रायबरेली: मौत के खेल से पहाड़पुर में पसरा मातम, लगा पुलिस का पहरा, जानें पूरा मामला…
रायबरेली। महराजगंज के पहाड़पुर गांव में जिस तरह जहरीली शराब ने मौत का खेल खेला है उससे पूरा गांव दहशत में है। मृतकों के घरों में मातम पसरा हुआ है तो वहीं अंदर पनप रहे आक्रोश को बाहर निकलने से रोकने के लिए प्रशासन ने गांव में पुलिस और पैरामिलिट्री का पहरा लगा दिया है। …
रायबरेली। महराजगंज के पहाड़पुर गांव में जिस तरह जहरीली शराब ने मौत का खेल खेला है उससे पूरा गांव दहशत में है। मृतकों के घरों में मातम पसरा हुआ है तो वहीं अंदर पनप रहे आक्रोश को बाहर निकलने से रोकने के लिए प्रशासन ने गांव में पुलिस और पैरामिलिट्री का पहरा लगा दिया है। हर घर में मौत के खेल को लेकर चर्चा हो रही है।
शुक्रवार को गांव में सन्नाटा रहा तो वहीं मृतकों का पुलिस की निगरानी में अंतिम संस्कार किया गया। भीड़ न लगे इसे लेकर पैरामिलिट्री लगा दी गई है। बताते हैं कि गांव और मुख्य मार्ग के लगभग बीचोबीच देसी शराब का ठेका है। यहीं से शराब पीने के बाद पहाड़पुर गांव पर मौत ने तांडव किया था।
गांव का पहला घर सरोज यादव का पड़ता है, जिसने सोमवार को ठेके से शराब लेकर पी थी। मंगलवार की सुबह करीब 11 बजे सबसे पहले इसी की मौत हुई थी। सरोज के घर से करीब दो सौ मीटर की दूरी पर राम सुमेर और वहीं पास में उसकी चाची सुखरानी का घर है।
इन दोनों की तबीयत भी मंगलवार को ही बिगड़ी और रात करीब दस बजे सीएचसी में दोनों की मौत हो गई। इसी गांव के पंकज सिंह, पूरे छत्ता मजरे पहाड़पुर के बंशी और डेडौवा मजरे पहाड़पुर के चंद्रपाल की भी शराब पीने के बाद जान चली गई। डाक्टरों की टीम गांव बुलाई गई है, वहां भी लोगों का चेकअप कराया गया।
भाग्यशाली रहे बैंड वाले
मंगलवार की शाम पहाड़पुर के शेरा सिंह के बेटे धर्मेंद्र की बरात अमेठी गई थी। इसमें बैंड वाले चार लोग इसी गांव से गए थे, जिन्होंने पहाड़पुर ठेके से देसी शराब खरीदी थी। अमेठी बरात पहुंची और बैंड बाजा वाले शराब पीने की तैयारी कर रहे थे, कि तभी उन्हें फोन पर सूचित किया गया। बताया गया कि शराब गड़बड़ है, इसे पीना नहीं। इस पर बैंड वालों ने ठेके से खरीदे गए चार पौव्वे बाहर फेंक दिए।
विरोध करने को बेताब लोग
इस वारदात में गरीब तबके घर उजड़ गए हैं। लोग विरोध करना चाहते हैं, लेकिन पुलिस-प्रशासन ने उनको गांव में ही नजरबंद कर रखा है। गांव में जहरीली शराब कैसे बिक रही थी, कब से बिक रही थी, आबकारी विभाग क्या कर रहा था, पुलिस क्या कर रही थी, इसका जवाब किसी के पास नहीं है।
ठेकेदार के घर पर बनती थी शराब
गांव के लोग बता रहे हैं कि धीरेंद्र सिंह घर में शराब बनाता था। खुद ही उसमें केमिकल मिलाता था। यह बात सब लोग जानते थे, लेकिन ये शराब पीने से कभी किसी की मौत नहीं हुई थी। गांव के लोग मुआवजे की मांग को लेकर डीएम से मिलना चाहते हैं, लेकिन फोर्स उन्हें गांव से बाहर नहीं निकलने दे रही है।
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