लखनऊ: फेरी के फेर में रोडवेज के अधिकारी कर रहे लाखों का हेरफेर
लखनऊ। जैसे ही बस अड्डे पर बसें रुकती हैं, वैसे ही फेरी वाले इन बसों में चढ़ कर पानी, चाय, मोमफली बेचना शुरू कर देते हैं। न तो बसों के परिचालक इन्हें रोकते हैं, न ही बस अड्डों पर तैना अधिकारी इन्हें बाहर करते हैं। रोडवेज अधिकारियों के संरक्षण में राजधानी के चारों बस अड्डों …
लखनऊ। जैसे ही बस अड्डे पर बसें रुकती हैं, वैसे ही फेरी वाले इन बसों में चढ़ कर पानी, चाय, मोमफली बेचना शुरू कर देते हैं। न तो बसों के परिचालक इन्हें रोकते हैं, न ही बस अड्डों पर तैना अधिकारी इन्हें बाहर करते हैं। रोडवेज अधिकारियों के संरक्षण में राजधानी के चारों बस अड्डों पर यह धंधा खूब फल फूल रहा है। फेरी वाले बस अड्डे और बसों में मौजूद यात्रियों से निर्धारित शुल्क नहीं बल्कि अपनी मनमानी कीमत अधिकारियों से वसूलते हैं।
इसका फायदा सिर्फ फेरी वाले नहीं बल्कि बस अड्डों पर तैनात अधिकारियों से लेकर मुख्यालय मे मौजूद अधिकारी तक उठा रहे हैं। बस अड्डे से लेकर मुख्यालत तक संचालन से जुड़े अधिकारी इसका फायदा उठा रहे हैं। विभागीय अधिकारियों के अनुसार इन फेरी वालों के खिलाफ अभियान चला कर इन्हें बाहर किया जाएगा।
ऐसे होता है खेल
ठंड के मौसम में सबसे अधिक मांग इस समय बसों में चाय की हो रही है। चाय के केन लेकर फेरी वाले बसों के अंदर पहुंच रहे हैं। बाहर चाय का दाम दस रुपए तो आधी चाय का दाम पांच रुपए है। लेकिन केन वाले बसों में आधी चाय का ही आठ रुपए से लेकर दस रुपए तक वसूल रहे हैं। इसके अलावा बसों में पानी की दस रुपए की बोतल का 12 रुपए, 18 वाली बोतल का 20 रुपए वसूला जा रहा है।
इसके अलावा फेरी वाले बसों में पांच रुपए के बिस्किट के आठ रुपए, पांच रुपए के नमकीन के पैकेट आठ रुपए वसूल रहे हैं। मासिक और पाक्षिक आने वाली पुस्तकें, उपन्यास भी निर्धारित दामों से अधिक में बेचते हुए फेरी वाले आसानी से मिल जाएंगे। इसके अलावा घड़ी, चश्मा, पेचकस और रोजमर्रा में प्रयोग होने वाले सामानों की बिक्री बसों में हो रही है।
मास्क ने बढ़ाई कमाई
कोरोनो के चलते बसों में मास्क भी बेचा जा रहा है। जो मास्क बाहर 20 रुपए से 40 रुपए तक मिल जाते हैं, वहीं बस के अंदर यात्रियों से 60 रुपए से लेकर 80 रुपए तक वसूले जा रहे हैं। बस चलने के बाद यात्री को सौ रुपए का जुर्माने का डर दिखाया जाता है। परिचालक भी मास्क न पहने होने पर मास्क खरीदने का दबाव बनाते हैं। सबसे खास बात यह कि फेरी वाले सामान बेचने के साथ रोडवेज बसों में फ्री सफर सुविधा का लाभ उठातें हैं। चारबाग से सामान बेचने के लिए चढ़ा फेरी वाला यदि पॉलीटेक्निक या सरोजनी नगर में उतरता है तो परिचालक उससे टिकट खरीदने के लिए नहीं कहता।
एक फेरी वाला रोजाना देता है एक हजार रुपए
चारबाग बस अड्डे पर फेरी वालों की संख्या सबसे अधिक है। यहां पर दो दर्जन से अधिक फेरी वाले मौजूद रहते हैं। बस अड्डे पर फेरी वालों को सामान बेचने की छूट तभी मिल पाती है जब वह रोजाना एक हजार रुपए का चढ़ावा चढ़ाते हैं। ऐसे में यहां पर 20 हजार रुपए रोजाना और छह लाख रुपए महीना चढ़ावे का खेल खेला जा रहा है। ऐसा ही खेल राजधानी के आलमबाग, कैसरबाग और चिनहट स्थित अवध बस अड्डों पर भी चल रहा है। फेरी कर सामान बेचने वालों के अनुसार चारों बस अड्डों से हर महीने 30 से 35 लाख रुपए हर महीने कमाए जा रहे हैं।
मैने दो दिन पहले ही चार्ज संभाला है। इस मामले की जानकारी मुझे नहीं है। इसकी जांच कराई जाएगी। बिना लाइसेंस के बस अड्डे पर कोई भी व्यक्ति सामान बेचने की छूट नहीं होगी। ऐसे लोगों को हटाया जाएगा…आरपी सिंह, एमडी, परिवहन निगम
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