मथुरा के राधारमण मंदिर में शीतकालीन सेवा शुरू
मथुरा। पर्वतीय अंचलों में हो रही बर्फबारी के चलते उत्तर प्रदेश में पड़ रही कड़ाके की ठंड के बीच कान्हा नगरी मथुरा के सप्त देवालयों में मशहूर अति प्राचीन राधारमण मन्दिर में शीतकालीन सेवा शुरू हो गई है। इस मन्दिर में यशोदा भाव और साख्य भाव से सेवा की जाती है कि श्यामसुन्दर को ठंड …
मथुरा। पर्वतीय अंचलों में हो रही बर्फबारी के चलते उत्तर प्रदेश में पड़ रही कड़ाके की ठंड के बीच कान्हा नगरी मथुरा के सप्त देवालयों में मशहूर अति प्राचीन राधारमण मन्दिर में शीतकालीन सेवा शुरू हो गई है। इस मन्दिर में यशोदा भाव और साख्य भाव से सेवा की जाती है कि श्यामसुन्दर को ठंड न लग जाए। मन्दिर में व्यंजन द्वादसी से ठाकुर की शीतकालीन सेवा शुरू हो जाती है। इस बार वृन्दावन के सारे मन्दिरों में व्यंजन द्वादसी 15 दिसंबर को मनाई गयी थी।
मगर राधारमण मन्दिर में 16 दिसंबर को मनाई गई क्योंकि इस मन्दिर में तिथि का निर्धारण सूर्योदय से होता है। यानी सूर्योदय के समय जो तिथि होती है और वहीं मानी जाती है। व्यंजन द्वादसी के पौराणिक महत्व के संबंध में ब्रज संस्कृति के महान विद्वान और राधारमण मन्दिर वृन्दावन के सेवायत आचार्य श्रीवत्स गोस्वामी ने बताया कि दक्षिण भारत में आज भी खिचड़ी महोत्सव मनाया जाता है। धनुर्मास में धनु की संक्रांति होती है। धनुर्मास में भगवान को सर्दी से बचाने के लिए खिचड़ी का भोग लगाया जाता है।
गोपाल भट्ट स्वामी दक्षिण भारत से आए थे, इसलिए राधा रमण मन्दिर में व्यंजन द्वादसी से 35 दिन तक खिचड़ी का भोग लगता है। उसमें विभिन्न प्रकार के व्यंजन होते हैं। खिचड़ी का आध्यात्मिक रूप आत्मा का परमात्मा से या भक्त का भगवान से मिलन है। अन्न माने परब्रम्ह यानी चावल और दाल माने जो दलित है समस्याओं से,अभाव से कष्ट से दलित है। उसका अन्न के साथ मिलकर एकाकार हो जाना ही खिचड़ी है। यह खिचड़ी का आध्यात्मिक भाव है। इसमें ठाकुर का सुबह जो भोग लगता है उसमें भाजा, खूना और फल फलहारी और मेवा आदि होते है।
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इसके लिए कहा गया है कि खिचड़ी के हैं चार यार। घी पापड़ दही अचार। उन्होंने बताया कि दक्षिण भारत में एक संत हुई हैं आंडाल गोदाम्बा। उनका भी यह विशेष महोत्सव मनाया जाता है। कुछ लोग इसकी तुलना छप्पन भोग या अन्नकूट से करते हैं, मगर इससे असहमति व्यक्त करते हुए उन्होंने बताया कि जो स्वाद को अभिव्यंजित करते है। उसे व्यंजन कहा जाता है। पकौड़ी पकौड़ा, भाजा भूनी, विविध प्रकार के अचार, मुरब्बे और मेवा ऐसे व्यंजन हैं जो स्वाद को एनहांस करते है यानी बढ़ाते हैं और उसे स्वादिष्ट बनाते हैं। वैसे तो 56 भोग छत्तीसों व्यंजन ठाकुर को अरोगने के लिए तैयार किये जाते हैं पर खिचड़ी महोत्सव में केवल व्यंजन ही बनते हैं। उसकी तुलना छप्पन भोग या अन्नकूट से नही की जा सकती।
