मुरादाबाद : यूसुफ शहर, जिया कुंदरकी व देहात से नासिर को टिकट

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मुरादाबाद । लंबी माथा-पच्ची के बाद गुरुवार की शाम समाजवादी पार्टी ने मुरादाबाद शहर से पूर्व विधायक हाजी यूसुफ अंसारी व कुंदरकी विधान सभा क्षेत्र से जियाउर्रहमान बर्क को प्रत्याशी घोषित कर दिया। जबकि, देहात विधान सभा से हाजी नासिर कुरैशी की उम्मीदवारी पर मुहर लगा दी। पार्टी के उम्मीदवारों की घोषणा दो दिनों से …

मुरादाबाद । लंबी माथा-पच्ची के बाद गुरुवार की शाम समाजवादी पार्टी ने मुरादाबाद शहर से पूर्व विधायक हाजी यूसुफ अंसारी व कुंदरकी विधान सभा क्षेत्र से जियाउर्रहमान बर्क को प्रत्याशी घोषित कर दिया। जबकि, देहात विधान सभा से हाजी नासिर कुरैशी की उम्मीदवारी पर मुहर लगा दी। पार्टी के उम्मीदवारों की घोषणा दो दिनों से चर्चा में थी। प्रत्याशियों की घोषणा नहीं हो पा रही थी। जिला स्तर पर संगठन के मुह सिल गए थे। विधानसभा ठाकुरद्वारा, बिलारी, कुंदरकी व देहात समेत सपा के चार विधायक हैं। जबकि ठाकुरद्वारा विधायक नवाब जान खां व बिलारी विधायक फहीम इरफान व कांठ से कमाल अख्तर प्रत्याशी घोषित कर दिये गए थे, जबकि इन तीनों को सिंबल गुरुवार को दिए गए।

सपा ने अपने दो विधायकों के टिकट काट दिए हैं। जिसमें देहात से हाजी इकराम कुरैशी व कुंदरकी से हाजी रिजवान शामिल हैं। पार्टी हाईकमान ने कुंदरकी से संभल से सांसद शफीकुर्रहमान बर्क के पोते जियाउर्रहमान बर्क को प्रत्याशी बनाया है तो वहीं देहात विधान सभा से मीट करोबारी हाजी नासिर कुरैशी को प्रत्याशी बनाया है। जबकि शहर विधानसभा सीट से पूर्व में विधायक रहे हाजी यूसुफ अंसारी पर भरोसा जताते हुए उन्हे तीसरी बार प्रत्याशी बनाया है। देर रात तीनों प्रत्याशियों के समर्थकों ने खुशी का इजहार करके मिठाइयां बांटी।

हाजी यूसुफ अंसारी
कांग्रेस से अपनी राजनीति की शुरुआत करने वाले हाजी यूसुफ अंसारी ने सबसे पहला चुनाव कांग्रेस के टिकट पर मेयर का चुनाव लड़ा और हार गए। 2012 में हाजी यूसुफ अंसारी ने सपा के टिकट से नगर विधायक का चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। 2017 में हाजी यूसुफ अंसारी भाजपा प्रत्याशी रितेश गुप्ता से कम अंतर के हार गए थे। इसके बाद 2017 में ही हुए मेयर के चुनाव में हाजी यूसुफ अंसारी सपा के टिकट पर चुनाव लड़े। लेकिन, वह हार गए और तीसरे नंबर पर रहे।

हाजी नासिर कुरैशी
बड़े मीट कारोबारी हाजी नासिर ने पहली बार 2012 में बसपा से देहात विधानसभा से चुनाव लड़ा और हार गए। इसके बाद उन्होंने 2017 में कांठ विधान सभा से बसपा से ही चुनाव लड़ा, लेकिन जीत हासिल नहीं कर पाए। 2017 में हाजी नासिर सपा में शामिल हो गए। 2019 में हुए लोकसभा चुनाव में सपा ने हाजी नासिर कुरैशी को अपना प्रत्याशी बनाया, लेकिन पार्टी में विरोध के कारण थोड़ी देर बाद उनसे टिकट वापस लेकर डॉ. एसटी हसन को दिया गया। अब सपा हाईकमान ने मौजूदा विधायक इकराम कुरैशी का टिकट काटकर हाजी नासिर को मौका दिया है।

जियाउर्रहमान बर्क
संभल के सांसद शफीकुर्रहमान बर्क अपनी राजनीतिक विरासत पोते जियाउर्रहमान को सौंपना चाहते हैं। वह जियाउर्रहमान को टिकट दिलाने के लिए लंबे समय से कोशिश कर रहे थे। 2017 में भी संभल से उन्होंने प्रयास किया था। लेकिन, टिकट नहीं मिला था। तब उन्होंने असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम के टिकट पर संभल से चुनाव लड़ा और दूसरे स्थान पर रहे थे। इस बार उन्हें समाजवादी पार्टी ने विधानसभा क्षेत्र से विधायक रिजवान का टिकट काटकर अपना प्रत्याशी बनाया है।

कांठ से सपा द्वारा कमाल अख्तर को उम्मीदवार घोषित किए जाने पर विरोध जताया

कांठ से पूर्व कैबिनेट मंत्री कमाल अख्तर को सपा द्वारा उम्मीदवार घोषित किए जाने पर लोगों ने बाहरी प्रत्याशी बताकर विरोध जताया है। इस दौरान उन्होंने  बाहरी उम्मीदवार को बदलने की सपा के राष्टीय अध्यक्ष से की मांग।

 

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