बदायूं: बंद फैक्ट्री ने छीना हजारों लोगों का रोजगार, जनप्रतिनिधियों ने नहीं ली सुध
बदायूं, अमृत विचार। जिले में बहुरानी, पूजा वनस्पति, पराग डेयरी और करीब 80 कोल्ड स्टोर थे, लेकिन वक्त के साथ साथ इन पर ताले लग गए। किसी फैक्ट्री को घाटे के कारण बंद करना पड़ा तो कोई फैक्ट्री बिजली बिल जमा न करने से बंद हो गई। ऐसे में हजारों युवाओं के हाथों से रोजगार …
बदायूं, अमृत विचार। जिले में बहुरानी, पूजा वनस्पति, पराग डेयरी और करीब 80 कोल्ड स्टोर थे, लेकिन वक्त के साथ साथ इन पर ताले लग गए। किसी फैक्ट्री को घाटे के कारण बंद करना पड़ा तो कोई फैक्ट्री बिजली बिल जमा न करने से बंद हो गई। ऐसे में हजारों युवाओं के हाथों से रोजगार छिन गया। मजबूरन यहां के युवा अब अन्य प्रांतों में रोजगार की तलाश भटक रहे हैं। जिला मुख्यालय पर बड़ी फैक्ट्री के नाम पर 1995 में सपा सरकार द्वारा पराग मिल्क फैक्ट्री का स्थापना हुई।
20 साल तक पराग फैक्ट्री का संचालन हुआ। सपा सरकार में पार्टी के जिलाध्यक्ष और राज्य मंत्री रहे कद्दावर नेता स्व. बनवारी सिंह यादव की पुत्रवधू रेखा यादव इसकी चेयरमैन रहीं। उस समय तक फैक्ट्री का संचालन ठीक होता रहा। लेकिन 2015 में यह प्रबंधन के कारण बंद हो गई। करीब 400 सोसाइटी इससे जुड़ी हुई थीं। बाद में सोसाइटी कम होती गई तो फैक्ट्री को बिजली बिल देना भी मुश्किल हो गया।
करीब 18 लाख रुपये बिल हो जाने के बाद भी समस्या खड़ी हुई तो प्रबंधन ने दुग्ध शीतन का काम बंद कर दिया। 2015 से फैक्ट्री बंद चल रही है। फैक्ट्री का बचा-खुचा काम बरेली पराग ईकाई को सौंप दिया गया है और अवशेष 125 समितियां भी वहीं से अटैच कर दी गई हैं। यहां प्रबंधक मात्र कार्यालय की बागडोर संभाले हुए हैं।
तीन प्रबंधकों में रह गए एक प्रबंधक, दो दर्जन से अधिक का छिना रोजगार
बदायूं की पराग मिल्क फैक्ट्री सहकारिता प्रबंधन से जुड़ी है। इसलिए इसका उत्तरदायित्व सरकार के सहकारिता विभाग से सीधा जुड़ा है। पराग फैक्ट्री से जिले की 400 सोसाइटी में 16000 दुग्ध उत्पादक जुड़े हुए थे। अब लगभग 150 सोसाइटी में 6000 दुग्ध उत्पादक ही जुड़े हैं। अवशीतन का काम फैक्ट्री में नहीं हो रहा है। इसलिए फैक्ट्री बंद है। बदायूं मुख्यालय से जुड़ी उद्योग की ईकाई में जब दो प्रबंधक और एक महाप्रबंधक होते थे। 15-20 स्थाई कर्मचारी थे और 20-22 अन्य कर्मचारी भी काम करते थे। अब केवल एक प्रबंधक और दो कर्मचारी हैं, जो कार्यालय का काम कर रहे हैं।
हमारी सरकार को रुग्ण अवस्था में फैक्ट्री मिली। बिजली बिल भी करीब 18 लाख था। सहकारिता मंत्रालय ने विचार किया कि यह पूरी तरह बंद न हो जाए,इसलिए इसे बचाने के लिए ही आधुनिक मशीनों से युक्त इसी की बरेली स्थित सुदृढ़ ईकाई से जोड़ दिया गया। इससे पूर्व सपा सरकार में इसके प्रबंधन पर हाबी होकर अपनी गलत नीतियां थोप दीं थीं। जिससे इसका हृास हो गया। बाकी हमारी सरकार ने तमाम नए उद्योग बदायूं में खड़े किए हैं। जिसमें लोग रोजगार पा रहे हैं। – राजीव कुमार गुप्ता, जिलाध्यक्ष भाजपा बदायूं
समाजवादी पार्टी ने इस फैक्ट्री की स्थापना कराई। 20 साल तक संचालन हुआ। भाजपा को भी अपनी सरकार को कुछ करना चाहिए। अगर, भाजपा सरकार चाहती तो इसे फिर से चालू करा सकती थी। भाजपा ने झूठे विकास के प्रचार-प्रयास करने में अपनी शक्ति लगाई है। बदायूं में सपा शासन काल में जितना काम हुआ। उसे भाजपा का संरक्षण भी नहीं मिल सका। बदायूं की बेजोरगारी को भाजपा दूर नही कर पा रही है। भाजपा ने बदायूं शहर में इसके अलावा कोई फैक्ट्री क्यों नहीं लगाई। -प्रेमपाल सिंह यादव, जिलाध्यक्ष सपा, बदायूं
जब 2015 में फैक्ट्री बंद हुई थी। उस समय सिलहरी के लोगों के साथ उन्होंने प्रदेश के मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा और बताया कि पराग फैक्ट्री का बंद होना बेरोजगारों और किसानों के हित में नहीं है। तत्कालीन सरकार ने इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया। भाजपा की सरकार आई लेकिन उसका भी कोई ध्यान नहीं है। पराग फैक्ट्री का बंद हो जाना बदायूं के हित में नहीं है। आज भी तमाम किसान उनसे मिलते हैं। किसानों की आय दोगुनी करने का वायदा करने वालों को चाहिए कि बदायूं में इसका पुन: पूर्ववत संचालन हो। – ओमकार सिंह, जिलाध्यक्ष कांग्रेस, बदायूं
सपा सरकार के शासन काल में ही शुरू हुई और सपा के शासन काल में ही पराग दुग्ध फैक्ट्री बंद हुई है। जब बसपा की सरकार थी तब तो फैक्ट्री का संचालन जारी था। इसकी बंदी के लिए सपा और अब मौजूदा सरकार ही जिम्मेदार है। इस संबंध में दोनो समय की सरकार ही जिम्मेदार हैं। रहीं बेरोजगारी और किसानों की समस्याएं उनकी पार्टी इनके हित के तमाम मुद्दों को उठाती रही है। चुनाव का वक्त करीब है। उनकी सूची में इस फैक्ट्री का मुद्दा भी शामिल रहेगा। इसमें सबकी विफलताओं को चुनाव में मुद्दा बनाया जाएगा। बसपा ने अपने शासन काल में जो काम किए सभी ठोस काम किए हैं। -हेमेंद्र गौतम, जिलाध्यक्ष बसपा, बदायूं
किसानों से जुड़ा उद्योग होने के कारण कम से कम भाजपा को तो देखना ही चाहिए था। किसानों के हित की बात करने वाली पार्टी भाजपा को चाहिए कि बंद पराग फैक्ट्री चालू कराए। -राजेश सक्सेना, किसान नेता
पराग फैक्ट्री के बंद हो जाने के कारण जिनकी बेरोजगारी बढ़ी है, उनको रोजगार के अवसर दिलाए जाने चाहिए। बदायूं की फैक्ट्री बंद होना दुर्भाग्यपूर्ण है। – कौशल गुप्ता, एडवोकट
भले ही किसी सरकार में पराग फैक्ट्री बंद हुई हो बदायूं के लिए यह दुर्भाग्य पूर्ण है। बदायूं में इकलौती फैक्ट्री थी इसका संचालन होता रहना चाहिए था। -सचिन सूर्यवंशी समाज सेवी
भाजपा ने भले ही कई और उद्योगों को बढ़ावा दिया है। मगर, इस पराग फैक्ट्री के बंद हो जाने से उनकी छवि को नुकसान पहुंचा है। बरेली से जोड़ने से काम नहीं चलेगा। यही फैक्ट्री चालू करने की जरूरत है। -ध्रुवदेव गुप्ता, नेता युवा मंच संगठन
