सीतापुर विधानसभा सीट पर सपा-भाजपा के बीच इस बार होगी सीधी टक्कर…

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सीतापुर। पहले जनसंघ और भाजपा, फिर सपा का गढ़ रही सीतापुर विधान सभा सीट पर एकबार फिर सपा-भाजपा की सीधी टक्कर होने की उम्मीद है। इस बार सीतापुर सदर सीट को लेकर सपा, भाजपा के बीच अपना गढ़ बनाने और बचाने की चुनौती है। 2017 में भाजपा के खाते में गई थी ये सीट इस …

सीतापुर। पहले जनसंघ और भाजपा, फिर सपा का गढ़ रही सीतापुर विधान सभा सीट पर एकबार फिर सपा-भाजपा की सीधी टक्कर होने की उम्मीद है। इस बार सीतापुर सदर सीट को लेकर सपा, भाजपा के बीच अपना गढ़ बनाने और बचाने की चुनौती है।

2017 में भाजपा के खाते में गई थी ये सीट

इस सीट से लगातार छह चुनाव जीतने का रिकॉर्ड पूर्वमंत्री स्वर्गीय राजेंद्र गुप्त का है। वह एक बार जनता पार्टी और पांच बार भाजपा के टिकट पर चुनाव जीते थे। उनके राजनीतिक शार्गिद कहे जाने वाले राधेश्याम जायसवाल ने वर्ष 1996 के विधान सभा चुनाव में अपने उस्ताद को ही पटखनी दे दी थी। उसके बाद से राधेश्याम जायसवाल लगातार चार बार सपा के टिकट से विधायक चुने जाते रहे। लेकिन 2017 के विधान सभा चुनाव में सपा का यह किला ढह गया और यह सीट फिर भाजपा के खाते में चली गई थी।

चार बार के विधायक राधेश्याम जायसवाल चुनाव हार गए और भाजपा के राकेश राठौर विधायक बन गए थे। जिला मुख्यालय की इस प्रतिष्ठापूर्ण सीट पर समाजवादी पार्टी के सामने जहां अपना दुर्ग वापस पाने की चुनौती है, वहीं भाजपा को गढ़ बचाए रखने की ख्वाहिश है। हालांकि सपा-भाजपा ने अपने उम्मीदवारों की घोषणा अभी तक नहीं की है। कांग्रेस ने लड़की हूं-लड़ सकती हूं कम्पेन के तहत वरिष्ठ कांग्रेसी नेता शमीना शफीक को प्रत्याशी बनाया है। बसपा को अभी तक को उम्मीदवार ढूंढे नहीं मिला।

न ही अभी तक बसपा से लड़ने के दावेदार मैदान में नजर आ रहे हैं। सीधी टक्कर सपा-भाजपा के बीच होने की प्रबल उम्मीद है। बस इंतजार है उम्मीदवारों के नाम सामने आने का। उसके बाद ही तय होगा कि भाजपा अपना गढ़ बचा पाती है, या सपा फिर से सीतापुर विधान सभा सीट को अपना गढ़ बना लेती है।

आचार्य नरेंद्र देव रहे संविधान सभा के सदस्य

स्वतंत्रता प्राप्ति और फिर भारतीय संविधान के लागू होने के बाद देश में सबसे पहले आम चुनाव 1952 में हुए। जानकार बताते हैं कि ब्रिटिश हुकूमत के दौरान विधान सभा को संविधान सभा के नाम से जाना जाता था। अंतराष्ट्रीय विचारक एवं शिक्षाविद् आचार्य नरेंद्र देव 1937 और 1946 में सीतापुर सीट से संविधान सभा के सदस्य चुने गए थे।

अब तक जीते विधायक

  • 1952 – कृष्णा चंद्र गुप्त (कृष्णा बाबू) – कांग्रेस
  • 1957 – टम्ब्रेश्वर प्रसाद (बच्चा बाबू) – जनसंघ
  • 1962 – टम्ब्रेश्वर प्रसाद (बच्चा बाबू) – जनसंघ
  • 1967 – टम्ब्रेश्वर प्रसाद (बच्चा बाबू) – जनसंघ
  • 1969 – डॉ. श्याम किशोर – कांग्रेस
  • 1974 – डॉ. श्याम किशोर – कांग्रेस
  • 1977 – राजेंद्र कुमार गुप्त – जनता पार्टी
  • 1980 – राजेंद्र कुमार गुप्त – भारतीय जनता पार्टी
  • 1985 – राजेंद्र कुमार गुप्त – भारतीय जनता पार्टी
  • 1989 – राजेंद्र कुमार गुप्त – भारतीय जनता पार्टी
  • 1991 – राजेंद्र कुमार गुप्त – भारतीय जनता पार्टी
  • 1993 – राजेंद्र कुमार गुप्त – भारतीय जनता पार्टी
  • 1996 – राधेश्याम जायसवाल – समाजवादी पार्टी
  • 2002 – राधेश्याम जायसवाल – समाजवादी पार्टी
  • 2007 – राधेश्याम जायसवाल – समाजवादी पार्टी
  • 20012 – राधेश्याम जायसवाल – समाजवादी पार्टी

जातिगत मतदाता प्रतिशत लगभग में

ब्राह्मण – 11.6, क्षत्रिय – 8, वैश्य – 1.8, कायस्थ – 1, पिछड़ा वर्ग – 29.1, दलित – 29.6, मुस्लिम – 20, अन्य – 1.3

विस चुनाव 2017 का परिणाम

  • उम्मीदवार        पार्टी     स्थान     वोट
  • राकेश राठौर,     भाजपा,   विजेता-    98850
  • राधेश्याम जायसवाल, सपा, दूसरा स्थान- 74011
  • अशफाक खान    बसपा, तीसरा स्थान-  52181

ये हैं खास मुद्दे

बंद औद्योगिक इकाईयां, ड्रेनेज सिस्टम का अभाव, जल भराव की समस्या, उच्च शिक्षा का अभाव, रोजगार के साधनाें की कमी, नवविकसित कालोनियों का विकास, शहर में पार्किंग व्यवस्था का न होना, सड़को का चौड़ीकरण न होना आदि।

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