उत्तर प्रदेश में लकी मानी जाती है सुल्तानपुर की यह सीट, जीतने वाली पार्टी की बनती है सरकार
सुल्तानपुर। यूपी चुनाव की रणभेरी बज चुकी है। चुनाव आयोग के अधिसूचना जारी करने के बाद प्रदेश में आचार संहिता लागू हो चुकी है। सभी दल चुनावी मैदान में जाने के लिए तैयार हो चुके हैं। लेकिन क्या आपको पता है कि उत्तर प्रदेश में सुल्तानपुर ऐसा जिला है जहां सदर विधानसभा सीट से जो …
सुल्तानपुर। यूपी चुनाव की रणभेरी बज चुकी है। चुनाव आयोग के अधिसूचना जारी करने के बाद प्रदेश में आचार संहिता लागू हो चुकी है। सभी दल चुनावी मैदान में जाने के लिए तैयार हो चुके हैं। लेकिन क्या आपको पता है कि उत्तर प्रदेश में सुल्तानपुर ऐसा जिला है जहां सदर विधानसभा सीट से जो दल चुनाव जीतता है, प्रदेश में उसी पार्टी की सरकार बनती है।
हर दल की रहती है इस सीट पर नजर
हम बात कर रहे हैं आदिगंगा गोमती गोमती नदी के तट के किनारे बसे सुल्तानपुर जिले के बारे में। सुलतानपुर जिले में कुल पांच विधानसभा सीट है। इनमें एक सदर विधानसभा सीट अपने आप में खास है। इस सीट पर हर राजनीतिक दल की नजर रहती है। इस सीट पर जो भी जनप्रतिनिधि जीतता है, यूपी में उसी पार्टी की सरकार बनती है। इस सीट को राजनीतिक दलों के लिए भाग्यशाली माना जाता है। पिछले कुछ चुनावी परिणामों पर नजर डालें तो तस्वीरें तो कुछ यूं ही बयां कर रही हैं।
गौरतलब है कि सुल्तानपुर सदर विधानसभा सीट राजधानी लखनऊ से करीब 165 किमी. दूर है। यहां से अयोध्या की दूरी मात्र 65 किमी. है, जबकि संगमनगरी प्रयागराज से इसकी दूरी 125 किलोमीटर है। बता दें कि सुलतानपुर जिला अपने आप में खास है। खास इसलिए है क्योंकि यहां पर गोमती मैया की मुख्य धारा उल्टी दिशा में बहती है। यहां पर कई आस्था के केंद्र हैं, जो इस जिले को खास बनाते हैं।
बसपा ने मारी है हैट्रिक
अब बात करते हैं सुल्तानपुर सदर विधानसभा सीट की तो बता दें कि 2008 के परिसीमन से पहले ये सीट जयसिंहपुर के नाम से जानी जाती थी। ये सीट इतनी खास थी कि समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने 2017 के चुनाव से पहले इसी सीट से अपनी पार्टी के चुनाव प्रचार का आगाज किया था। इस विधानसभा सीट पर अब तक सबसे ज्यादा बसपा को जीत मिली है। 1996 से 2007 तक ये सीट बसपा के नाम रही है। अगर 1969 से अब तक के चुनाव परिणामों पर गौर किया जाए तो बसपा के अलावा ये सीट कांग्रेस, भाजपा, सपा और जनता दल के भी नाम रही है। बीजेपी ने इस सीट से दो बार चुनाव जीता है, जबकि बसपा ने इस सीट से हैट्रिक मारी है।
क्या है राजनीतिक इतिहास
अगर सिलेसिले इस सीट पर नजर डालें तो सबसे पहले 1969 में कांग्रेस के श्यो कुमार ने इस सीट पर जीत दर्ज की थी। इसके बाद 1977 में जनता दल के मकबूल हुसैन तो 1980 में कांग्रेस के देवेंद्र पांडेय यहां से चुनाव जीते थे। इसके बाद के चुनावों में 1989 में यहां से जनता पार्टी से अलग हुए जनता दल के प्रत्याशी सूर्यभान सिंह यहां से चुनाव जीते। इसके बाद 1991 में इस सीट पर पहली बार कमल खिला।
इसके अगले चुनाव में यहां से सपा के ए. रईस तो 1996 में बसपा के राम रतन यादव यहां से चुनाव जीते। इसके बाद 2002 और 2007 में यहां से बसपा के उम्मीदवार लगातार चुनाव जीते। बसपा ने यहां से ओपी सिंह को उम्मीदवार बनाया था। इसके बाद 2012 में बसपा ने एक बार फिर जीत की उम्मीद से यहां पर अपना उम्मीदवार उतारा लेकिन उसे निराशा हाथ लगी और इस सीट पर सपा ने अपना परचम लहरा दिया।
सपा के अरुण वर्मा ने यहां से जीत दर्ज की और पहली बार वो यहां के जनप्रतिनिधि बने। इसके बाद बारी आई 2017 के विधानसभा चुनाव की तो यहां से बीजेपी ने सीताराम वर्मा को टिकट दिया और वो सदर विधानसभा सीट से चुनाव जीत गए। उन्होंने अपने प्रतिद्वंदी उम्मीदवार बसपा के राज प्रसाद को भारी वोटों से मात दे दी।
सामाजिक पृष्ठभूमि
बात अगर सामाजिक पृष्ठभूमि पर की जाए तो यहां पर 2021 की चुनावी वोटर लिस्ट के अनुसार तीन लाख 36 हजार वोटर हैं। 2017 के विधानसभा चुनाव में सदर सीट में कुल तीन लाख 24 हजार मतदाता थे। इस सीट पर करीब 59 फीसदी मतदाताओं ने अपने मत का प्रयोग किया था।
इस विधानसभा सीट पर हर जाति और मजहब के लोग निवास करते हैं। यहां पर जहां ब्राह्मण वोटरों की संख्या करीब 15 प्रतिशत है तो वहीं ठाकुर वोटरों की संख्या करीब 8 प्रतिशत है। इसके अतिरिक्त यादव यहां 10 प्रतिशत तो मुस्लिम यहां सात प्रतिशत हैं। इसके अलावा दलित 19, कुर्मी 13, कायस्थ दो तो वहीं प्रजापति और मौर्य क्रमश: तीन और पांच प्रतिशत हैं। इसी प्रकार पाल, चौरसिया व अन्य जातियां भी यहां निवास करती हैं।
बीजेपी विधायक का प्रोफाइल
2017 विधानसभा चुनाव से इस सीट से बीजेपी के सीताराम वर्मा यहां से विधायक हैं। सीताराम राम वर्मा पेशे से विधायक हैं और इनका जन्म 17 फरवरी 1948 को हुआ था। 73 साल के अधिवक्ता विधायक सीताराम वर्मा इससे पहले बसपा में भी रह चुके हैं। 2017 के विधानसभा चुनाव में ये पाला बदलकर बीजेपी में शामिल हो गए थे। सीताराम सुलतानपुर जिले से जिला पंचायत अध्यक्ष भी रह चुके हैं।
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