रवाई कर रहा है। इसमें कई बड़े नेताओं और उनके गुर्गों को भी काफी नुकसान पहुंचा है। इससे खुन्नस खाए बैठे ये लोग अंदरखाने बीडीए के खिलाफ विरोध की चिंगारी सुलगाने की कोशिश कर रहे हैं। बताते हैं कि बड़ी संख्या में भूस्वामियों को भी गुमराह करने की कोशिश भी चल रही है। इसकी भनक लगते ही प्रशासन ने खुफिया तंत्र को भी सक्रिय कर दिया है।
रामगंगानगर आवासीय परियोजना में जिन जमीन का अधिग्रहण काफी पहले हो चुका है, उस जमीन को लेकर मालिकाना हक जताया जा रहा है। परियोजना में जमीन का अधिग्रहण करा चुके तमाम भू-स्वामियों से कुछ लोगों ने ऐसे ही स्टांप जमीन की बिक्री-खरीद दर्शा दी है। इन कागजों का कानूनन कोई मतलब नहीं है। -जोगिंदर सिंह, उपाध्यक्ष, बीडीए
