प्रयागराज: ‘माघ मेला’ में प्रवचन पर रोक से संत हुए नाराज

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प्रयागराज। कोरोना के नए वेरिएंट ओमिक्रॉन के खतरे के मद्देनजर संगम नगरी प्रयागराज में ‘माघ मेला’ में प्रवचनों पर रोक लगाने के जिला प्रशासन के निर्णय से आहत अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत रवीन्द्र पुरी ने कहा कि निर्णय नहीं बदलने की स्थिति में संत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात करेंगे। रवीन्द्र पुरी ने शुक्रवार …

प्रयागराज। कोरोना के नए वेरिएंट ओमिक्रॉन के खतरे के मद्देनजर संगम नगरी प्रयागराज में ‘माघ मेला’ में प्रवचनों पर रोक लगाने के जिला प्रशासन के निर्णय से आहत अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत रवीन्द्र पुरी ने कहा कि निर्णय नहीं बदलने की स्थिति में संत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात करेंगे। रवीन्द्र पुरी ने शुक्रवार को कहा कि भागवत कथा और लीला का प्रयाग केन्द्र है। उसपर रोक लगाना सनातन धर्म की मान्यता को खंडित करना है। लीला और प्रवचन पर रोक लगाकर अधिकारी माघ मेला की पहचान खोने का प्रयास कर रहे हैं। जिससे संत महात्माओं में नाराजगी है।

वहीं, मेला प्रशासन ने यदि अपनी हठधर्मिता नहीं बदली तो मुख्यमंत्री से मुलाकात किया जाएगा। इसके अलावा अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष ने कहा कि माघ मेला के दौरान छह स्नान होते हैं। इस दौरान प्रत्येक स्नान पर लाखों श्रद्धालु एक साथ गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के त्रिवेणी में एक साथ आस्था की डुबकी लगाते हैं। क्या उस समय कोरोना नहीं फैलेगा, केवल लीला और प्रवचन सुनने के लिए एक साथ बैठने से फैल जाएगा।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि स्थिति बदलने पर मेला प्रशासन जो बेहतर समझे कर सकता है। अध्यक्ष ने कहा कि माघ मेला दुनिया सबसे बड़ा आध्यात्मिक मेला होता है। त्रिवेणी के संगम में आध्यात्म के मेले में साधु-संतो के टेंट से कथा, प्रवचन व लीला के वर्णन का श्रद्धालु आनंद उठाते हैं। उन्हें यह अटूट सौभाग्य बहुत ही मुश्किल से मिलता है। मेला प्रशासन का कहना है कि ओमिक्रॉन का प्रकोप लगातार बढ़ रहा है। मेला में दूर दराज से पहुंचे श्रद्धालु साधु-संतों का प्रवचन सुनने के लिए एक स्थान पर घंटो बैठते हैं।

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उनके बीच सोशल डिस्टेसिंग बिल्कुल नहीं रहती है। जिससे कोरोना के नए वेरिएंट के बढ़ने का खतरा अधिक होगा। उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष माघ मेला में भी कोरोना को देखते हुए किसी बड़े आयोजन की अनुमति नहीं दी गयी थी। उन्होंने कहा कि साधु-संत बिना रूकावट के अपना पूजा-पाठ कर सकते हैं। मेला प्रशासन उनकी किसी भी प्रकार की समस्या को भरसक दूर करने का प्रयास करेगा।

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