नदी के बीचों बीच टीले में बसा है चमत्कारी शक्तिपीठ, जहां कभी शेर किया करते थे परिक्रमा

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Edited By Amrit Vichar
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देवभूमि उत्तराखंड में ऐसे अनगिनत शक्तिपीठ हैं जिनमें देश-दुनिया के श्रद्धालुओं की आस्था जुड़ी है। ऐसा ही एक चमत्कारी धाम नैनीताल जिले के रामनगर से करीब 15 किलोमीटर दूर सुंदरखाल गांव में स्थित है देवी का यह भव्य मंदिर, जो एक छोटे से टीले पर स्थापित है। माता का यह मंदिर कार्बेट नेशनल पार्क से …

देवभूमि उत्तराखंड में ऐसे अनगिनत शक्तिपीठ हैं जिनमें देश-दुनिया के श्रद्धालुओं की आस्था जुड़ी है। ऐसा ही एक चमत्कारी धाम नैनीताल जिले के रामनगर से करीब 15 किलोमीटर दूर सुंदरखाल गांव में स्थित है देवी का यह भव्य मंदिर, जो एक छोटे से टीले पर स्थापित है। माता का यह मंदिर कार्बेट नेशनल पार्क से महज 10 किमी की दूरी पर है।

ढिकुली गांव से करीब तीन किलोमीटर आगे कोसी नदी के बीचों-बीच बना माता पार्वती का यह मंदिर श्रद्धालुओं के बीच गर्जिया माता के मंदिर के रूप में जाना जाता है। माता के दर्शन के लिए भक्तों को माता के दरबार में पहुंचने के लिए 90 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं। मंदिर के पास बहने वाली कोसी नदी में स्नान करने के बाद श्रद्धालु मां गर्जिया के दर्शन को पहुंचते हैं। कार्तिक पूर्णिमा पर इस मंदिर में दर्शन करना सबसे शुभ माना जाता है। ऐसा कहा जाता है कि इस दिन सच्ची प्रार्थना करने और आशीर्वाद लेने से आपकी मनोकामना पूरी होती है।

मां गर्जिया के दर्शन को लगी श्रद्धालुओं की कतार।

टीले में बसा है मनोकामना पूरी करने वाली मां का धाम
गर्जिया मंदिर में चमत्कारों से जुड़ी कई कहानियां हैं। साल भर मां के दर्शनों के लिए श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। कहते हैं कि मां गर्जिया के दरबार में मांगी गई मनौती हर हाल में पूरी होती है। यही वजह है कि मां की महिमा देश-दुनिया में विख्यात है। मान्यता है कि माता का यह मंदिर जिस टीले पर बना हुआ है, वह कभी किसी पर्वत खंड से अलग होकर बहते हुए यहां आया था। मंदिर को टीले के साथ बहता देख भगवान भैरव ने उसे रोकने के लिए थि रौ, बैणा थि रौ यानि ठहरो, बहन ठहरो बोला था।

मान्यता है कि भगवान भैरव के निवेदन को स्वीकार कर मां उनके साथ तब से यहीं पर निवास कर रही हैं। माता की पावन प्रतिमा यहां पर हुई खुदाई के दौरान मिली थी। गर्जिया मंदिर के ठीक नीचे भगवान भैरव का मंदिर स्थापित है। जहां श्रद्धालु विशेष तौर पर खिचड़ी का प्रसाद भगवान भैरव को अर्पित करते हैं। माना जाता है कि भगवान भैरव के दर्शन के बाद ही मां के धाम की यात्रा संपूर्ण होती है।

कोसी नदी और चारों ओर से हरे भरे वनों से घिरा मां गर्जिया मंदिर।

कभी दहाड़ के साथ शेर करते थे मां के मंदिर की परिक्रमा
गिरिराज हिमालय की पुत्री होने के कारण देवी पार्वती को गिरिजा भी कहा जाता है। मान्यता है कि हरे-भरे जंगलों के बीच स्थित मां के इस चमत्कारी धाम में कभी शेर आकर मंदिर की परिक्रमा और गर्जना किया करते ​थे। तभी से मां का यह शक्तिपीठ गर्जिया माता के मंदिर के नाम से विख्यात हो गया।

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