लखनऊ: जमीन पर उतरकर गायब हो गई ‘अन्नपूर्णा योजना’, पांच रुपए में मिलना था भोजन…

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लखनऊ। तमिलनाडु की ‘अम्मा’ जयललिता से प्रेरणा लेकर प्रदेश के मजदूरों को तीन रुपये में नाश्ता व पांच रुपये में भरपेट भोजन देने की राज्य सरकार की योजना जमीन से गायब हो गई है। राजधानी में अफसर खुद स्वीकार करते हैं कि योजना ‘फलाप’ हो चुकी है। अयोध्या में तो जिम्मेदार अफसर इस योजना के …

लखनऊ। तमिलनाडु की ‘अम्मा’ जयललिता से प्रेरणा लेकर प्रदेश के मजदूरों को तीन रुपये में नाश्ता व पांच रुपये में भरपेट भोजन देने की राज्य सरकार की योजना जमीन से गायब हो गई है। राजधानी में अफसर खुद स्वीकार करते हैं कि योजना ‘फलाप’ हो चुकी है। अयोध्या में तो जिम्मेदार अफसर इस योजना के बारे में बता ही नहीं पा रहे हैं।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ओर से शुरू की गई इस योजना को लेकर राजधानी लखनऊ समेत अन्य जिलों में पड़ताल की गई, तो योजना की हकीकत सामने आ गई। लखनऊ के उप श्रमायुक्त सरजू राम ने साफ कहा कि योजना शुरू हुई थी, इसे लागू भी किया गया था, पर योजना चल नहीं पाई। अब योजना बंद चल रही है। कानपुर के अपर श्रमायुक्त एसपी शुक्ल ने भी पूछे जाने पर कहा कि यह योजना अब बंद चल रही है।

अयोध्या में जिला प्रशासन के अफसरों को योजना की नहीं है कोई जानकारी

अयोध्या में पड़ताल में पाया गया कि इस योजना को लेकर जिला प्रशासन के अफसरों तक को कोई जानकारी नहीं है। जिला कार्यक्रम अधिकारी से लेकर नगर निगम के अपर आयुक्त और श्रम विभाग के अफसर तक योजना के बारे में ‘एबीसीडी’ तक नहीं बता पा रहे हैं।

नगर निगमों और नगर पालिका क्षेत्रों में संचालित होने वाली इस योजना की घोषणा मुख्यमंत्री ने वर्ष 2020 में की थी, लेकिन इसका प्रारूप 2021 में बनकर तैयार हुआ। योजना के तहत मजदूरों को न्यूनतम दर पर भोजन उपलब्ध कराना था।

सरकार की ओर से तैयार प्रारूप के अनुसार गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध कराने के लिए प्रदेश सरकार की ओर से करीब 150 करोड़ रुपए का बजट भी निर्धारित किया गया था। प्रारूप के अनुसार करीब 275 से अधिक भोजनालय राज्य के प्रमुख शहरों में खोले जाने थे। हर जिलों में पंजीकृत मजदूरों की संख्या निर्धारित की गई थी।

इस सिलसिले में उत्तर प्रदेश भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड की उप सचिव किरन मिश्रा ने कहा कि शुरू में यह योजना शुरू हुई थी, लेकिन यह चल नहीं सकी। अब यह योजना बंद चल रही है।

मुंह खोलने को तैयार नहीं हुए अधिकारी

अयोध्या में जब श्रम विभाग से जानकारी हासिल करने का प्रयास किया गया तो जिम्मेदार अधिकारी मुंह खोलने को तैयार नहीं हुए। कर्मचारियों ने बताया कि सम्बन्धित योजना को लेकर अभी यहां श्रमिकों का कोई पंजीकरण नहीं है। अन्य योजनाओं में तो श्रमिक पंजीकृत है लेकिन अन्नपूर्णा योजना में नहीं।

तीन रुपये में नाश्ता और 5 रुपये में था दोपहर का भोजन

सरकार की ओर से बाकायदा इसके लिए तैयार प्रारूप में स्पष्ट उल्लेख था कि अन्नपूर्णा योजना में भोजनालय के तहत उत्तर भारतीय से क्षेत्रीय आधारित खाद्य पदार्थ नाश्ते और दोपहर के भोजन के लिए लाभार्थियों को पेश किए जाएंगे। इस योजना के अंतर्गत तीन रुपये में नाश्ता और पांच रुपए में दोपहर के भोजन की घोषणा की गई थी। इसके लिए सरकार की ओर से अन्नपूर्णा पोर्टल भी लांच किया गया था।

जब इस पोर्टल को खंगाला गया तो योजना की घोषणा और योजना का प्रारूप और निर्धारित मेन्यू ही अपलोड दिखाई दे रहा है। पोर्टल में अभी एक साल गुजर जाने के बाद भी यह अपडेट नहीं मिला कि अब तक अन्नपूर्णा योजना के अंतर्गत कितने लोगों को लाभ मिल चुका है और वर्तमान में चयनित शहरों में संचालित इस योजना में क्या प्रगति है।

जानें क्या है अन्नपूर्णा योजना

इस योजना के तहत सरकार गरीब मजदूरों को 3 रुपये में नाश्ता व 5 रुपये में खाना मुहैया कराना था। योजना को राज्य के सभी 14 नगर निगमों में पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप में शुरू किया जाना था। जिसका कुल खर्च 153.59 करोड़ रुपये बजट में निर्धारित किया गया था।

खर्च सिर्फ 13 रुपये

योजना के तहत नाश्ते, लंच और डिनर करने में कुल 13 रुपये खर्च होने थे। जबकि कुल खर्च करीब 48 रुपये तय किया गया था, जिसमें से 13 रुपये नाश्ता करने वाला भरता। बाकी 35 रुपये सरकार और कैंटीन चलाने वाले मिलकर चुकाते।

यह बनाया गया था मेन्यू

सरकार इस योजना के तहत नाश्ते में नमकीन दलिया और चाय, चना और चाय, दो कचौड़ी, खस्ता, समोसा, चटनी और चाय,दो इडली, सांभर और चाय, ब्रेड पकोड़ा, बंद मक्खन और चाय। इसके साथ ही पोहा और चाय में से कुछ एक। लंच और डिनर में 6 रोटी, मौसमी सब्जी या अरहर दाल-चावल के साथ प्याज/अचार, वेज बिरयानी लंच या डिनर में दिए जाने का प्रावधान था। इसे उत्तर प्रदेश भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड को लागू कराना था।

इन जिलों में लागू होनी थी योजना

हापुड़, मुरादाबाद, बरेली, मेरठ, झांसी, अलीगढ़, इलाहाबाद, वाराणसी, गोरखपुर, गौतमबुद्धनगर, गाजियाबाद, जौनपुर, बदायूं, बुलंदशहर, शाहजहांपुर, अयोध्या, चित्रकूट, गोंडा, महोबा, बांदा, बलरामपुर, इटावा, आजमगढ़।

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