मुरादाबाद : लामबंदी में नुमाइंदा चुनने का कीर्तिमान रखते हैं क्षेत्र के लोग
मुरादाबाद, अमृत विचार। विधान सभा चुनाव में कांग्रेसी उम्मदवार को क्षेत्र की बागडोर देने वाले कांठ के मतदाता प्रयोगवादी हैं। लामबंदी यहां के लोगों के मन-मस्तिष्क में बसी है। इसीलिए दलों को अपनी कसौटी पर कसते रहते हैं। वर्ष 2012 का चुनाव इस बात का संकेत है कि यहां के लोग लामबंदी में अपने नुमाइंदे …
मुरादाबाद, अमृत विचार। विधान सभा चुनाव में कांग्रेसी उम्मदवार को क्षेत्र की बागडोर देने वाले कांठ के मतदाता प्रयोगवादी हैं। लामबंदी यहां के लोगों के मन-मस्तिष्क में बसी है। इसीलिए दलों को अपनी कसौटी पर कसते रहते हैं। वर्ष 2012 का चुनाव इस बात का संकेत है कि यहां के लोग लामबंदी में अपने नुमाइंदे का चुनाव कर लेते हैं।
वर्ष 2017 के चुनाव में जनता ने सपा विधायक अनीसुर्रहमान सैफी को कुर्सी से उतार दिया तथा भाजपा के राजेश कुमार चुन्नू को बागडोर सौंप दी। 2012 में सैफी सपा से टिकट न मिलने की स्थिति में रातों-रात पीस पार्टी में शामिल हो गए। बसपा से सीधी लड़ाई में 1534 मतों के अंतर से वह चुनाव जीत गए। विधायक राजेश का इस सीट पर पुराना अधिकार है। इनके पिता भी विधायक रहे हैं। अब किसके- किसके बीच चुनावी जंग होगी, यह उम्मीदवारों के ऐलान के बाद
साफ होगा।
सीट से 1957 के पहले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के जितेंद्र प्रताप सिंह, 1962 में कांग्रेस के दाऊ दयाल खन्ना, 1967 में निर्दलीय जे सिंह विधायक बने। 1969 में नई पार्टी भारतीय क्रांति दल का उदय हुआ। इसके नौनिहाल सिंह ने विजय पाई। 1974 में भारतीय क्रांति दल के ही चंद्रपाल सिंह, 1977 में जनता पार्टी के हरगोविंद सिंह, 1980 में कांग्रेस (यू) से रामकिशन, 1985 में कांग्रेस से समरपाल सिंह विधायक निर्वाचित हुए।
1989 में जनता दल से चंद्रपाल सिंह, 1991 में भाजपा के ठाकुर पाल सिंह, 1993 में जनता पार्टी के महबूब अली, 1996 में भाजपा के राजेश कुमार चुन्नू, 2002 और 2007 में बसपा के रिजवान अहमद और 2012 में पीस पार्टी के टिकट पर चुनाव मैदान में उतरे अनीसुर्रहमान सैफी को विधानसभा में भेजा था। 2017 के चुनाव में भाजपा ने राजेश को टिकट दिया। उनके सामने सपा से विधायक अनीसुर्रहमान सैफी मैदान में थे। राजेश ने सपा के अनीस को 2348 वोट के अंतर से हरा दिया। तीसरे नंबर पर बसपा के नासिर रहे।

