बूस्टर पर सवाल
तर्क दिए जा रहे हैं कि कोरोना का नया स्वरुप ओमिक्रान काफी हल्का है और इसने कोरोना वायरस से उत्पन्न खतरे को समाप्त कर दिया है। जबकि विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने बुधवार को चेतावनी दी है कि कोरोना वायरस की महामारी अभी कहीं खत्म नहीं हुई है और ओमिक्रान के बाद भी इसके नए-नए …
तर्क दिए जा रहे हैं कि कोरोना का नया स्वरुप ओमिक्रान काफी हल्का है और इसने कोरोना वायरस से उत्पन्न खतरे को समाप्त कर दिया है। जबकि विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने बुधवार को चेतावनी दी है कि कोरोना वायरस की महामारी अभी कहीं खत्म नहीं हुई है और ओमिक्रान के बाद भी इसके नए-नए स्वरुप सामने आने की संभावना है।
एक रिपोर्ट के अनुसार यूरोपीय देशों में मंगलवार को ओमिक्रान के रिकार्ड मामले दर्ज किए गए। दुनिया में पिछले सप्ताह ओमिक्रान के 1.8 करोड़ नए मामले सामने आए थे। वहीं भारत में बुधवार को एक दिन में कोविड-19 के नए मामलों की संख्या बढ़ोतरी के साथ दो लाख 82 हजार से अधिक दर्ज की गई। साथ ही आईआईटी कानपुर के वैज्ञानिक ने कहा है कि भारत में महामारी की तीसरी लहर 23 जनवरी को चरम पर पहुंच सकती है।
इस सबके बीच सरकार का पूरा प्रयास अधिकतम आबादी का टीकाकरण कराने का है। हालांकि विशेषज्ञ यह कह चुके हैं कि वैक्सीन कोरोना संक्रमण से नहीं बचाता बल्कि वायरस के खिलाफ प्रतिरोधक क्षमता का विकास करता है। इस बीच बूस्टर डोज का भी इस्तेमाल कई देशों में शुरू हो गया है।
भारत में फिलहाल फ्रंट लाइन वर्कर्स, हेल्थ वर्कर्स और बुजुर्गों को डॉक्टरी सलाह से बूस्टर डोज की अनुमति मिली है। इस बीच बूस्टर डोज किसे लगाना चाहिए यह भी एक बड़ा सवाल बना हुआ है। इसका जवाब विश्व स्वास्थ्य संगठन ने दिया है। संगठन की प्रमुख वैज्ञानिक सौम्या स्वामीनाथन ने कहा कि’ इस बात का कोई सबूत नहीं है’ कि स्वस्थ बच्चों और किशोरों को कोरोना वायरस के खिलाफ बूस्टर डोज की जरूरत है। डब्ल्यूएचओ का यह बयान उन तमाम देशों में चलाए जा रहे वैक्सीनेशन अभियान को चुनौती देता है, जो कोरोना वायरस के खिलाफ बूस्टर डोज का इस्तेमाल कर रहे हैं।
ध्यान रखना होगा कि वैश्विक महामारी का रूप लेने वाले ऐसे वायरस अक्सर अंत में पारिस्थितिकी तंत्र का हिस्सा बन जाते हैं। यह हमारी सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक व्यवस्था का विघटन है, जो त्रासदी का कारण बना है। भारत में कोरोना संक्रमण के मामले अमेरिका के बाद दूसरे नंबर पर हैं तो नागरिकों से सजग-सतर्क व्यवहार की उम्मीद है। हम न भूलें कि इतने बड़े अभियान के बाद करोड़ों लोग ऐसे भी हैं, जो आज भी टीका लगवाने से बच रहे हैं।
तीसरी लहर के आंकड़े बता रहे हैं कि अस्पताल में भर्ती होने वालों व मरने वालों में वे ही लोग ज्यादा हैं, जिन्होंने टीका नहीं लगवाया। बहरहाल, जो टीकाकरण से रह गए हैं, उन्हें टीका लगवाना चाहिए।
