लखनऊ: बीकेटी विधानसभा सीट किसके सिर पर बांधेगी जीत का सेहरा, जानिए…

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लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव का दौर चल रहा है। लखनऊ की बख्शी का तालाब (बीकेटी) विधानसभा क्षेत्र में किसी भी प्रत्याशी के लिए जीतना बड़ा कठिन होता हैं। इस सीट का एक बड़ा हिस्सा साल 2007 से पहले महोना विधानसभा क्षेत्र में आता था। इस इलाके से लगातार ठाकुर, ब्राह्मण और यादव वर्ग के …

लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव का दौर चल रहा है। लखनऊ की बख्शी का तालाब (बीकेटी) विधानसभा क्षेत्र में किसी भी प्रत्याशी के लिए जीतना बड़ा कठिन होता हैं। इस सीट का एक बड़ा हिस्सा साल 2007 से पहले महोना विधानसभा क्षेत्र में आता था।

इस इलाके से लगातार ठाकुर, ब्राह्मण और यादव वर्ग के प्रत्याशी जीतते आए हैं। इलाके में यूं तो कई वर्गों के मतदाता बड़ी संख्या में हैं, लेकिन कम संख्या वाले ब्राह्मण और मुस्लिम वर्ग ज्यादा निर्णायक साबित होते रहे हैं। हालांकि इस बार जीत का सेहरा किसके सिर पर होगा ये अभी कह पाना मुश्किल होगा।

बीकेटी कहने को तो शहरी क्षेत्र लेकिन समस्याएं देहात वाली…

स्थानीय निवासियों के मुताबिक मौजूदा विधायक से जो उम्मीदे थी वह पूरी नहीं हो सकी, क्योकि जब सत्ता में अविनाश त्रिवेदी आये थे तब उम्मीदें थी ​यहां एक उच्च शिक्षा के लिए महाविद्यालय और चिकित्सा व्यवस्थ के लिए सरकारी अस्पताल की व्यवस्था हो जायेगी, लेकिन यह क्षेत्र कहने को शहरी है लेकिन समस्याएं जैसी की तैसी बनी हुई है। बताया जा रहा आज भी सरकारी इलाज के​ लिए 20 से 25 किलोमीटर का सफर तय करना पड़ता है। उच्च शिक्षण संस्थान न होने बेटियों को अभी काफी दूरी तय करनी पड़ती है।

बदलाव और विकल्प के बीच फंसे मतदाता

बीकेटी विधानसभा क्षेत्र में अधिकांश गांव आते हैं, यहां अस्ती, विजयपुर, धिनोहरी, रूदही, नगुवामऊ, जैसे वह गांव हैं जहां के वोटरों का अलग मिजाज है। ग्राम धिनोहरी के रहने वाले प्रेमचन्द्र कहते हैं कि मौजूदा समय में भाजपा विधायक से जो उम्मीदे थी वह पूरी नहीं हो सकी हैं, लेकिन मौजूदा हालात को देखते हुए भाजपा के अलावा कोई विकल्प भी नहीं नजर आ रहा है।

वहीं विश्रामपुर के रहने वाले राम किशोर कहते हैं कि इससे पहले यहां समाजवादी पार्टी के विधायक रहे उनके समय में खास विकास कार्य नहीं हो सका,और जब 2017 में भाजपा से विधायक अविनाश त्रिवेदी बने तो उम्मीद थी कि अब विकास को गति मिलेगी, लेकिन पूरा पांच साल बीत गया कोई खास विकास नहीं हो पाया है, गांवो में सड़क और बिजली का आभाव है, ​इलाज की उचित व्यवस्थ नहीं है। वहीं रूदही गांव के निवासी रामस्वरूप प्रजा​पति कहते हैं कि विधायक भाजपा का ही लेकिन प्रत्याशी बदल जाये तो कुछ उम्मीद की जा सकती है कि विकास यहां भी संभव होगा लेकिन ऐसा नहीं हो सका।

बाजार और तालाब है खास पहचान

वहीं स्थानीय लोग मानते हैं कि उनकी विधानसभा सीट की पहचान बख्शी का तालाब और यहां के बाजार से है, इसलिए इन दोनों का विकास होना चाहिए। इसके साथ ही यहां चद्रिका देवी मंदिर और वायु सेना का ऐयरपोर्ट एक अलग पहचान है।

ठाकुर और ओबीसी वोट हैं अधिक वोट

बीकेटी विधानसभा सीट जिले की सबसे कठिन चुनाव वाली सीट है। इस क्षेत्र में कई जातियों का मिलाजुला असर है। ऐसे में एक खास वर्ग जिस ओर मुड़ जाता है, जीत उसी प्रत्याशी की होती है। ब्राह्मण, ठाकुर और ओबीसी के वोट गेमचेंजर साबित होते हैं।

चुनावी पिच तैयार करने में जुटे दावेदार

बीकेटी विधानसभा सीट पर फिलहाल कांग्रेस, आप और बसपा ने अपने प्रत्याशी तय कर दिए हैं। आप ने यहां पंकज यादव और बसपा ने सलाउद्दीन सिद्दीकी को उम्मीदवार बनाया है तो कांग्रेस ने लल्लन कुमार को प्रत्याशी बनाया है। वहीं, सपा और बीजेपी ने अभी इस सीट के पत्ते नहीं खोले हैं। इस बीच इन पार्टियों में इस सीट के टिकट के लिए दावेदारों की भरमार है।

ये दावेदार अभी से चुनावी पिच तैयार करने में जुटे हैं। वहीं बीजेपी से वर्तमान विधायक अविनाश त्रिवेदी टिकट के दावेदार हैं। वहीं अरुण सिंह गप्पू, योगेश शुक्ला, विजय बहादुर यादव, सदाशिव मिश्रा, संजय सिंह, शिव दर्शन यादव और पवन सिंह समेत करीब 40 लोग बीजेपी से टिकट की दौड़ में हैं। वहीं कुछ लोगों का कहना है कि कैंट में टिकट न मिलने पर बीजेपी में आईं मुलायम सिंह की बहू अपर्णा यादव को भी यहां से उम्मीदवार बनाया जा सकता है।

पांच साल के कार्यकाल में पिछले साल तक करीब 498 करोड़ के विकास कार्य करवाए। पिछले सप्ताह ही बीकेटी से कुम्हरावां रोड के चौड़ीकरण के लिए 22.90 करोड़ जारी हुए हैं। कई और सड़कों के लिए बजट जारी हुआ है। बीकेटी में एक पॉलिटेक्निक भी बन रहा है। 100-100 करोड़ की दो गोशालाएं बन रही हैं।

अविनाश त्रिवेदी, बीजेपी विधायक, बीकेटी

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