फ्रांस की सेना 9 साल बाद टिम्बकटू से कर रही है घर वापसी, जानिए क्या पूरा मामला
बमाको (माली)। फ्रांस की सेना मंगलवार रात माली के टिम्बकटू शहर से रवाना हो गई। यह इस बात का संकेत है कि इस्लामी चरमपंथियों को खदेड़ने के लगभग नौ साल बाद पूर्व औपनिवेशिक शक्ति उत्तरी माली में अपनी मौजूदगी कम कर रही है। इस कदम के बीच सवाल उठ रहे हैं कि क्या माली की …
बमाको (माली)। फ्रांस की सेना मंगलवार रात माली के टिम्बकटू शहर से रवाना हो गई। यह इस बात का संकेत है कि इस्लामी चरमपंथियों को खदेड़ने के लगभग नौ साल बाद पूर्व औपनिवेशिक शक्ति उत्तरी माली में अपनी मौजूदगी कम कर रही है।
इस कदम के बीच सवाल उठ रहे हैं कि क्या माली की सेना खुद कार्रवाई कर चरमपंथियों को रोक पाने में सक्षम है। चरमपंथियों ने 2013 के हमले के बाद से खुद को मजबूत किया है और दक्षिण में अपनी पहुंच को बढ़ाया है। फ्रांस की सेना ने मंगलवार रात एक विज्ञप्ति में इस बात पर जोर दिया कि माली की सेना की ”टिम्बकटू में अच्छी पकड़ है”, इसके अतिरिक्त वहां संयुक्त राष्ट्र के करीब 2200 शांतिरक्षक भी स्थायी रूप से तैनात हैं।
जिहादी आतंकियों के हमले और अंतर जातीय लड़ाई की वजह से उत्तरी माली में कई सालों से उथल-पुथल का माहौल है। जिहादियों ने अपनी पकड़ को देश के दक्षिण हिस्से से लेकर इसके केंद्र तक की हुई है। आतंकी संगठन अल-कायदा से जुड़े कट्टरपंथी समूहों ने 2012 में टिम्बकटू पर कब्जा जमा लिया था। उस समय तक टिम्बकटू की पहचान एक प्राचीन शहर के रूप में होती थी, जो अपनी कीमती ऐतिहासिक इस्लामी पांडुलिपियों के लिए पहचाना जाता था। साथ ही दुनियाभर से विदेशी पर्यटक बड़ी संख्या में इस शहर में घूमने आते थे।
टिम्बकटू शहर को लेकर माना जाता है, यहां 333 मुस्लिम संतों की कब्रें इस शहर की रक्षा करती हैं और इसलिए इसे यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थल का दर्जा भी दिया गया है। हालांकि, जिहादियों के कब्जे के बाद से हालात बिगड़ गए। आतंकियों ने कई ऐतिहासिक धरोहरों को नुकसान भी पहुंचाया है। इन्हें अब यूनेस्को की मदद से फिर से ठीक किया जा रहा है। दूसरी तरफ, अभी तक पर्यटकों की भीड़ इस प्राचीन शहर की तरफ नहीं आई है, क्योंकि उत्तरी और केंद्रीय माली में अभी भी हिंसा का चक्र जारी है।
