बरेली: सीएम से अधूरे पंचायत भवनों का भी करवा दिया शिलान्यास
बरेली, अमृत विचार। गांवों में आमजन की सुविधा के लिए एक ही जगह पर विभाग के सभी लोग आसानी से मिल जाएं। ग्रामीणों को जिला व तहसील मुख्यालय के चक्कर न लगाने पड़े। इसको लेकर सरकार की मंशा है कि हर ग्राम पंचायत में पंचायत घर की स्थापना हो, लेकिन उनके अधीनस्थ शासन की इस …
बरेली, अमृत विचार। गांवों में आमजन की सुविधा के लिए एक ही जगह पर विभाग के सभी लोग आसानी से मिल जाएं। ग्रामीणों को जिला व तहसील मुख्यालय के चक्कर न लगाने पड़े। इसको लेकर सरकार की मंशा है कि हर ग्राम पंचायत में पंचायत घर की स्थापना हो, लेकिन उनके अधीनस्थ शासन की इस मंशा को पलीता लगाने में जुटे हैं। हद तो तब हो गई जब तीन दिन पूर्व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से अधूरे पंचायत भवनों का शिलान्यास ऑनलाइन माध्यम से करवा दिया गया। हालांकि, अफसरों का दावा है कि सिर्फ उन्हीं का लोकपार्ण हुआ जो पूर्ण हो चुके हैं।
जिले की समस्त ग्राम पंचातयों के पंचायत भवनों में ही बैठकों के साथ ग्रामीणों की सुविधाओं के लिए आय, जाति, निवास प्रमाण पत्र के साथ बैंकिंग सुविधा मुहैया कराने के मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए हैं, लेकिन उनके इस निर्देश को ताक पर रखकर नवाबगंज, शेरगढ़, बिथरीचैनपुर आदि ब्लाक के अधिकारियों ने अधूरे व ग्रामीणों के कब्जे वाले पंचासत भवनों का कागजी घोड़े दौड़ाकर ऑनलाइन शिलान्यास करवाकर वाहवाही लूट ली।
कुछ का हाल तो यह भी है कि नींव रखकर बंद हुए निर्माण कार्य को शुरू करने के लिए आजतक समय ही नहीं मिल पाया, लेकिन उसका भी लोकपार्ण हो गया। बताते हैं कि फतेहगंज में बने एक पंचायत भवन का कुछ हिस्सा तो नदी में समा चुका है। इसके बिथरीचैनपुर और भोजीपुरा के कुछ पंचायत भवन जर्जर पड़े हैं, जो हादसों को दावत दे रहे हैं।
नाम नहीं छापने की शर्त पर विभाग में तैनात एक कर्मचारी ने बताया कि अभी 48 पंचायत भवन पूर्ण हैं, जबकि पांच ग्राम पंचायतों में जमीन विवाद चल रहा है। एक में जमीन उपलब्ध नहीं है। बावजूद इसके ज्यादातर पंचायतों में अधिकारी पंचायत भवन पूर्ण होने का दावा कर रहे हैं।
723 गांवों में बनने थे नए पंचायत भवन
जिले की समस्त 1193 ग्राम पंचायतों की बात करें तो यहां 723 गांवों में नए पंचायत भवन बनने थे। बाकी ग्राम पंचायतों में यह पंचायत भवन बने थे, जो जर्जर थे, उनको ठीक कराया गया। कई में मरम्मत का काम चल रहा है। वहीं, दूसरी तरफ पंचायत भवनों में पंचायत सहायक व कंप्यूटर आपरेटर की तैनाती भी की जा चुकी है। इनको बीते दिनों प्रशिक्षण दिया गया था। अफसरों के मुताबिक इन पर खर्च होने वाले व्यय वित्त आयोग, मनरेगा, ग्राम निधि और अन्य प्रशासनिक मद में अनुमन्य धनराशि से खर्च किए जाने को मंजूरी दी गई है।
पंचायत भवनों की वास्तविक स्थिति से शासन को पहले ही अवगत कराया जा चुका था। शासन के पास भी समस्त पंचायत भवनों का डाटा है। कुछ ग्राम पंचायतों में जमीन का विवाद चल रहा है। यह जानकारी भी उच्चाधिकारियों को दी जा चुकी है। पंचायत भवनों का लोकापर्ण आनलाइन माध्यम से किया गया है। कहीं, कोई गड़गड़ी की शिकायत नहीं मिली है। -धर्मेंद्र कुमार, डीपीआरओ
