तैयारी जरूरी
ऑमिक्रॉन ने देश के कई शहरों में दस्तक दे दी है तो सरकार व नागरिकों की चिंता स्वाभाविक है। यह वायरस डेल्टा वेरिएंट के मुकाबले तीन गुना अधिक संक्रमण वाला है। फिलहाल देश में मामले गिनती के हैं और केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री मनसुख मांडविया कह रहे हैं कि ऑमिक्रॉन को लेकर देश …
ऑमिक्रॉन ने देश के कई शहरों में दस्तक दे दी है तो सरकार व नागरिकों की चिंता स्वाभाविक है। यह वायरस डेल्टा वेरिएंट के मुकाबले तीन गुना अधिक संक्रमण वाला है। फिलहाल देश में मामले गिनती के हैं और केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री मनसुख मांडविया कह रहे हैं कि ऑमिक्रॉन को लेकर देश के वैज्ञानिक और विशेषज्ञ अध्ययन कर रहे हैं और पूरे तथ्य सामने आने के बाद आगे कदम उठाए जाएंगे।
ऑमिक्रॉन के संबंध में आपात स्थिति के मद्देनजर गुरुवार को स्वास्थ्य मंत्रालय की राज्यों के साथ आयोजित एक बैठक में सरकार ने कहा कि केंद्र द्वारा आपूर्ति किए गए कई वेंटिलेटर अब भी कुछ अस्थायी अस्पतालों में बिना पैकिंग और बिना इस्तेमाल के पड़े हुए हैं। स्वास्थ्य सचिव ने राज्यों से पूरी पात्र आबादी का पूर्ण टीकाकरण सुनिश्चित करने के लिए चल रहे हर घर दस्तक अभियान पर ध्यान केंद्रित करते हुए कोविड-19 के राष्ट्रव्यापी टीकाकरण अभियान के दायरे और रफ्तार को जारी रखने के लिए भी कहा है।
केंद्र ने राज्यों से कहा है कि वे कोविड-19 के उपचार के लिए निर्धारित आठ महत्वपूर्ण दवाओं का पर्याप्त बफर स्टॉक बनाए रखें और तुरंत समीक्षा करें कि ऑक्सीजन के सभी संयंत्र, कन्संट्रेटर और वेंटिलेटर व्यवस्थित हैं तथा काम कर रहे हैं।
शुक्रवार को स्वास्थ्य मंत्री ने लोकसभा में बताया कि देश में अब तक 86 प्रतिशत वयस्कों को कोरोना वायरस रोधी टीके की कम से कम एक खुराक दी जा चुकी है और सरकार जल्द से जल्द 100 प्रतिशत टीकाकरण के लक्ष्य को पूरा करने के लिए प्रयासरत है। मांडविया ने कहा कि कोरोना वायरस अपना स्वरूप बदलता रहता है। इनके जिनोम अनुक्रमण के लिए देश में 36 प्रयोगशालाएं हैं।
डब्ल्यूएचओ महानिदेशक टेड्रोस घेब्रेयेसस ने कहा है कि कोरोना वायरस के नए ऑमिक्रॉन वेरिएंट के लक्षणों के बारे में अभी कुछ कहना जल्दबाजी होगा। उन्होंने महामारी के प्रति किसी भी तरह की लापरवाही को लेकर चेतावनी देते हुए सभी देशों से निगरानी, परीक्षण और अनुक्रमण बढ़ाने का आग्रह किया है।
निस्संदेह ऑमिक्रॉन को खतरे की घंटी मानकर हमें सतर्क होना होगा। पहली लहर के बाद यदि हम लापरवाह न हुए होते तो दूसरी लहर की घातकता से हमें नहीं जूझना पड़ता। दूसरी लहर में चिकित्सातंत्र की लाचारगी को देखते हुए सरकारों को अतिरिक्त सुरक्षा उपाय अपनाने चाहिए। नई चुनौती के मुकाबले के लिए कॉन्टैक्ट-ट्रेसिंग और टेस्टिंग में कोई लापरवाही नहीं बरती जानी चाहिए।
