कानपुर आईआईटी में जस्ट एनर्जी ट्रांजिशन पर कार्यशाला

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कानपुर। कार्बन उत्सर्जन में कमी लाकर ग्लोबल वार्मिंग के खतरे को टालने के मकसद से भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) कानपुर में मंगलवार को जस्ट एनर्जी ट्रांजिशन पर दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। संस्थान में मानविकी एवं सामाजिक विज्ञान विभाग के प्रो. प्रदीप स्वर्णकार के नेतृत्व में आयोजित कार्यशाला का उद्घाटन करते हुए प्रख्यात …

कानपुर। कार्बन उत्सर्जन में कमी लाकर ग्लोबल वार्मिंग के खतरे को टालने के मकसद से भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) कानपुर में मंगलवार को जस्ट एनर्जी ट्रांजिशन पर दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। संस्थान में मानविकी एवं सामाजिक विज्ञान विभाग के प्रो. प्रदीप स्वर्णकार के नेतृत्व में आयोजित कार्यशाला का उद्घाटन करते हुए प्रख्यात शिक्षाविद प्रो. अरुण कुमार शर्मा (एमेरिटस, आईआईटी कानपुर) ने कहा कि ऊर्जा के संक्रमण के लिए आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक और जनजातीय मुद्दों को ध्यान में रखना आवश्यक है।

आयोजन की शुरुआत के साथ प्रो. स्वर्णकर की ओर से स्थापित मौजूदा सेंटर फॉर एनर्जी पॉलिसी एंड रिसर्च लैब की एक शाखा के रूप में अपना जस्ट एनर्जी ट्रांजिशन (जेईटी) केंद्र भी लॉच किया गया। पीएचडी की छात्रा भावना जोशी ने बताया कि सीईपीआरएल की स्थापना 2019 में हुई थी और मौजूदा ट्रांजिशन सेंटर समेत करीब 22 सदस्य लैब से जुड़े हैं। लैब मीडिया रिपोर्ट्स, सोशल नेटवर्क, पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन के मुद्दों के विश्लेषण पर काम करती है।

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वहीं, डॉ मुदित सिंह, पोस्टडॉक्टोरल फेलो ने जीवाश्म ईंधन (मुख्य रूप से कोयला) निर्भरता को कम करके कार्बन उत्सर्जन को कम करने के चल रहे प्रयासों के संबंध में अनुसंधान और नीतिगत सिफारिशों के लिए जेईटी की योजनाओं पर संक्षेप में चर्चा की। प्रशांत चौधरी ने कहा कि रवींद्र नाथ टैगोर ने 100 साल पहले कहा था, जंगल वापस दो और अपना शहर वापस ले लो। विकसित देश 1945 में योगदान का वादा करते रहे हैं जब यूएनओ का गठन किया गया था।

यहां तक कि पेरिस समझौते पर भी पर्यावरण संबंधी चिंताओं और ऊर्जा संक्रमण को पूरा करने के लिए भी योगदान का वादा किया गया था। लेकिन वह कभी भी अमल में नहीं आया। सबसे बड़े शक्तिशाली देश (यूएसए) ने क्योटो प्रोटोकॉल का सम्मान नहीं किया। कोयला खदान बंद करने के लिए दिशा-निर्देश हैं, लेकिन उनका पालन नहीं किया जा रहा है। उन्होंने तटीय क्षेत्रों में संक्रमण और ऊर्जा संक्रमण के लिए वित्तीय पुनर्गठन के बारे में ज्ञान के निर्माण की आवश्यकता को स्पष्ट रूप से रेखांकित किया।

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