उत्तराखंड की इन पांच मजारों पर हाजिरी लगाने आते हैं हर धर्म के लोग, पूरी होती है हर दुआ
देवभूमि उत्तराखंड में ऐसे अनगिनत आस्था के केंद्र हैं जहां पर आकर हर दुखियारे की मुराद पूरी होती है। रुड़की स्थित पिरान कलियर धार्मिक स्थल है, जहां पर हर धर्म के लोगों को शीश नवाते देखा जा सकता है। यहां मुख्य मजार साबिर पाक की है। इनके अलावा चार अन्य शख्सियत की मजारे भी हैं। …
देवभूमि उत्तराखंड में ऐसे अनगिनत आस्था के केंद्र हैं जहां पर आकर हर दुखियारे की मुराद पूरी होती है। रुड़की स्थित पिरान कलियर धार्मिक स्थल है, जहां पर हर धर्म के लोगों को शीश नवाते देखा जा सकता है। यहां मुख्य मजार साबिर पाक की है। इनके अलावा चार अन्य शख्सियत की मजारे भी हैं। यहां आने वाले श्रद्धालुओं का मानना है कि इन मजारों में सच्चे दिल से दुआ करने के बाद हर किसी की मुराद पूरी होती है।
साबिर पाक को हजरत अलाउद्दीन अली अहमद साबिर कलियरी भी कहा जाता है। जायरीन सबसे पहले इनकी जियारत करते हैं। साथ ही चादर पेश कर मुरादें मांगते हैं और प्रसाद पेश करते हैं।
हजरत पीर गायब अली साहब की मजार पर लोग अपने चेहरे या किसी और जगह पर निकल आए मस्सों, गांठ से निजात पाने के लिए नमक और झाड़ू चढ़ाकर अपने लिए दुआ मांगते हैं। लोगों का मानना है कि ऐसा करने से परेशानी से निजात मिल जाती है।

हजरत अबदाल साहब रहमतुल्लाह अलैहि की मजार पर लोग अपनी परेशानियों की एक लिस्ट बनाकर वहां छोड़कर आ जाते हैं। कहते हैं कि कुछ ही दिनों में उनकी परेशानी दूर हो जाती है।

हजरत किलकिली साहब रहमतुल्लाह अलैहि (किलकिली साहब) के बारे में कहा जाता है कि जब यहां के रजा ने इंसानियत को शर्मसार कर डाला तो उन्होंने गुस्से में एक ऐसी चीख मारी कि सारा इलाका ही थर्रा उठा और उन्हें लोग किलकिली शाह के नाम से पुकारने लगे।

इमाम साहब को हजरत इमाम अबू सालेह रहमतुल्लाह अलैहि कहा जाता है। ये उसूलों के पक्के और कौम के खिदमतगार थे। इनके दर्जनों ऐसे किस्से हैं, जिन्हें आज भी श्रद्धालु याद करते हैं।
