बरेली: फर्जी वोटिंग पर बरेली बार एसोसिएशन चुनाव में हंगामा
विधि संवाददाता, बरेली, अमृत विचार। बरेली बार एसोसिएशन के चुनाव के 21 पदों के लिए कचहरी स्थित बगिया परिसर में सोमवार को हुए मतदान में दिनभर गहमागहमी रही। कड़ी पुलिस सुरक्षा में हुए मतदान में फर्जी वोट डाले जाने की शिकायत को लेकर हंगामा शुरू हो गया। 40 वर्षों से वकालत कर रहीं एक महिला …
विधि संवाददाता, बरेली, अमृत विचार। बरेली बार एसोसिएशन के चुनाव के 21 पदों के लिए कचहरी स्थित बगिया परिसर में सोमवार को हुए मतदान में दिनभर गहमागहमी रही। कड़ी पुलिस सुरक्षा में हुए मतदान में फर्जी वोट डाले जाने की शिकायत को लेकर हंगामा शुरू हो गया। 40 वर्षों से वकालत कर रहीं एक महिला अधिवक्ता ने दोपहर लंच बाद वोटिंग शुरू होने पर यह कहकर सबको चौंका दिया कि उनका वोट पहले ही डाला जा चुका है। इससे वहां पर खलबली मच गई।
हंगामा होने पर चुनाव अधिकारी आ गए। महिला अधिवक्ता ने चुनाव पैनल के समक्ष शिकायत दर्ज कराई। इस पर तमाम प्रत्याशियों के समर्थक जोर-जोर से हल्ला करने लगे। शोर मचाते हुए अधिवक्ता गायत्री एडवोकेट का वोट डाले जाने की जांच की मांग उठाने लगे। जिस पर चुनाव अधिकारियों ने बूथ का निरीक्षण किया। गहनता से जांच करने पर मालूम हुआ कि एक ही नाम की दो महिला अधिवक्ता हैं। गलती से वोट डाले जाने और फोटोयुक्त वोटर लिस्ट होने के बावजूद बूथ इंचार्ज की अनदेखी से लापरवाही होने की बात सामने आई। इस गलती पर चुनाव पैनल ने नाराजगी जताई। वोट डाले जाने की वजह से गायत्री एडवोकेट निराश हो गईं।
मामला और न बिगड़े, इसलिए चुनाव पैनल ने महिला अधिवक्ता को मनाने के लिए उनका वोट अलग डलवाकर लिफाफे में सीलबंद कर सुरक्षित रखवा लिया। चुनाव अधिकारी ने बताया कि इस वोट का प्रयोग काफी नजदीकी अंतर होने पर ही निर्णायक होगा। इससे पहले लिफाफा नहीं खोला जाएगा।
इसके अलावा अध्यक्ष पद के प्रत्याशी शशि कान्त शर्मा एडवोकेट ने चुनाव अधिकारी से अध्यक्ष घनश्याम शर्मा की मतदान के बाद मतदान स्थल पर मौजूदगी पर ऐतराज जताया। उन्होंने कहा कि चूंकि वह एक प्रत्याशी के समर्थक हैं, इस लिहाज से मतदान के बाद मतदान स्थल पर उनका रुकना उचित नहीं है। इस पर मुख्य चुनाव अधिकारी ने हस्तक्षेप कर स्थिति संभाली।
आचार संहिता के उल्लंघन पर ढोल किया जब्त
चुनाव पैनल की बेहतर कार्यप्रणाली का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि छिटपुट घटनाओं पर भी चुनाव पैनल एक्शन में नजर आया। एक प्रत्याशी अति उत्साह में ढोल नगाड़े बजवाते हुए चुनाव स्थल पहुंचे तो चुनाव अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर तुरंत ढोल आदि को कब्जे में ले लिया।
महिला अधिवक्ताओं में वोटिंग को लेकर दिखा उत्साह
बार एसोसिएशन चुनाव के लिए महिला अधिवक्ताओं में भी खासा उत्साह नजर आया। महिला अधिवक्तागण अपने प्रत्याशियों के समर्थन में जहां एक ओर अधिवक्तागण से वोट मांगती रहीं। वहीं वोटिंग करने के लिए भी उपस्थित रहीं। मंजू रानी एडवोकेट पैर में प्लास्टर चढ़ा होने के वाबजूद वोटिंग करने के लिए मतदान केंद्र पहुंचीं। जहां दो महिला पुलिसकर्मियों ने सहारा देकर उन्हे मतदान स्थल तक पहुंचाया। इसी तरह तमाम महिला अधिवक्ता वोटिंग को लेकर उत्साहित नजर आयीं। सेल्फी का क्रेज भी दिखाई दिया। सचिव पद के प्रत्याशी शशिकांत तिवारी के समर्थन में लोक सेवा आयोग की एडवाइजर डॉ. वंदना शर्मा भी उनके चुनावी कार्यालय पर आयीं हुई थीं।
यूपी बार काउंसिल चेयरमैन ने भी किया मतदान
बार एसोसिएशन चुनाव के लिए एक और उपलब्धि यह रही कि शिरीष मेहरोत्रा एडवोकेट बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश के चेयरमैन के ओहदे पर होते हुए मतदान करने के लिए पहुंचे थे। वैसे तो शिरीष मेहरोत्रा हर बार वोटिंग के लिए आते रहे हैं, मगर इस बार प्रदेश के वकीलों के सर्वोच्च पद पर होते हुए वोटिंग के लिए उनकी उपस्थिति के दूसरे मायने थे।
उनके साथ फोटो खिंचवाने के लिए वकीलों में होड़ मची रही। सभी की नजरें इस बात पर टिकी हुई थीं कि वह किसको वोट देंगे। बूथ संख्या 6 पर उन्होंने वोट डाला। किसको वोट देंगे इस बारे में मीडिया के पूछने पर वह बस मुस्कुरा दिये, मगर पत्ते नहीं खोले।
मतदान के लिए बनाये गये थे 7 बूथ
मतदान के लिए कुल 7 बूथ बनाये गये थे। जिनमें प्रत्येक बूथ पर 300-300 वोटरों के वोट डालने की व्यवस्था हुई थी। 7 नम्बर बूथ पर कुल 256 वोटर ही थे। बूथ नंम्बर 1 पर 265, 2 पर 277, 3 पर 263, 4 पर 275, 5 पर भी 275, 6 पर 269 व 7 पर 236 मतदाताओं ने मतदान किया। इस तरह सभी 7 बूथों पर कुल 1860 मतदाताओं ने 66 प्रत्याशियों की किस्मत का निर्णय दिया।
कोविड के खतरे को लेकर बेपरवाह दिखे अधिवक्ता
देश में बढ़ते ओमिक्रॉन के खतरे के बाद और चुनाव पैनल के लाख प्रयासों के बाद भी कोविड प्रोटोकाल का पालन मतदान स्थल पर संभव नहीं हो सका। कम मतदाता ही मॉस्क लगाकर मतदान स्थल तक पहुंचे। सैकड़ों की तादात में उत्साहित अधिवक्तागण बगैर मॉस्क के नजर आये। अपील के बाद भी कोई खासा असर नहीं दिखा। प्रत्येक बूथ पर सैनेटाइजर आदि की व्यवस्था की गयी थी मगर सभी उसका उपयोग करते नजर नही आये।
