रामपुर : मतदाताओं की पहली पसंद रहे जमीन से जुड़े नेता
सुहेल जैदी/अमृत विचार। शाहबाद विधानसभा क्षेत्र के मतदाताओं की पहली पसंद जमीन से जुड़े नेता ही रहे हैं। अब तक के इतिहास पर नजर डालें तो प्रमाण सामने आ जाता है। यहां की जनता ने रुतबा और ताम-झाम दिखाने वाले विधायक को दोबारा लखनऊ पहुंचने का मौका नहीं दिया। इसके साथ ही जिस विधायक ने …
सुहेल जैदी/अमृत विचार। शाहबाद विधानसभा क्षेत्र के मतदाताओं की पहली पसंद जमीन से जुड़े नेता ही रहे हैं। अब तक के इतिहास पर नजर डालें तो प्रमाण सामने आ जाता है। यहां की जनता ने रुतबा और ताम-झाम दिखाने वाले विधायक को दोबारा लखनऊ पहुंचने का मौका नहीं दिया। इसके साथ ही जिस विधायक ने क्षेत्र में जनता के बीच रहते हुए अच्छे कार्य किए, उसे यहां के लोगों ने सिर-आंखों पर बैठा लिया।
राज्य में पहला विधानसभा चुनाव वर्ष 1952 में हुआ। तब 66 शाहबाद-मिलक सीट हुआ करती थी और पहले चुनाव में दो विधायक चुने गए थे। शाहबाद की जनता ने पहली बार हुए चुनाव में कृष्ण सरन आर्या और कल्याण राय को चुनकर लखनऊ भेजा था। वर्ष 1957 में कांग्रेस पार्टी के कल्याण राय को जनता ने विधायक चुना। 1962 में हुए चुनाव में एक बार फिर कांग्रेस के टिकट पर बलदेव सिंह चुने गए। 1967 में बंशीधर को जनता ने विधायक चुना। उनकी सादगी पर यहां की जनता इस कदर फिदा हुई कि सात चुनाव लड़कर पांच बार विधायक चुने गए। वर्ष 1957 और 1962 में हुए चुनाव में बलदेव सिंह आर्या को अपना विधायक चुना।
वर्ष 1999 में स्वामी परमानंद दंडी के निधन के बाद वर्ष 2002 में हुए चुनाव में सपा के टिकट पर काशीराम चुनाव जीते। इसके बाद वर्ष 2007 में भापा के काशीराम ने जीत दर्ज की। वर्ष 2012 में सपा के टिकट पर विजय सिंह विधायक चुने गए। वर्ष 2017 में शाहबाद क्षेत्र से पहली विधायक भाजपा प्रत्याशी राजबाला के सिर पर विधायकी का ताज सजाया। वर्ष 1991 से चुनाव मैदान में उतरे चंद्रपाल सिंह से वर्ष 2017 तक हुए तमाम चुनावों में कांग्रेस, भाजपा और निर्दलीय के तौर पर बंशीधर के पुत्र चंद्रपाल सिंह चुनाव मैदान में डटे रहे।
मौजूदा दौर में राजनीति का ट्रेंड बदला है आज राजनीति समाज सेवा नहीं बल्कि बिजनेस बन गई है। पहले के लोगों में जो अपनत्व था वह आज बहुत कम लोगों में ही देखने को मिलता है। आठ बार विधानसभा चुनाव लड़ने का अनुभव है हर चुनाव में मैं ही मुख्य प्रतिद्वंदी रहा इसी लिए हर तरीके से मुझे ही घेरने के चक्रव्यूह बनाया जाता रहा। -चंद्रपाल सिंह, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष

