मुरादाबाद : बाइपास पर कालोनियां बसाएगा एमडीए, संभल, रामपुर व दिल्ली रोड पर चिह्नित की जा रही जमीन
मुरादाबाद, अमृत विचार। अगर आप नया घर बनाने जा रहे हैं तो यह खबर आप के लिए है। जी हां, मुरादाबाद विकास प्राधिकरण जल्द ही शहर के सभी बाइपास के पास ही नई कालोनियां बसाने जा रहा है। इसके लिए सभी बाइपास के पास 50-50 एकड़ जगह चिह्नित की जा रही है। जगह चिह्नित होने …
मुरादाबाद, अमृत विचार। अगर आप नया घर बनाने जा रहे हैं तो यह खबर आप के लिए है। जी हां, मुरादाबाद विकास प्राधिकरण जल्द ही शहर के सभी बाइपास के पास ही नई कालोनियां बसाने जा रहा है। इसके लिए सभी बाइपास के पास 50-50 एकड़ जगह चिह्नित की जा रही है। जगह चिह्नित होने के बाद एमडीए किसानों से जमीन खरीदकर नई कालोनी बसाने के लिए काम शुरू करेगा।
मुरादाबाद विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष मधुसूदन हुल्गी द्वारा लगातार जनता के हितों के लिए प्लानिंग की जा रही है। जिसके चलते जल्द ही मुरादाबाद विकास प्राधिकरण सम्भल रोड, दिल्ली रोड व रामपुर रोड बाइपास पर कालोनियां बसाने जा रहा है। इसके लिए जमीन की तलाश की जा रही है। प्राधिकरण सभी बाइपास पर 50-50 एकड़ जमीन चिह्नित करेगा। जिस पर शहरवासियों के लिए नई कालोनियां बनेगी। नई कालोनियां बनने से एक तरफ जहां शहरवासियों को सहुलियत होगी तो वहीं मुरादाबाद विकास प्राधिकरण की आमदनी भी बढ़ेगी।
एमडीए उपाध्यक्ष ने कहा कि प्राधिकरण बड़ी योजनाओं के बजाए छोटी कालोनियां बसाने के पक्ष में है। जिससे जरूरतमंदों को घर मिल सके। छोटी कालोनियां बसाने के लिए एमडीए ने सभी मार्गों पर 50-50 एकड़ जमीन खरीदने की तैयारी है। वहीं मुरादाबाद विकास प्राधिकरण द्वारा काजीपुरा मेें भी नया मुरादाबाद की तर्ज पर कालोनी बसाने का योजना बनाई जा रही है। जिसके लिए एमडीए 320 करोड़ की स्वीकृति दे दी है।
अब अलग-अगल फ्लोर के हिसाब किराए लेगा एमडीए
मुरादाबाद विकास प्राधिकरण का कार्यालय नया मुरादाबाद में शिफ्ट होने के बाद खाली हुए पुराने कार्यालय को कोई किराएदार नहीं मिल रहा है। जिसमें एमडीए की शर्तें बाधा बन रही थी, लेकिन अब एमडीए ने भवन को अलग-अलग फ्लोर के हिसाब से किराए पर देने की योजना बनाई है। नया मुरादाबाद में शिफ्ट हुआ एमडीए कार्यालय को कई महीने बीत चुके है। लेकिन अभी तक एमडीए का पुराना कार्यालय किराए पर नहीं उठ पाया है। एमडीए अपने पुराने कार्यालय के भवन को एक साथ 21 लाख रुपये महीने पर किराए पर देना चाहता था। लेकिन इतनी मोटी रकम में किसी ने भी पुराने भवन को किराए पर नहीं लिया। जिसके चलते एमडीए ने पुराने भवन को अलग-अलग फ्लोर के हिसाब से किराए पर देने की बात कही है। जिसमें सरकारी व निजी कंपनी किराए पर ले सकती है।
