संभल: 40 साल बाद भाई की शक्ल देखकर पाकिस्तान में रो पड़ी ‘हमारी मुन्नी’

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Edited By Amrit Vichar
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संभल,अमृत विचार। संभल के सरायतरीन के मोहल्ला हिजड़ान के निवासी छिद्दन की 10 वर्षीय बेटी को उसकी दूसरी पत्नी के बहनोई ने दिल्ली ले जाकर मानव तस्करों बेच दिया था। वहां से निकल कर हरियाण पहुंची तो किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। वहां दूसरे ऐसे गैंग के हाथ लग गई जो पाकिस्तान में …

संभल,अमृत विचार। संभल के सरायतरीन के मोहल्ला हिजड़ान के निवासी छिद्दन की 10 वर्षीय बेटी को उसकी दूसरी पत्नी के बहनोई ने दिल्ली ले जाकर मानव तस्करों बेच दिया था। वहां से निकल कर हरियाण पहुंची तो किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। वहां दूसरे ऐसे गैंग के हाथ लग गई जो पाकिस्तान में लड़की सप्लाई करता था।

उस गैंग ने पाकिस्तान में 10 वर्ष की बच्ची को बेच दिया। पाकिस्तान के कराची में दो बार बेची गई बच्ची कई साल इधर उधर होती रही। फिर एक पाकिस्तान निवासी ने उससे शादी कर ली। अब बुसरा नाम से जिंदगी बिता रही है, हालांकि उसके चार बच्चे हैं। पर अभी 40 साल के बाद वतन और अपनों को नहीं भूल पाई। एक महिला पत्रकार ने उसकी कहानी सुनी। कहते एक महिला का दर्द महिला ही बेहतर जानती है। उसने उसकी वीडियो बनाकर वायरल कर दी। वायरल वीडियो भारत पहुंचा और सरायतरीन में उसके भाइयों ने देखा और उनका बहन से वीडियो कॉलिंग का सिलसिला चल पड़ा।

बता दें कि सरायतरीन निवासी छिद्दन का परिवार मोहल्ला हिजड़ान में रहता था। छिद्दन की पहली पत्नी का मुनीज खातून थी। सन 1981 में छिद्दन ने अपने छोटे भाई एहसान की शादी सरायतरीन के एक मोहल्ले की भूरी से करी थी। शादी के छह महीने बाद ही बीमारी के कारण अहसान की मौत हो गई। छिद्दन की मां बतूल बानो ने अहसान की विधवा से छिद्दन की दूसरी शादी करा दी। पर यह बात भूरी को बहनोई को नागवार गुजरी। विधवा भूरी से उसका बहनोई मतलूब शादी करना चाहता था। इस बात से मतलूब छिद्दन से भैर रखने लगा था। पर एक दूसरे घर आना जाना बंद नहीं था।

1981 में दिसंबर में बाहर खेल रही छिद्दन की बेटी मुन्नी को मतलूब बहला फुसलाकर ले गया था और दिल्ली ले जाकर मुन्नी को मानव तस्करों के हाथ बेच दिया। किसी तरह मुन्नी वहां से निकाल भाग गई और हरियाणा पहुंच गई पर मुन्नी की किस्मत को तो कुछ और ही मंजूर था। मुन्नी वहां भी एक लड़कियों की तस्करी करने वाले युवक के हाथ लग गई। परिवार से हुई वीडियो कॉलिंग में मुन्नी ने बताया कि वो लोग अपने साथ ले गए। उसके घर पर कई और लड़कियां पहले से ही मौजूद थीं। कुछ दिनों और पांच लड़कियां आ गई। फिर एक दिन वाे हमें सबको पाकिस्तान में ले आया और हम दस लड़कियों को वहां एक आदमी के पास छोड़कर चला गया। फिर हम सब बंट गए और मुझे कराची लाकर एक घर में रख दिया। वहां कई साल हो गए। फिर एक दिन हमारी शादी के तैयारियां होने लगी। कराची के डिफेंस में फेस वन थाना गिरीजी के निवासी शहजाद के साथ उसकी शादी हो गई और मैं मुन्नी से बुसरा हो गई। अब मेरे चार बच्चे हैं। पर अभी पाकिस्तान की नागरिकता हासिल नहीं हो पाई है। ऐसे में जब अपना भारत याद आता है तो अकेले में बैठकर रो लेती हूं।

महिला पत्रकार को सुनाई कहानी
एक दिन ऐसे ही रो रही थी तभी हमारे पास रहने वाली एक खबर नफीस ने पूछा क्यों रो रही हो, तो फिर नहीं रहा गया। अपने मुंह से अपनी सारी कहानी बता गई। उन्होंने मेरी वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दी। और अब चालीस साल बाद सरायतरीन में रहने वाले मेरे परिवार को न जाने कैसी यह वीडियो मिल गई और उन्होंने वीडियो कॉलिंग करी तो मेरे बचे परिवार में मेरे भाई अकरम और बाहर आलम और मेरी भाभी भतीजी भतीजे से बात हुई है। मां वाप नहीं रहे। बस अब मन करता उड़कर हिंदुस्तान पहुंच जाऊं

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