बरेली: …तो इस बार भी डमी कंडीडेट के बलबूते होगा शह और मात का खेल
बरेली, अमृत विचार। राजनीति में डमी उम्मीदवारों को चुनाव मैदान में उतारने का खेल चल रहा है। डमी कंडीडेट को खड़ा करने कुछ नेता जातिगत आंकड़ों पर चुनाव लड़ रहे प्रत्याशियों का गणित खराब करने में माहिर माने जाते हैं। शाहजहांपुर जिले में ऐसा खेल इस बार भी होने के आसार हैं। यहां चुनाव में …
बरेली, अमृत विचार। राजनीति में डमी उम्मीदवारों को चुनाव मैदान में उतारने का खेल चल रहा है। डमी कंडीडेट को खड़ा करने कुछ नेता जातिगत आंकड़ों पर चुनाव लड़ रहे प्रत्याशियों का गणित खराब करने में माहिर माने जाते हैं। शाहजहांपुर जिले में ऐसा खेल इस बार भी होने के आसार हैं। यहां चुनाव में उतरने वाले डमी प्रत्याशी दिग्गजों के पैरों तले जमीन खिसकाने में भी माहिर माने जाते हैं। इतिहास गवाह है कि डमी कई चुनावों में डमी प्रत्याशियों के कारण राजनीतिक धुरंधरों को हार का मुंह देखना पड़ा है।
आज बात शुरू करते हैं कटरा विधानसभा क्षेत्र से। इस क्षेत्र में सबसे अधिक ठाकुर बिरादरी के वोट हैं। वहीं दूसरे नंबर पर हरिजन और तीसरे नंबर पर यादव जाति के लोग आते हैं। इसके बाद कश्यप, कुर्मी ब्राह्मण, तेली आदि जातियां हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले चुनाव में डमी प्रत्याशियों ने बहुत बड़ा उलटफेर किया था। यही वजह रही कि यहां जीत हार का अंतर बड़ा रहा। यही वजह है कि कटरा विधानसभा में कुछ प्रत्याशी चुनाव जीतने के लिए एंड़ी चोटी का जोर लगा रहे हैं।
चुनाव में एक बिरादरी के वोट काटने के लिए दूसरी बिरादरी के प्रत्याशी डमी उम्मीदवार खड़ा कर देते हैं। स्थानीय लोगों की माने तो सही पार्टी से टिकट दिलाने के लिए भी संभावित प्रत्याशी एंड़ी चोटी का जोर लगा देते हैं, जिससे मतदाता भ्रमित हो जाएं और उनकी गाड़ी चुनावी भंवर से आसानी से निकल जाए।
कई डमी प्रत्याशी ऐसे भी होते हैं जो अपने लिए नहीं बल्कि उस प्रत्याशी के लिए वोट मांगते हैं, जिसने उसे खड़ा किया है। क्षेत्र में चर्चा है कि एक पार्टी के नेता एक नेता अपने प्रतिद्वंदी प्रत्याशी की जाति का उम्मीदवार खड़ा कर रहे हैं। जिससे जाति के वोटों में बटवारा हो जाए और उनकी गाड़ी चुनावी लहरों से पार हो सके।
कुर्सी के लिए होती है कांटे की टक्कर
कटरा विधानसभा क्षेत्र में कुर्सी के लिए कांटे की टक्कर होती है। चुनावी प्रतिस्पर्धा में प्रत्याशी एड़ी चोटी का जोर लगा देते हैं। धन-बल व जनबल तो उनका आधार रहता ही है लेकिन ये प्रतिस्पर्धी की वोट में सेंधमारी की भी जुगाड़ में लगे रहते हैं।
जातिगत वोटरों की संख्या के आंकड़ों के आधार पर वैसे डमी उम्मीदवार को खड़ा किया जाता है जो मुकाबले में खड़े प्रत्याशी का वोट काट सके। उसके वोट का प्रतिशत कम कर सके। वोट का ध्रुवीकरण अपने पक्ष में कर सके। इसके निमित डमी उम्मीदवार सीमांचल में प्रत्याशियों के लिए काफी लाभदायक भी साबित होते हैं।
