नव वर्ष 2022: खिली सहास एक-एक पंखुरी, झड़ी उदास एक-एक पंखुरी…
नव वर्ष खिली सहास एक-एक पंखुरी, झड़ी उदास एक-एक पंखुरी, दिनांत प्रात, प्रात सांझ में घुला, इसी तरह व्यतीत वर्ष हो गया। गया हुआ समय फिरा नहीं कभी, गिरा हुआ सुमन उठा नहीं कभी, गई निशा दिवस कपाट को खुला, गिरा सुमन नवीन बीज बो गया। सजे नया कुसुम नवीन डाल में, सजे नया दिवस …
नव वर्ष
खिली सहास एक-एक पंखुरी,
झड़ी उदास एक-एक पंखुरी,
दिनांत प्रात, प्रात सांझ में घुला,
इसी तरह व्यतीत वर्ष हो गया।
गया हुआ समय फिरा नहीं कभी,
गिरा हुआ सुमन उठा नहीं कभी,
गई निशा दिवस कपाट को खुला,
गिरा सुमन नवीन बीज बो गया।
सजे नया कुसुम नवीन डाल में,
सजे नया दिवस नवीन साल में,
सजे सगर्व काल कंठ-भाल में
नवीन वर्ष को स्वरूप दो नया।
साथी, नया वर्ष आया है!
साथी, नया वर्ष आया है!
वर्ष पुराना, ले, अब जाता,
कुछ प्रसन्न सा, कुछ पछताता
दे जी भर आशीष, बहुत ही इससे तूने दुख पाया है!
साथी, नया वर्ष आया है!
उठ इसका स्वागत करने को,
स्नेह बाहुओं में भरने को,
नए साल के लिए, देख, यह नई वेदनाएँ लाया है!
साथी, नया वर्ष आया है!
उठ, ओ पीड़ा के मतवाले!
ले ये तीक्ष्ण-तिक्त-कटु प्याले,
ऐसे ही प्यालों का गुण तो तूने जीवन भर गाया है!
साथी, नया वर्ष आया है!
- हरिवंशराय बच्चन
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