राजनीति और सिस्टम की भेंट चढ़ गई बरेली की नेकपुर चीनी मिल
बरेली, अमृत विचार। बरेली जिले की पहली चीनी मिल से हजारों लोगों को रोजगार मिलता था। वहीं किसानों के लिए इससे लाभ भी था। लेकिन राजनीति के भंवर में फंसी चीनी मिल वर्ष 1998 में अधिक घाटा दर्शाकर बंद कर दी गई। मिल बंद होने के बाद कर्मचारियों ने प्रदर्शन किए, लेकिन उनकी ओर ने …
बरेली, अमृत विचार। बरेली जिले की पहली चीनी मिल से हजारों लोगों को रोजगार मिलता था। वहीं किसानों के लिए इससे लाभ भी था। लेकिन राजनीति के भंवर में फंसी चीनी मिल वर्ष 1998 में अधिक घाटा दर्शाकर बंद कर दी गई। मिल बंद होने के बाद कर्मचारियों ने प्रदर्शन किए, लेकिन उनकी ओर ने तो तत्कालीन प्रदेश सरकार ने ध्यान दिया और न ही स्थानीय नेताओं ने उनका साथ देना मुनासिब समझा। अपनी राजनीति चमकाने के चक्कर में बरेली के अधिकांश नेता चुप्पी साधे रहे। नेताओं की अनदेखी का असर बरेली के आसपास रहने वाले किसानों पर भी पड़ा।
बात शुरू करते हैं नेकपुर चीनी मिल बरेली से। जानकारों के मुताबिक यह जिले की पहली चीनी मिल थी। नेकपुर चीनी मिल 1952 में स्थापित की गई थी। पहले यह मिल प्राइवेट थी, सन् 1973 में चीनी मिल का सरकार ने अधिग्रहण कर लिया था।1984 में इसे शुगर फेडरेशन के अधीन कर लिया गया। सन् 1995 में नेकपुर मिल को लक्ष्य से अधिक चीनी उत्पादन के लिए गोल्ड मेडल मिला था, लेकिन तीन साल बाद ही 1998 में उसे घाटे में बताकर बंद कर दिया गया।
चीनी मिल बंद होने से करीब हजारों कर्मचारी एक झटके में बेघर हो गए। वहीं आसपास के इलाके के हजारों किसानों की दिक्कत भी बढ़ गई। किसानों को दूर दराज इलाकों में बनी चीनी मिलों को अपना गन्ना भेजना पड़ता है। ऐसे में किराया भी बढ़ गया, जिससे किसानों की आय पर भी असर पड़ा। नेकपुर चीनी मिल बंद होने के बाद किसी दल ने इसे दोबारा शुरू कराने की कवायद तक शुरू नहीं की। हां हकों के लिए कर्मचारियों ने जरूर प्रदर्शन किए, लेकिन सरकारी डंडे के आगे वे भी मजबूरी में शांत होकर बैठ गए।
बसपा शासन में बेच दी चीनी मिल
प्रदेश में वर्ष 2007 में बसपा की सरकार बनी। उस वक्त प्रदेश सरकार ने प्रदेश की 21 बंद पड़ी चीनी मिलों को बिजनौर की नम्रता मार्केटिंग प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के हाथों बेच दिया था। इसमें नेकपुर चीनी मिल भी शामिल थी। इस चीनी मिल को बहुत की दामों में बेचा गया था। चीनी मिल को मात्र 14.11 करोड़ रुपये में बेचा गया था।
आज भी बकाया है पीएफ और फंड
स्थानीय लोगों ने बताया कि मिल में उस वक्त हजारों कर्मचारी कार्यरत थे। चीनी मिल बिकने के बाद सभी बेरोजगार हो गए, लेकिन मिल प्रबंधन ने उनका पीएफ और फंड अब तक नहीं दिया है। कर्मचारियों का पीएफ और फंड दिलाने के लिए कोई पार्टी या कोई राजनेता सामने नहीं आया। इस मामले में कुछ श्रमिकों का केस न्यायालय में चल रहा है।
दर्ज हुई थी रिपोर्ट
किसानों और श्रमिकों का संघर्ष काम आया। मामला केंद्र सरकार तक पहुंचा तो इसे सीबीआई के हवाले कर दिया गया। सीबीआई ने इस प्रकरण में बिजनौर की कंपनी के सात लोगों पर उस वक्त रिपोर्ट दर्ज कराई थी। मजदूर नेता सियाराम ने बताया कि उस वक्त चीनी निगम के अधिकारियों ने मिलें बेच कर सत्ताधरी नेताओं को लाभ पहुंचाया था। इसमें नेताओं ने मोटी कमीशन ली थी।
फैक्ट फाइल
- इतने मजदूर करते थे काम – 2000
- किसानों को मिलता था लाभ- 10000
- कितने में बेची चीनी मिल – 14.11 करोड़
बोले नेता
लंबे समय से बरेली में बंद पड़ी फैक्ट्रियों पर वर्तमान सरकार द्वारा कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा जिसमें विमको फैक्ट्री नेकपुर चीनी मिल जैसी बड़ी फैक्ट्रियां हाशिए पर हैं चीनी मिल यदि चालू हो जाए तो किसानों के साथ-साथ बड़े स्तर पर लोगों को रोजगार उपलब्ध हो जाएगा जिससे किसानों को भी अपना गन्ना लेकर इधर उधर ना भागना पढ़े साथ ही रोजगार के लिए लोग अपना घर छोड़कर बाहर ना जाए वह अपने परिवार के साथ ही रहे -राजेंद्र गौतम – मंडल प्रभारी बीएसपी बरेली
नेकपुर चीनी मिल की जमीन अरबों की कीमत की थी। उसे मात्र 14.11 करोड़ में बेचकर बड़े पैमाने पर खेल किया गया। वर्तमान में केंद्र और प्रदेश में भाजपा की सरकार है। यह सरकारें बरेली में कोई नया उद्योग स्थापित नहीं कर सकीं ताकि लोगों को स्थानीय स्तर पर रोजगार मिल सके। सरकार सिर्फ दिखावा कर रही हैं। सपा जिले के समस्त बड़े उद्योगों की सूची तैयार करेगी और यह तय है कि अगर सरकार बनेगी तो निश्चित ही बंद उद्योगों को संजीवनी मिल जाएगी। – अगम मौर्य, जिलाध्यक्ष सपा
उत्तर प्रदेश में पिछले लगभग 30 सालों से समाजवादी पार्टी , बहुजन समाज पार्टी, भारतीय जनता पार्टी की सरकारे सत्ता में रही है इन सरकारों ने सिर्फ अपने परिवार और अपने मित्रों को लाभ पहुंचाने के लिए लगातार बड़े बड़े उद्योगों , फैक्ट्रियों को बेचने का काम किया है। कांग्रेस के सत्ता से हटने के बाद कोई उद्योग जिले में नहीं लगा है। यदि कांग्रेस की सरकार बनी तो बरेली के पास चीनी मिल लगवाने का काम होगा। जिससे किसानों को लाभ मिल सके। -अशफाक सकलैनी- जिलाध्यक्ष कांग्रेस
