सम्पत्ति नहीं अर्जित प्रेम है महत्वपूर्ण : डॉ. शम्भुनाथ
लखनऊ। सूर्य के उत्तरायणी होते ही शुक्रवार को गोस्वामी तुलसीदास रचित मानस के सुंदरकांड का आयोजन किया गया। मकर संक्रांति के मौके पर इंदिरानगर स्थित एक होटल में सुंदरकांड का पाठ हुआ। भक्तिमय माहौल में इस पुनीत अवसर पर रचनाकार प्रेमनारायण मेहरोत्रा की जीवनगाथा पर आधारित मनोरमा श्रीवास्त्व की लिखी पुस्तक ‘एक सूरज एक सफर’ …
लखनऊ। सूर्य के उत्तरायणी होते ही शुक्रवार को गोस्वामी तुलसीदास रचित मानस के सुंदरकांड का आयोजन किया गया। मकर संक्रांति के मौके पर इंदिरानगर स्थित एक होटल में सुंदरकांड का पाठ हुआ। भक्तिमय माहौल में इस पुनीत अवसर पर रचनाकार प्रेमनारायण मेहरोत्रा की जीवनगाथा पर आधारित मनोरमा श्रीवास्त्व की लिखी पुस्तक ‘एक सूरज एक सफर’ का विमोचन किया गया।
विमोचन करते हुए मुख्य अतिथि डॉ. शम्भुनाथ ने कहा कि पुस्तक की संघर्षमय प्रेरक जीवन कथा प्रेरणा देती है कि अनेक विसंगतियों से दूर समुदाय में रचनात्मक जीवन कैसे जिया जा सकता है। पुस्तक पढ़कर यह जाना जा सकता है कि किस प्रकार उन्होंने अपने को चुनौतीपूर्ण हालात से निकाला और किस प्रकार नवसृजन किया।
उन्होंने कहा कि किसी का मूल्यांकन इस बात पर नहीं होना चाहिए कि उसने कितनी संपत्ति अर्जित की, बल्कि इस बात पर हो कि सांसारिक जीवन जीते हुए व्यक्ति ने लोगां के बीच रहकर कितना साथ और प्रेम अर्जित किया है। मुख्य वक्ता के तौर पर प्रो.डा.उषा सिन्हा ने कहा कि सबसे महत्वपूर्ण यह है कि पुस्तक कोई कल्पना नहीं, यथार्थ का संघर्षमय जीवन है जो हर पढ़ने वाले के लिए सबक साबित होगा।
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