रायबरेली: सीएचसी में सिजेरियन प्रसव न होने से बेहाल हो रहीं प्रसूताएं
रायबरेली। सीएचसी पर ऑपरेशन की सुविधा न होने से हर रोज प्रसूताओं को प्रसव के दौरान बेहाल होना पड़ रहा है। कहीं डॉक्टर नहीं तो कहीं ऑपरेशन थिएटर में संसाधनों के अभाव के कारण जिले की किसी भी सीएचसी में सिजेरियन प्रसव नहीं हो रहा है। जच्चा-बच्चा मृत्युदर को कम करने का दावा किया जा …
रायबरेली। सीएचसी पर ऑपरेशन की सुविधा न होने से हर रोज प्रसूताओं को प्रसव के दौरान बेहाल होना पड़ रहा है। कहीं डॉक्टर नहीं तो कहीं ऑपरेशन थिएटर में संसाधनों के अभाव के कारण जिले की किसी भी सीएचसी में सिजेरियन प्रसव नहीं हो रहा है।
जच्चा-बच्चा मृत्युदर को कम करने का दावा किया जा रहा है लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में प्रसूताओं को चिकित्सीय सुविधाएं नाकाफी हैं। सामान्य प्रसव करवाने में असफल होने पर प्रसूताओं को जिला अस्पताल रेफर कर दिया जा रहा है। ऐेसे में प्रसूताओं को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
जिले में बछरावां, लालगंज और ऊंचाहार को एफआरयू का दर्जा मिल चुका है, लेकिन यहां भी सिजेरियन प्रसव की सुविधा विभाग नहीं दे पा रहा है। जिला महिला अस्पताल में पिछले दिसंबर माह तक 2512 सिजेरियन प्रसव कराए गए हैं। वहीं जिले में 35235 सामान्य प्रसव हुए हैं। जिले की लालगंज सीएचसी में प्रसव की सुविधा शुरू करवाने के लिए कवायद शुरू की गई है।
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जिले की फर्स्ट रेफरल इकाइयों बछरावां, लालगंज, और ऊंचाहार के अलावा डलमऊ, सलोन अदि सीएचसी में सिजेरियन प्रसव शुरू कराए गए थे, लेकिन धीरे-धीरे संसाधनों के अभाव में ऑपरेशन होने बंद हो गए। खासकर पिछले दो साल में कोरोना के कहर के कारण ये सेवाएं पूरी तरह से ठप हो चुकी हैं। एफआरयू में यह सुविधा होने के कारण प्रसूताओं को जिला महिला अस्पताल में आकर परेशान नहीं होना पड़ता था।
जिले में एक माह में हुए सामान्य प्रसव
- अमावां- 113
- बछरावां- 328
- बेलाभेला- 179
- डलमऊ- 212
- गौरा- 127
- डीह- 196
- हरचंदपुर- 161
- जगतपुर- 147
- जतुआटप्पा- 111
- खीरों- 161
- लालगंज- 204
- महराजगंज- 212
- नसीराबाद- 196
- सलोन- 351
- सरेनी- 149
- शिवगढ़- 170
- ऊंचाहार- 276
- महिला अस्पताल- 869
- कुल- 4161
सभी एफआरयू में सिजेरियन प्रसव कराने का प्रयास किया जा रहा है। लालगंज सीएचसी में डॉक्टरों की समुचित व्यवस्था की जा चुकी है। जल्द ही सिजेरियन प्रसव शुरू कराए जाएंगे। सिजेरियन प्रसव में ब्लड की जरूरत होती है। ग्रामीण स्तर पर ब्लड न मिल पाने के कारण समस्या आती है। वहींसामान्य प्रसव सभी सेंटरों पर आसानी से कराए जा रहे हैं। –डॉ. वीरेंद्र सिंह, सीएमओ
