लखीमपुर खीरी: केंद्रीय गृह राज्यमंत्री टेनी के शाले को कोर्ट से मिली जमानत

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लखीमपुर खीरी। तिकुनिया हिंसा कांड में आरोपी बनाए गए केंद्रीय गृह राज्यमंत्री के शाले वीरेंद्र शुक्ला को सीजेएम कोर्ट ने सोमवार को जमानत दे दी वह इस कांड में घटना के साक्ष्य छुपाने के मामले 14 वें आरोपी बनाए गए थे। तीन जनवरी को एसआईटी ने अदालत में चार्जशीट दाखिल की थी। जिसमे मुख्य आरोपी …

लखीमपुर खीरी। तिकुनिया हिंसा कांड में आरोपी बनाए गए केंद्रीय गृह राज्यमंत्री के शाले वीरेंद्र शुक्ला को सीजेएम कोर्ट ने सोमवार को जमानत दे दी वह इस कांड में घटना के साक्ष्य छुपाने के मामले 14 वें आरोपी बनाए गए थे। तीन जनवरी को एसआईटी ने अदालत में चार्जशीट दाखिल की थी। जिसमे मुख्य आरोपी मंत्री पुत्र आशीष मिश्रा को बनाया गया है उधर, सोमवार को सुनवाई के बाद अदालत ने सभी आरोपियों को चार्जशीट की नकल देने का जांच टीम को आदेश दिया है। अभियोजन ने नकल न देने के लिये अदालत में अर्जी लगाई थी, जिस पर सोमवार को सुनवाई हुई।

इस मामले में शुक्रवार को भी हुई सुनवाई हुई थी वहीं, पिछले दो दिनों से स्थगित हो रही जमानत अर्जी सोमवार को आपत्तियों के निस्तारण के बाद सुनी गई। बचाव पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता रामाषीश मिश्र और शैलेंद्र सिंह ग़ौड़ ने बदली गई धाराओं में दाखिल जमानत अर्जी पर बहस की। बताया कि जमानत अर्जी देने वाले आरोपियों की कोई अन्य जमानत अर्जी किसी भी अदालत में लंबित नहीं है। जब सीजेएम ने ध्यान दिलाया यह जमानत प्रार्थना पत्र प्रथम है या द्वितीय तब आरोपियों की ओर से बताया गया कि इससे पूर्व की धाराओं में जमानत प्रार्थना पत्र खारिज हुआ था।

बदली गई धाराओं में पहली अर्जी है, लेकिन वह इस जमानत प्रार्थना पत्र को प्रथम जमानत अर्जी नही लिख सकते हैं। यह कहते हुए जमानत अर्जी में द्वितीय जमानत आवेदन का उल्लेख किया साथ ही अभियुक्तों के पैरोकार की ओर से इसी बात का शपथ पत्र भी दाखिल किया और बताया कि एसआईटी की ओर से बिना सम्यक जांच किए ही उन्हें आरोपी बताया गया, जबकि वह निर्दोष हैं।

वीरेंद्र शुक्ला पर यह हैं आरोप
तिकुनिया कांड में थार, फार्च्यूनर और स्कॉर्पियो का इस्तेमाल किया गया है। थार केंद्रीय गृह राज्यमंत्री अजय मिश्र टेनी की है। फॉर्च्यूनर व्यापारी अंकित दास की बताई जा रही है। जबकि घटना में इस्तेमाल की गई तीसरी गाड़ी स्कॉर्पियो केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्र टेनी के साले वीरेंद्र शुक्ला की है। वीरेंद्र शुक्ला पलिया से भाजपा के ब्लाक प्रमुख भी हैं। घटना के समय उनकी स्कॉर्पियो शिशुपाल चला रहा था। पुलिस ने शिशुपाल को जेल भेजा है। बताया जाता है कि घटना के बाद वीरेंद्र ने अपनी स्कॉर्पियो को छिपा लिया। जबकि उनको पता था कि उनकी गाड़ी घटना में प्रयोग की गई है।

पुलिस ने स्कॉर्पियो वीरेंद्र के घर से बरामद की और सीज कर दिया। एसआईटी ने जांच में पाया है कि वीरेंद्र शुक्ला ने सबूत छिपाए हैं। एसआईटी ने उनको भी धारा 201 के तहत आरोपी पाया। एसआईटी ने वीरेंद्र को आरोपी बनाया है। तीन जनवरी को जब चार्जशीट कोर्ट पहुंची थी तो इसका पता चला। एसआईटी ने वीरेंद्र शुक्ला को गिरफ्तार नहीं किया। उनको नोटिस देकर छोड़ दिया था। बताया जाता है कि 201 में सजा सात साल से कम है। इसीलिए वीरेंद्र की गिरफ्तारी नहीं हुई थी। उनको राहत देते हुए नोटिस दी गई थी कोर्ट वीरेंद्र को समन भेजकर दस जनवरी को तलब किया था जिस पर वीरेंद्र के पेश होने पर उसे जमानत दे दी गई है।

पांच आरोपियों के लिए दूसरे अधिवक्ता को भी दी गई नकल
तिकुनिया हिंसा में अदालती आदेश के बाद आखिरकार एसआईटी की ओर से केस डायरी से जुडे़ एक हजार पेज की नकल अंकित दास, सत्यम त्रिपाठी, नंदन सिंह बिश्ट, लतीफ उर्फ काले और शेखर भारती के अधिवक्ता शैलेंद्र सिंह गौड़ को प्राप्त कराई गई। इतनी लंबी चार्जशीट से जुडे़ हजारों पेज की नकल प्राप्त करने के बाद वरिष्ठ अधिवक्ता शैलेंद्र सिंह गौड़ ने बताया कि विस्तृत अध्ययन के बाद ही कुछ कहा जा सकता है कि एसआईटी ने कौन से महत्वपूर्ण साक्ष्यों को नहीं दिया। बताते हैं कि पूरी केस डायरी में कुल पांच हजार पेज नहीं हैं बल्कि इससे कम हैं। लेकिन अभियोजन की ओर से अंदाज से पांच हजार पेज की केस डायरी होने का कथन किया जा रहा है, जो स्वयं अभियोजन की कार्यशैली को बता रहा है।

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