मुरादाबाद : सड़क हैं न पानी, सफाई में भी मनमानी, किसी को नहीं देंगे वोट
मुरादाबाद,अमृत विचार। लंबे इंतजार के बाद भी मूलभूत सुविधाएं न मिलने पर शहर की पॉश कॉलोनी के बाशिंदों ने विधानसभा चुनाव में वोट न करने का एलान किया है। कॉलोनी वासियों का कहना है कि कई बार शिकायत के बाद भी नगर निगम व एमडीए समस्याओं को लेकर सुधि नहीं ले रहा है। कहने को …
मुरादाबाद,अमृत विचार। लंबे इंतजार के बाद भी मूलभूत सुविधाएं न मिलने पर शहर की पॉश कॉलोनी के बाशिंदों ने विधानसभा चुनाव में वोट न करने का एलान किया है। कॉलोनी वासियों का कहना है कि कई बार शिकायत के बाद भी नगर निगम व एमडीए समस्याओं को लेकर सुधि नहीं ले रहा है।

कहने को तो टीडीआई सिटी शहर की पॉश कॉलोनियों में आती है। लेकिन, यहां के हालात गांव से भी बदतर हैं। कॉलोनी में न तो पक्की सड़कें बनी हुई हैं, न ही पथ प्रकाश की व्यवस्था है। पानी की टंकी सिर्फ बनाकर खड़ी कर दी गई है। इसका लाभ यहां के लोगों को नहीं मिल पा रहा है, जबकि ये लोग बराबर हाउस टैक्स भी देते चले आ रहे हैं। कई बार शिकायत करने के बाद भी जब समस्या का समाधान नहीं हुआ तो रविवार को कॉलोनी के लोगों ने नगर निगम, एमडीए व बिल्डर के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। समस्याओं को लेकर इन सबके विरोध में नारेबाजी करते हुए सबने जोरदार प्रदर्शन किया। इतना ही नहीं कॉलोनी के लोगों ने एलान किया है कि अगर जल्द ही यहां पर विकास कार्य नहीं कराए गए तो वे इस बार विधान सभा व निकाय चुनाव का बहिष्कार करने को बाध्य होंगे।

2005 में बसाई गई थी कॉलोनी
शहर के रामगंगा विहार में तनेजा डेवलपर एंड इंफ्रास्टक्चर द्वारा 2005 में टीडीआई सिटी के नाम से यह कॉलोनी बसाई गई थी। मुरादाबाद विकास प्राधिकरण से स्वीकृत कॉलोनी में कुछ सालों तक तो सड़कें ठीक रहीं। लेकिन अब इनकी हालत गांव से भी बदतर है। कॉलोनीवासियों का कहना है कि तनेजा डेवलपर एंड इंफ्रास्टक्चर द्वारा हम लोगों को सभी मूतभूत सुविधाएं देने की बात कही गई थी। लेकिन, आज तक कुछ नहीं मिला है।
350 परिवार करते हैं निवास
16 साल पहले बसी टीडीआई सिटी में मौजूदा समय में 350 परिवार निवास करते हैं, जबकि अन्य कई भवनों का निर्माण कार्य अभी जारी है। यहां रह रहे 350 परिवारों में लगभग 1200 लोग शामिल हैं। कॉलोनी के लोग अपने निजी खर्चें पर समर्सिबल लगाकर पानी की सुविधा ले रहे हैं।
शोपीस बनी खड़ी हैं स्ट्रीट लाइटें
शुरू के समय में टीडीआई सिटी में स्ट्रीट लाइटें लगाई गई थीं। 2010 में सभी लाइटें खराब हो गईं या टूट गईं। उसके बाद से आज तक पूरी टीडीआई सिटी कॉलोनी की सड़कें रात को अंधेरे में डूबी रहती हैं। ऐसे में कॉलोनी वासियों को किसी अनहोनी का डर हमेशा लगा रहता है।
अमित वर्मा ने बताया कि कॉलोनी में कोई सुविधा नहीं है। अंधेरे के कारण कई बार लूट की घटनाएं भी हो चुकी हैं। कई बार अधिकारियों से शिकायत की पर सिर्फ आश्वासन ही मिला। इसलिए हम चुनाव का बहिष्कार करेंगे।
विशाल बंसल ने बताया कि कॉलोनी में न रोड है, न पीने का पानी। न लाइट है, न परिवार की कोई सुरक्षा। जब महापौर व पार्षद हमारी सुधि नहीं लेते तो हम उन्हें वोट क्यों दें। इसलिए हम चुनाव में वोट नहीं करेंगे।
सुमन सेठी का कहाना है कि सबसे बड़ी समस्या सड़क व पानी की है। हम लोग अपना समर्सिबल लगाकर पानी पी रहे हैं। नगर निगम व एमडीए ध्यान नहीं देते। इस परिस्थिति में हमने चुनाव के बहिष्कार का निर्णय लिया है।
अशोक मित्तल ने कहा कि सभी सुविधाएं देने का वादा किया गया था। लेकिन, कुछ नहीं मिला। रात में लोग कॉलोनी में आकर शराब पीते हैं, मना करने पर अभ्रदता करते हैं। हम लोगों को परिवार की सुरक्षा की चिंता लगी रहती है।
मनजीत सिंह ने कहा कि कॉलोनी बनाने वाले बिल्डर ने हम सब को भगवान भरोसे छोड़ दिया है। न सफाई होती है, न ही पानी आता है। अधिकारी व क्षेत्रीय पार्षद सिर्फ बातें बनाकर चले जाते हैं।
सरदार जीत सिंह ने कहा कि जब हमने यहां प्लॉट खरीदा था, तब हमे दिल्ली-मुंबई में बनी कॉलोनियों जैसी सुविधा का सपना दिखाया गया था। मॉल भी दिखाया गया था पर उसकी जमीन बेच दी गई। चुनाव का बहिष्कार करेंगे।
एमडीए सचिव सर्वेश गुप्ता ने बताया कि अगर टीडीआई सिटी के लोगों को मूलभूत सुविधाएं नहीं मिल रही हैं तो नगर निगम को सुविधाएं मुहैया करानी चाहिएं। कॉलोनाइजर के स्तर से कॉलोनी हैंडओवर होने में क्या कमियां रह गई हैं, यह देखकर उसके आधार पर जो भी विधिक कार्रवाई हो सकती है, कराई जाएगी।
नगर आयुक्त संजय चौहान ने कहा कि टीडीआई सिटी को किसी सरकारी संस्था द्वारा नहीं, बल्कि प्राइवेट बिल्डर द्वारा बनवाया गया है। कॉलोनी नगर निगम को हैंडओवर नहीं की गई है। रहा सवाल हाउस टैक्स का तो नगरीय सीमा में जो भी आवास आता है, उससे हाउस टैक्स लिया जाता है।
वार्ड 34 के पार्षद अर्चना शर्मा ने कहा कि टीडीआई सिटी नगर निगम की सीमा में नहीं आती है। मेरे द्वारा टीडीआई सिटी को नगर निगम की सीमा में लाने का प्रयास किया जा रहा है। इसके अलावा इस कॉलोनी का जो भी व्यक्ति मेरे पास किसी काम के लिए आता है तो उसे कराया जाता है।
