मुरादाबाद : हर बार मिली हार, फिर भी जोश बरकरार
सलमान खान/मुरादाबाद, अमृत विचार। जनपद में एक नेता ऐसे भी है, जिन्हें लोग चुनाव लड़ने वाले नेताजी के नाम से जानते है। 2007 से लेकर सांसद, विधायक व मेयर तक का चुनाव लड़ चुके डा. असलम पाशा आज तक किसी चुनाव में जीत हासिल नहीं कर पाए। हर चुनाव में उनकी जमानत जब्त होती है, …
सलमान खान/मुरादाबाद, अमृत विचार। जनपद में एक नेता ऐसे भी है, जिन्हें लोग चुनाव लड़ने वाले नेताजी के नाम से जानते है। 2007 से लेकर सांसद, विधायक व मेयर तक का चुनाव लड़ चुके डा. असलम पाशा आज तक किसी चुनाव में जीत हासिल नहीं कर पाए। हर चुनाव में उनकी जमानत जब्त होती है, फिर भी जोश बरकरार है। वह आने वाले चुनाव में फिर से विधायकी का चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं।
कुंदरकी विधानसभा क्षेत्र के गांव डोमघर के रहने वाले असलम पाशा पेशे से डॉक्टर हैं। अमृत विचार से बातचीत के दौरान डॉक्टर असलम पाशा ने बताया कि शुरू से ही उनको समाज की सेवा करने का शौक था। इस बीच उन्होंने सोचा की वह जनप्रतिनिधि बनकर जनता की सेवा अच्छे से कर सकते हैं। इसलिये 2007 में देहात विधानसभा क्षेत्र से आदर्श पॉलिटिकल पार्टी से विधायक का चुनाव लड़ा और हार गए।
इसके बाद उन्होंने मुरादाबाद पश्विम सीट पर हुए उपचुनाव में अपनी किस्मत निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में आजमाई, लेकिन इस बार भी उन्हें सफलता नहीं मिली। 2012 में असलम पाशा ने मुरादाबाद शहर में महापौर के पद पर राष्ट्रीय जनता दल के सिंबल पर चुनाव लड़ा। इस चुनाव में उन्हें ढाई हजार वोट मिले और हार का सामन करना पड़ा। लेकिन, असलम पाशा ने हार नहीं मानी और 2014 में वह अपनी किस्मत आजमाने के लिए जनपद संभल पहुंचे और आरपीआई से संभल लोकसभा का चुनाव लड़ा।
संभल में तुर्क बिरादरी का दबदबा होने के कारण असलम पाशा को 5 हजार वोट मिल गए। लेकिन, वह जीत नहीं पाए। इसके बाद पाशा ने 2017 के विधानसभा चुनाव में देहात विधानसभा क्षेत्र से आरपीआई से चुनाव लड़ा, लेकिन इस बार भी उन्हें हार ही सामना करना पड़ा। 2019 में हुए लोकसभा चुनाव में डा. असलम पाशा को जन शक्ति दल ने मुरादाबाद लोकसभा क्षेत्र से चुनाव मैदान में उतारा। हार ने उनका यहां भी पीछा नहीं छोड़ा।
डा. असलम का कहना है मौजूदा समय में जनता दल यूनाइटेट से मुरादाबाद के जिलाध्यक्ष हैं। उत्तर प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव उनकी पार्टी और भाजपा के बीच गठबंधन होने की बात चल रही है। अगर पार्टी का भाजपा से गठबंधन नहीं हुआ तो वह इस बार भी देहात विधान सभा से चुनाव लड़ेंगे।
अजब-गजब
2007 से सांसद, विधायक व मेयर का चुनाव लड़ते आ रहे असलम पाशा
जनपद में चुनाव लड़ने वाले नेताजी के नाम से हैं मशहूर, संभल में भी लड़ा चुनाव
