उकसावे की कार्रवाई

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Edited By Amrit Vichar
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भारत के विरुद्ध चीन लगातार उकसावे की कार्रवाई कर रहा है। अब चीन ने अरुणाचल प्रदेश से एक किशोर का अपहरण कर नया विवाद खड़ा कर दिया है। चीन की पीपुल्सन लिब्रेशन आर्मी (पीएलए) द्वारा अगवा किया गया किशोर अभी भी चीनी सेना के कब्जे में है। घटना के दो दिन बाद शुक्रवार को अपर …

भारत के विरुद्ध चीन लगातार उकसावे की कार्रवाई कर रहा है। अब चीन ने अरुणाचल प्रदेश से एक किशोर का अपहरण कर नया विवाद खड़ा कर दिया है। चीन की पीपुल्सन लिब्रेशन आर्मी (पीएलए) द्वारा अगवा किया गया किशोर अभी भी चीनी सेना के कब्जे में है। घटना के दो दिन बाद शुक्रवार को अपर सियांग जिले के अधिकारियों ने कहा है कि वे अब लड़के की वापसी का इंतजार कर रहे हैं।

जबकि चीन के विदेश मंत्रालय ने घटना की जानकारी नहीं होने की बात कही है और कहा है पीएलए सीमा की निगरानी करती है एवं किसी भी “अवैध प्रवेश एवं निकास” के विरूद्ध कार्रवाई करती है। पीएलए ने सियांग क्षेत्र में बिशिंग गांव के समीप से किशोर का अपहरण किया। बिशिंग गांव भारत-चीन सीमा के समीप अंतिम भारतीय गांव है।

यह घटना ऐसे समय में हुई है, जब भारतीय सेना का अप्रैल 2020 से पूर्वी लद्दाख में पीएलए के साथ गतिरोध चल रहा है। घटना से साबित हो गया है कि भारतीय क्षेत्र में चीनी सैनिकों की घुसपैठ जारी है। सवाल यह भी है कि कड़ी चौकसी के बावजूद चीनी सैनिक भारतीय सीमा में घुस आने में कैसे कामयाब हो जाते हैं? जबकि चीन इससे पहले भी ऐसी हरकत कर चुका है।

चीन की पीएलए ने सितंबर 2020 में अरुणाचल प्रदेश के ऊपरी सुबनसिरी जिले से पांच युवकों का अपहरण कर लिया था, जिन्हें एक सप्ताह बाद छोड़ा गया था।
भारत और चीन के बीच इस वक्त गंभीर गतिरोध का दौर चल रहा है। काफी समय से चीन सीमाई इलाकों में सैन्य गतिविधियां बढ़ा कर भारत पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है। ताकि उकसावे में आकर भारत कोई कदम उठाए और उसे भारत के खिलाफ मोर्चा खोलने का अवसर मिले। वो भूटान के रास्ते भी भारत को घेरने में लगा है।

भारत लद्दाख से अरुणाचल प्रदेश तक चीन के साथ 3,400 किलोमीटर लंबी वास्तविक नियंत्रण रेखा साझा करता है। गलवान घाटी की घटना के बाद उपजे विवाद को सुलझाने के लिए चौदह दौर की बैठक हो चुकी हैं, पर चीन के अड़ियल रवैये से कोई नतीजा नहीं निकल पा रहा। जबकि चीन को समझना चाहिए कि वक्त विवाद बढ़ाने का नहीं, बल्कि लंबित मुद्दों को शांति के साथ निपटाने का है।

सीमा पर सैन्य गतिविधियां बढ़ाने के बजाय चीन की प्राथमिकता विवादित स्थलों से अपने सैनिकों को हटाने की होनी चाहिए। जानबूझ कर वह जिस रास्ते पर बढ़ रहा है, वह टकराव को और बढ़ाने वाला ही साबित होगा।