लखनऊ: सूदखोरी का पेशा बन रहा जान का दुश्मन, पिछले दो सप्ताह में हुईं दो बड़ी हत्याएं

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लखनऊ। बड़े-बुजुर्ग कहते हैं न कि सूद (ब्याज) का पैसा कभी फलता नहीं, शायद यह बात सौ फीसदी सच भी है। सूदखोरी का पेशा इन दिनों लोगों की जान का दुश्मन बन रहा है। सूदखोरी के चलते राजधानी में पिछले दो सप्ताह में हत्या की दो बड़ी घटनाएं प्रकाश में आई हैं। आश्चर्य की बात …

लखनऊ। बड़े-बुजुर्ग कहते हैं न कि सूद (ब्याज) का पैसा कभी फलता नहीं, शायद यह बात सौ फीसदी सच भी है। सूदखोरी का पेशा इन दिनों लोगों की जान का दुश्मन बन रहा है। सूदखोरी के चलते राजधानी में पिछले दो सप्ताह में हत्या की दो बड़ी घटनाएं प्रकाश में आई हैं। आश्चर्य की बात तो ये है कि दोनों ही हत्याकांड हूबहू एक तरीके से किये गये हैं।

करीबी दोस्त ने ही उतार दिया मौत के घाट

गत 23 दिसंबर को कैसरबाग के खंदारी बाजार निवासी प्रापर्टी डीलर मो. शोएब का पुलिस ने सीतापुर अंतर्गत शारदा नदी में सरैया पुल के पास शव बरामद किया था। मो. शोएब पिछले 14 दिनों से लापता चल रहा था। घटना की जांच में पुलिस ने हत्या के आरोप में मो. शोएब के करीबी दोस्त व बिजनेस पार्टनर नसीम को गिरफ्तार किया। नसीम ने बताया कि उसने मो. शोएब से 20 लाख रुपये ब्याज पर लिये थे। पैसे के लिए मो. शोएब आए दिन उसे सामाजिक स्तर पर बेइज्जत करता था, इसलिए उसने 40 हजार रुपये सुपारी देकर शोएब की हत्या कर दी और शव को सीतापुर में शारदा नहर में फेंक दिया।

वहीं गत 10 जनवरी को मड़ियांव के मोहिबुल्लापुर निवासी जमीन कारोबारी यासीन उर्फ मुन्ना का पुलिस ने बाराबंकी में नहर में शव बरामद किया। सीडीआर के आधार हत्यारोपी के रूप में यासीन के करीबी दोस्त व बिजनेस पार्टनर समरजीत सिंह को गिरफ्तार किया। समरजीत सिंह ने बताया कि उसने यासीन से तीन लाख रुपये ब्याज पर लिये थे। किश्त को लेकर यासीन आए दिन उसे बेइज्जत करता था, इसलिए उसने एक पेशेवर हत्यारे के साथ मिलकर जमीन दिखाने के बहाने यासीन को बाराबंकी लेकर गया, जहां बांका से गले पर वारकर यासीन की हत्या कर दी और शव को नहर में फेंक दिया।

मनी लेंडिंग करने वालों का कोई रिकॉर्ड नहीं

पेशेवर तरीके से ब्याज पर पैसे देने के लिए मनी लेंडिंग एक्ट 1934 के तहत लाइसेंस लेना जरूरी है। पर शहर में इस एक्ट का खुला उल्लंघन करते हुए बिना लाइसेंस लिये सूदखोरी का बड़े पैमाने पर अवैध व्यापार किया रहा है। जिला प्रशासन या पुलिस के पास मनी लेंडिंग करने वालों का कोई ब्यौरा तक नहीं है। इसके कारण शहर में अपराध का ग्राफ भी तेजी से बढ़ रहा है।

बिना लाइसेंस के पेशेवर तरीके से ब्याज पर पैसे देना और जबरन तरीके से वसूली करना गैरकानूनी है। इसमें आईपीसी की धारा 384 के तहत कार्रवाई का प्रावधान है। अगर कोई ऐसा करता है तो नजदीकी थाना को सूचित करें, निश्चित रूप से कार्रवाई होगी…पीयूष मोर्डिया, ज्वाइंट कमिश्नर, कानून एवं व्यवस्था, लखनऊ।

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