अव्यवस्था और चिकित्सकों की कमी से होम्योपैथिक चिकित्सा को नहीं लग रहे पंख
रायबरेली। कोरोना काल में होम्योपैथिक चिकित्सा पर लोगों का विश्वास बढ़ा है लेकिन अस्पताल में अव्यवस्था के साथ चिकित्सकों की कमी से होम्योपैथिक चिकित्सा को पंख नहीं लग पा रहे हैं। शहर में कैनाल रोड पर राजकीय होम्योपैथिक चिकित्सालय भी खुला है। यहां पर दो डॉक्टरों के पद सृजित हैं, लेकिन एक पद रिक्त है। …
रायबरेली। कोरोना काल में होम्योपैथिक चिकित्सा पर लोगों का विश्वास बढ़ा है लेकिन अस्पताल में अव्यवस्था के साथ चिकित्सकों की कमी से होम्योपैथिक चिकित्सा को पंख नहीं लग पा रहे हैं।
शहर में कैनाल रोड पर राजकीय होम्योपैथिक चिकित्सालय भी खुला है। यहां पर दो डॉक्टरों के पद सृजित हैं, लेकिन एक पद रिक्त है। अधिकतर फार्मासिस्ट ही मरीजों का उपचार करते हैं।
अस्पताल में फार्मासिस्ट विजय श्रीवास्तव ही रोगियों का इलाज करते हैं। उनका मर्ज पूछकर पर्चे पर दवाएं लिखते मिलते हैं। वहीं वार्ड ब्वाय रोगियों को दवा वितरित करते हैं। प्रभारी चिकित्साधिकारी कम ही आते हैं वहीं एक ही महिला चिकित्सक हैं। उनकी अनुपस्थिति में फार्मासिस्ट और वार्डब्वाय ही अस्पताल का संचालन करते हैं। उनके न रहने पर दूसरे डाक्टर नहीं भेजे जाते हैं। यहां एक पुरुष और एक महिला डाक्टर के पद सृजित हैं, लेकिन पुरुष चिकित्सक पिछले करीब तीन साल से तैनात ही नहीं किए गए।
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महिला चिकित्सक भी छह माह पहले ही आई हैं। साफ है लगभग ढाई साल तक फार्मासिस्ट और वार्ड ब्वाय ही अस्पताल का संचालन करते रहे। इस बीच रोजाना औसतन 40 मरीज इलाज कराने के लिए आते रहे। एक जनवरी से 11 दिसंबर तक इसी अस्पताल में 9004 लोग उपचार करा चुके हैं।
जिला होम्योपैथिक मेडिकल आफिसर डा. सीमा वर्मा का कहना है कि अगर डाक्टर छुट्टी पर जाते हैं तो उनकी जगह फार्मासिस्ट ही अस्पताल चलाते हैं। जिले में कुल 46 होम्योपैथिक अस्पताल हैं। डॉक्टर की कमी है, इस वजह से उन्हें अस्पतालों से संबद्ध करके किसी तरह काम चलाया जा रहा है।
