मुरादाबाद : जीजा की हत्या में दो सालों को आजीवन कारावास
मुरादाबाद, अमृत विचार। छह वर्ष पूर्व संभल जनपद के चंदौसी थानाक्षेत्र के गांव कैथल निवासी छत्रपाल की हत्या उसकी पत्नी के दो भाइयों ने की थी। एडीजे ज्ञानेंद्र सिंह यादव ने हत्या में दोषी मानते हुए मृतक के दोनों सालों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। इसके अलावा अदालत ने दोनों पर 10-10 हजार रुपए …
मुरादाबाद, अमृत विचार। छह वर्ष पूर्व संभल जनपद के चंदौसी थानाक्षेत्र के गांव कैथल निवासी छत्रपाल की हत्या उसकी पत्नी के दो भाइयों ने की थी। एडीजे ज्ञानेंद्र सिंह यादव ने हत्या में दोषी मानते हुए मृतक के दोनों सालों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। इसके अलावा अदालत ने दोनों पर 10-10 हजार रुपए का जुर्माना भी ठोंका है।
चंदौसी कोतवाली क्षेत्र के गांव कैथल निवासी छत्रपाल की छह साल पूर्व जलाकर हत्या कर दी गई थी।
मृतक के भाई नेत्रपाल पुत्र मुन्ना लाल निवासी खतैता जिला बरेली ने मुकदमा दर्ज कराया था। वादी ने रिपोर्ट में कहा था कि छत्रपाल की शादी वर्ष 2013 में कैथल निवासी प्रीति के साथ हुई थी। शादी के बाद से ही दंपति में विवाद रहता था। जिसके बाद प्रीति अपने मायके चली जाती थी। तेरह जनवरी 2015 को भी प्रीति अपने पिता के घर कैथल गई हुई थी। छत्रपाल उसे बुलाने ससुराल गया था। वहां प्रीति के भाई श्योराज और बदन सिंह ने अपनी बहन को भेजने से पहले शादी में दिए गए आभूषण मांगने लगे।
इसी को लेकर छत्रपाल की अपने सालों से कहासुनी हो गई। इस दौरान श्योराज व बदन सिंह ने छत्रपाल के ऊपर मिट्टी का तेल छिड़क कर आग लगा दी। गंभीर रूप से झुलसे छत्रपाल को मुरादाबाद जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। यहां मजिस्ट्रेट ने उसके मृत्यु पूर्व बयान दर्ज कराए। छत्रपाल ने मृत्युपूर्व बयानों में अपने सालों पर मिट्टी का तेल छिड़क कर आग लगाने की बात बताई। केस की सुनवाई अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश ज्ञानेंद्र सिंह यादव की अदालत में हुई।
बचाव पक्ष के अधिवक्ता का कहना था कि आरोपियों का घटना से कोई लेना-देना नहीं है। उन्हें झूठा फंसाया गया है। उन्होंने छत्रपाल को नहीं जलाया। सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता महेंद्र सिंह कश्यप ने कहा कि छत्रपाल ने मजिस्ट्रेट के समक्ष मृत्यु पूर्व बयान दर्ज कराए थे। जिसमें आरोपियों के द्वारा की घटना की पुष्टि होती है। दोनों पक्षों को सुनने और आरोप पत्र में पेश किए गए साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद विद्वान न्यायाधीश ने श्योराज व बदन सिंह को छत्रपाल की हत्या का दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। इसके साथ ही दोनों पर 10-10 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया गया।
