मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद भी विभागों में अब तक नहीं बनी हेल्प डेस्क
लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशों के बाद भी सरकारी विभागों में हेल्प डेस्क नहीं बनी है। इन विभागों में न तो आने वालों का टम्परेचर लिया जा रहा है, न ही आने वालों के हाथों को सेनेटाइज किया जा रहा है। कहीं किसी प्रकार की जानकारी नहीं रखी जा रही है। तेजी से फैल …
लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशों के बाद भी सरकारी विभागों में हेल्प डेस्क नहीं बनी है। इन विभागों में न तो आने वालों का टम्परेचर लिया जा रहा है, न ही आने वालों के हाथों को सेनेटाइज किया जा रहा है। कहीं किसी प्रकार की जानकारी नहीं रखी जा रही है। तेजी से फैल रहे कोरोना संक्रमण के बावजूद अधिकारी लापरवाह बने हुए हैं। जिन विभागों में यह उपकरण लगे थे वह अब खराब हो चुके हैं, इन्हें ठीक भी नहीं कराया गया है।
परिवहन निगम मुख्यालय में मुख्य द्वार पर टेम्परेचर लेने के लिए यंत्र लगा हुआ है। लेकिन यह तकरीबन तीन महीने से खराब पड़ा है। इसके सामने जाने पर अब यह टम्परेचर नहीं बताता है। इसके अलावा यहां पर सेनेटाइजेशन की व्यवस्था नहीं है। हेल्प डेस्क न होने से लोग बिना किसी जांच के आ-जा रहे हैं। परिवहन निगम के एमडी आरपी सिंह ने कहा कि मंगलवार से इसकी व्यवस्था की जाएगी। आने-जाने वालों का ब्योरा नोट किया जाएगा।
इसी तरह से परिवहन विभाग मुख्यालय में भी अब तक हेल्प डेस्क नहीं बनी है। यहां पर भी सब कुछ राम भरोसे ही चल रहा है। न तो थर्मल गन है, न ही सेनेटाइजर की व्यवस्था। परिवहन आयुक्त धीरज साहू ने भी मंगलवार से व्यवस्था शुरू करने के निर्देश दिए हैं। खेल निदेशालय के बाहर सेनेटाइजर तो रखा हुआ हे लेकिन थर्मल गन की व्यवस्था नहीं है। ऐसे में यहां भी कोरोना संक्रमण तेजी से फैलने का खतरा बना हुआ है। आने वाले लोग हाथाें को बिना सेनेटाइज किए ही अंदर जा रहे हैं। यहां पर लोग बिना मास्क के आ-जा रहे हैं।
राजधानी में आलमबाग, चारबाग, कैसरबाग और चिनहट स्थित अवध बस अड्डा मौजूद है। यहां पर मेडिकल टीम सिर्फ उन्हीं की यात्रियों की जांच कर रही है जो जांच कराने आते हैं। अन्य यात्री बस अड्डे से ऐसे ही आ जा रहे हैं। यहां पर किसी भी गेट पर यात्रियों के आते-जाते समय न तो टम्परेचर मापा जा रहा है, न ही सेनेटाइजर मिल रहा है। यात्री बिना मासक के अंदर तक घूम रहे हैं। कोरोना की दूसरी लहर के दौरान कैसरबाग बस अड्डे पर सेनेटाइजेशन की मशीनें लगाई गई थी जो कि अब नदारद हो चुकी हैं।
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