पंतनगर विश्वविद्यालय के शिक्षकों ने लिया चुनाव में नोटा दबाने का निर्णय, ये है वजह

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पंतनगर, अमृत विचार। देश के पहले कृषि विश्वविद्यालय, हरित क्रांति के जनक व अनेकों राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित पंतनगर विश्वविद्यालय का देश की कृषि के उत्थान में अतुलनीय योगदान रहा है। लेकिन राज्य सरकार की अनदेखी और विश्वविद्यालय के नियमों एवं परिनियमों की गलत व्याख्या के कारण इसकी ख्याति, गरिमा एवं अस्तित्व खतरे …

पंतनगर, अमृत विचार। देश के पहले कृषि विश्वविद्यालय, हरित क्रांति के जनक व अनेकों राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित पंतनगर विश्वविद्यालय का देश की कृषि के उत्थान में अतुलनीय योगदान रहा है। लेकिन राज्य सरकार की अनदेखी और विश्वविद्यालय के नियमों एवं परिनियमों की गलत व्याख्या के कारण इसकी ख्याति, गरिमा एवं अस्तित्व खतरे में पड़ गए हैं।

राज्य सरकार द्वारा विश्वविद्यालय के नियमों की गलत व्याख्या के कारण शिक्षकों के समायोजन, नई नियुक्ति प्रक्रिया, सातवें वेतनमान के एरियर भुगतान सम्बन्धी प्रकरण राज्य स्तर पर लम्बित पड़े हैं। जिसको लेकर शिक्षकों में नाराजगी है। उन्होंने आगामी चुनाव में नोटा का बटन दबाने का निर्णय लिया है।

दरअसल 24 दिसम्बर को पंतनगर विश्वविद्यालय के लगभग 150 शिक्षकों की प्रोन्नति के लिए किये जा रहे मूल्यांकन की प्रक्रिया को राजभवन द्वारा मिले निर्देश के कारण स्थगित कर दिया गया है। जिससे विश्वविद्यालय के शिक्षकों में काफी रोष है। यह मूल्यांकन राज्य के कर्मचारियों की एसीपी-डीपीसी के समान है। जिसे पूर्व के कई कुलपतियों द्वारा भी मूल्यांकन कर शिक्षकों एवं गैर-शैक्षणिक कार्मिकों की प्रोन्नति की गयी थी।

शिक्षकों का कहना है कि उत्तराखण्ड शासन द्वारा वर्ष 2012 में निर्गत शासनादेश में स्थायी कुलपति के कार्यकाल के समाप्त होने के 3 माह पूर्व से नई नियुक्ति व सीधी भर्ती किये जाने तथा कोई भी नई नीति लागू किये जाने को प्रतिबन्धित किये जाने का प्रावधान है। ऐसे में राजभवन द्वारा नियमों एवं आदेशों के विपरीत प्रोन्नति की एक सामान्य प्रक्रिया को स्थगित करने का आदेश जारी करना पूर्णतया गलत है। विश्वविद्यालय परिसर के शैक्षणिक एवं गैर-शैक्षणिक कार्मिक राजभवन द्वारा लिए गये इस गलत निर्णय से आहत हैं। जिसे लेकर शिक्षकों ने पंतनगर विश्वविद्यालय शिक्षक समिति (पूटा) अध्यक्ष डॉ. पीएन राय की अध्यक्षता में एक बैठक की। जिसमें शिक्षकों द्वारा सर्वसम्मति से अपने परिवारों के साथ मिलकर आगामी चुनाव में नोटा पर बटन दबाने का निर्णय लिया गया है।

पूटा अध्यक्ष डॉ. पीएन राय ने कहा कि शिक्षकों के प्रोमोशन विगत 3-4 वर्षों से लम्बित थे, मूल्यांकन के प्रक्रिया को रोकना खेदपूर्ण एवं अत्यंत ही दुर्भाग्यपूर्ण है। शिक्षकों द्वारा नोटा पर बटन दबाने के निर्णय को सही ठहराते हुए अध्यक्ष डॉ. राय ने कहा कि शिक्षक समिति में लगभग 600 शिक्षक शामिल हैं, पूटा के समस्त सदस्य अपने साथ-साथ विश्वविद्यालय के सभी कर्मचारियों एवं उनके परिवार के सदस्यों से भी नोटा पर बटन दबाने के लिए डोर टू डोर संपर्क करेंगे। वहीं विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. तेज प्रताप ने कहा कि इस मामले में वह विवि के कुलाधिपति एवं राज्यपाल से वार्ता कर जल्द ही इसके समाधान निकालने का प्रयास करेगे।

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