बरेली: पर्यावरण के मुद्दे पर राजनीतिक पार्टियों की खामोशी सही नहीं

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Edited By Amrit Vichar
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बरेली, अमृत विचार। शहर के कई पॉश इलाकों को जोड़ने वाले स्टेडियम रोड पर विकास नाम पर पेड़ों पर आरी चला दी गई। स्मार्ट सिटी के तहत चौड़ीकरण और नाला निर्माण के चलते इस सड़क से काफी संख्या में पेड़ काट दिए गए तो कई पेड़ों का ट्रांसलोकेशन भी हुआ। एक तरफ पेड़ों पर सरकारी …

बरेली, अमृत विचार। शहर के कई पॉश इलाकों को जोड़ने वाले स्टेडियम रोड पर विकास नाम पर पेड़ों पर आरी चला दी गई। स्मार्ट सिटी के तहत चौड़ीकरण और नाला निर्माण के चलते इस सड़क से काफी संख्या में पेड़ काट दिए गए तो कई पेड़ों का ट्रांसलोकेशन भी हुआ। एक तरफ पेड़ों पर सरकारी कुल्हाड़ी चल रही थी तो दूसरी तरफ पर्यावरण की दुर्गति होता देख स्थानीय लोगों के दिलों पर आरी।

कई लोग तो इनमें ऐसे भी थे जिन्होने छांव पाने के लिए सालों इन पेड़ों को अपने हाथ से सींचा था। चुनावी सीजन है लेकिन कोई भी पार्टी पर्यावरण के मुद्दे पर बात नहीं कर रही है। राजनीतिक पार्टियों की इस उदासीनता से स्थानीय लोग भी खफा हैं।ईंटपजाया चौराहा से डेलापीर को जाने वाली इस सड़क पर करीब 100 पेड़ थे, जिनमें से 58 पेड़ों को वन विभाग द्वारा बीते दिनों ट्रांसलोकेट कर दिया गया।

जिन पेड़ों को ट्रांसलोकेट नहीं किया जा सकता था उनको काटा गया है। वन विभाग के अधिकारियों की माने तो उन्होंने केवल पेड़ ट्रांसलोकेट किए हैं। पेड़ काटने का काम नगर निगम द्वारा किया जा रहा है। करीब 28 पेड़ इस सड़क से काटे गए हैं। कई घरों और दुकानों के आगे भी पेड़ लगे हुए थे। गर्मियों में जब धूप सताती थी तो दुकान पर आने वाले ग्राहक भी पेड़ की छांव में बैठ जाया करते थे मगर अब यह छांव नहीं मिलेगी।

तो वहीं रास्ता चलते राहगीरों के लिए पेड़ बड़ा सहारा थे। न सिर्फ गर्मियों बल्कि सर्दियों में भी पेड़ों के नहीं होने से परेशानी हो रही है। पहले ठंड में पेड़ों के सहारे सर्द हवाएं रुक जाती थीं लेकिन अब दुकानों और मकानों में सीधे तीर की तरह वार करती हैं। लोगों का कहना है कि विकास पर्यावरण की कीमत चुकाकर नहीं किया जा सकता। ऐसे तो सभी पेड़ खत्म हो जाएंगे।

राजनीतिक पार्टियों की खामोशी बता रही है कि उन्हे जमीनी मुद्दों से कोई सरोकार नहीं। शहर के विकास को तो नकारा नहीं जा सकता, लेकिन क्या पेड़ काटने के सिवा कोई दूसरा विकल्प नहीं था।

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