बढ़ता खतरा

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Edited By Amrit Vichar
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देश में कोरोना से संक्रमित लोगों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। कोविड वर्किंग ग्रुप एनटीएजीआई के अध्यक्ष डॉ. एनके अरोड़ा का कहना है कि कोरोना संक्रमितों की संख्या में वृद्धि तीसरी लहर का संकेत देती है, लेकिन इससे घबराने की आवश्यकता नहीं है। पिछले 24 घंटे के दौरान कोरोना के 37,379 नए …

देश में कोरोना से संक्रमित लोगों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। कोविड वर्किंग ग्रुप एनटीएजीआई के अध्यक्ष डॉ. एनके अरोड़ा का कहना है कि कोरोना संक्रमितों की संख्या में वृद्धि तीसरी लहर का संकेत देती है, लेकिन इससे घबराने की आवश्यकता नहीं है। पिछले 24 घंटे के दौरान कोरोना के 37,379 नए मामले सामने आए हैं। 23 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से ‘ओमिक्रान’ के अब तक 1,892 मामले सामने आ चुके हैं।

बढ़ते मामलों को देखते हुए राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में सप्ताहांत कर्फ्यू लागू कर दिया गया है। महाराष्ट्र के उप-मुख्यमंत्री अजीत पवार ने कहा कि अगर कोरोना संक्रमण काबू में नहीं आया तो लाकडाउन लग सकता है। हालांकि आज कोई भी लाकडाउन नहीं चाहता है और इसे निश्चित रूप से लागू नहीं किया जाना चाहिए। अगर लॉकडाउन फिर से लागू किया जाता है तो यह सभी को बुरी तरह प्रभावित करेगा। फिर भी लोग आपस में घुल-मिल रहे हैं। देखा जाए तो वायरस को फैलने से रोकने के लिए ज्यादा कुछ नहीं किया जा रहा। पिछले 24 घंटे में देश भर में 99 लाख से अधिक कोविड टीके लगाए गए हैं। इसके साथ ही कुल टीकाकरण 146.70 करोड़ से अधिक हो गया है। सवाल है कि कोरोना वायरस का टीका लगवाने के बाद भी लोग कोरोना से कैसे संक्रमित हो रहे हैं?

देश में कोरोना वायरस का पहला मामला मिलने से लेकर अब तक इसमें कई म्यूटेशंस आ चुके हैं। अल्फ़ा के मुक़ाबले डेल्टा अधिक घातक था, ऐसे में ओमिक्रान को लेकर चिंता बेवजह नहीं है। विशेषज्ञों का मानना है कि ओमिक्रान के लक्षण काफी मामूली हैं और संक्रमित लोग बहुत जल्द ठीक हो रहे हैं। लेकिन इससे बचकर रहना ज़रूरी है। बिना घबराए सभी लोग कोरोना अनुरूप व्यवहार का पालन करें। लेकिन अधिक संक्रामक होने के कारण ये वायरस अधिक लोगों के शरीर में होगा तो इसके म्यूटेट करने की संभावना भी अधिक होगी। संक्रमित लोगों की संख्या अधिक होने से चिकित्सा प्रणाली पर दबाव बढ़ेगा।

इस पर अंकुश लगाने के लिए वैक्सीन बेहद ज़रूरी है। इसके लिए आवश्यक है कि वैज्ञानिक नए वेरिएंट्स पर नज़र रखें ताकि वैक्सीन तैयार करने में मदद मिल सके। एक शोध में दावा किया गया है कि ‘आरएनए’ अणु से ‘डेल्टा’ समेत कोरोना वायरस के कई स्वरूपों के विरुद्ध प्रतिरक्षा विकसित हो सकती है। हाल में, ‘जर्नल ऑफ एक्सपेरिमेंटल मेडिसिन’ (जेईएम) नामक शोध पत्रिका में प्रकाशित शोधपत्र के अनुसार, इस अध्ययन से उन विकासशील देशों के लिए कम खर्च वाला इलाज उपलब्ध हो सकता है, जहां टीके की कमी है। फिलहाल इससे बचने का सबसे आसान और भरोसेमंद हथियार मास्क है और सभी लोग टीका लगवा लें।