बरेली: कबाड़ बिक्री में लाखों के खेल की एंटी करप्शन से भी शिकायत
बरेली, अमृत विचार। नगर निगम के जलकल विभाग में एक करोड़ के कबाड़ को महज 32 लाख रुपये में गाजियाबाद की फर्म को बेचे जाने का प्रकरण अफसरों की गले की फांस बन गया है। नगर निगम कार्यकारिणी के पार्षदों के हंगामे के बाद मेयर ने इस प्रकरण में जांच बैठा दी है। कई बिंदुओं …
बरेली, अमृत विचार। नगर निगम के जलकल विभाग में एक करोड़ के कबाड़ को महज 32 लाख रुपये में गाजियाबाद की फर्म को बेचे जाने का प्रकरण अफसरों की गले की फांस बन गया है। नगर निगम कार्यकारिणी के पार्षदों के हंगामे के बाद मेयर ने इस प्रकरण में जांच बैठा दी है। कई बिंदुओं पर रिपोर्ट नगर आयुक्त से मांगी है। इधर, पार्षदों ने लाखों के खेल की शिकायत एंटी करप्शन ब्यूरो में भी की है। वहां से भी जांच शुरू होने का इंतजार किया जा रहा है।
जलकल विभाग का 20 साल से भी अधिक पुराना कबाड़ फायर ब्रिगेड स्टेशन के पास विभागीय स्टोर में रखा था। जलकल विभाग के महाप्रबंधक राजेश कुमार यादव ने कुछ समय पहले नगर आयुक्त अभिषेक आनंद से इस कबाड़ को बेचने की अनुमति ली थी। दिल्ली की एक संस्था से कबाड़ का मूल्यांकन कराने के बाद सितंबर 2021 को सार्वजनिक सूचना देकर ई-टेंडर के माध्यम से 32 लाख रुपये में कबाड़ की बिक्री कर दी।
इसकी भनक लगने के बाद ही कार्यकारिणी समिति में शामिल पार्षद उपसभापति संजय राय, राजकुमार गुप्ता, कपिलकांत सहित तमाम अन्य पार्षद इस प्रक्रिया का विरोध कर रहे हैं। इस मामले में उन्होंने अधिकारियों की भूमिका पर सवाल खड़े किए हैं कि नगर निगम की संपत्ति की बिक्री करने से पहले अधिकारियों को प्रमुख सचिव शहरी विकास से अनुमति लेनी चाहिए। इसको लेकर बोर्ड के समक्ष प्रस्ताव रखा गया, न ही कार्यकारिणी से अनुमति ली गई और गुपचुप बिक्री की कार्रवाई को पूरा कर दिया गया। कबाड़ बिक्री के लिए जो समिति बनाई गई, उसमें जलकल विभाग के महाप्रबंधक, पर्यावरण अभियंता और लेखाधिकारी की टीम बनाई गई लेकिन इसमें किसी भी कार्यकारिणी के सदस्य को शामिल नहीं किया।
और तो और टेंडर की पहली प्रक्रिया में ही शामिल हुईं दो फर्मों में एक का चयन कर दिया गया। जबकि इसमें कम से कम तीन फर्म तो होनी ही चाहिए थी। कार्यकारिणी के पार्षदों ने ऐसी गड़बड़ियों को लेकर अफसरों को घेरते हुए मेयर डॉ. उमेश गौतम तक मामला पहुंचाया तो उन्होंने इस प्रकरण की जांच बैठाते हुए बिंदुवार जांच रिपोर्ट नगर आयुक्त अभिषेक आनंद से मांगी है।
मेयर के रोक के बावजूद कबाड़ को पार कराने की कोशिश
कार्यकारिणी के पार्षदों के विरोध के चलते मेयर डॉ. उमेश गौतम ने कबाड़ को उठाने पर रोक लगा दी थी। जबकि, पार्षदों का कहना है कि प्रतिबंध के बावजूद जलकल विभाग के स्टोर से बुधवार को भी ट्रक भेजकर कबाड़ को उठवाने की कोशिश की गई। पार्षदों ने इसका विरोध करते हुए उच्चाधिकारियों को भी इसकी सूचना दे दी तो ड्राइवरों ने ट्रक बगैर लोड किए ट्रक आकर बाहर खड़ा कर दिया।
दिल्ली की संस्था से कबाड़ का क्यों करा दिया मूल्यांकन
जलकल विभाग के कबाड़ की बिक्री में लाखों की गोलमाल की शिकायत के बाद सवाल यह भी उठ रहा है कि अफसरों ने दिल्ली की एक संस्था को ही मूल्यांकन के लिए क्यों चुना? जानकारों का कहना है कि सरकारी संपत्ति की बिक्री के लिए शासन से अनुमति ली जानी चाहिए थी। शासन स्तर से ही गठित तकनीकी समिति इसका मूल्यांकन करती है। विभाग को इसकी धनराशि कम लग रही तो दूसरी बार भी अन्य संस्था से मूल्यांकन कराया जा सकता है।
जलकल विभाग के कबाड़ बिक्री मामले में जो भी जानकारियां मांगी गई हैं, उन सभी का ब्योरा तैयार किया जा रहा है। जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी। फिलहाल इसमें अभी कुछ भी कहना ठीक नहीं है। -अभिषेक आनंद, नगर आयुक्त
मैंने नगर आयुक्त से ही परमीशन के बाद समस्त जरूरी प्रक्रिया अपनाते हुए कार्रवाई पूरी की है। इसमें किसी तरह की कोई गड़बड़ी नहीं है। चाहे तो इसकी जांच करा ली जाए। -राजेश कुमार यादव, महाप्रबंधक, जलकल
