Calcium Deficiency : बच्चों में इन कारणों से हो सकती है कैल्शियम की कमी, लक्षणों को न करें नजरअंदाज…
Calcium Deficiency : किसी ने सही ही कहा है, जान है तो जहान है। जब तक आप स्वस्थ्य से जीवन में सब कुछ बहुत अच्छा लगता है। हमारे शरीर में हमारी हड्डियां एक ढ़ाचे की तरह होती है, जो पूरे शरीर को संभालती है। जब अमृत विचार की केजीएमयू के प्रभात पांडे से बात हुई …
Calcium Deficiency : किसी ने सही ही कहा है, जान है तो जहान है। जब तक आप स्वस्थ्य से जीवन में सब कुछ बहुत अच्छा लगता है। हमारे शरीर में हमारी हड्डियां एक ढ़ाचे की तरह होती है, जो पूरे शरीर को संभालती है।
जब अमृत विचार की केजीएमयू के प्रभात पांडे से बात हुई तो उन्होंने बताया कि कैल्शियम हमारी हड्डियों और जोड़ों को मजबूत और हेल्दी रखने का काम करता है। इसके अलावा ये दांतों के साथ ब्लड सेल्स को भी मजबूत बनाने में मदद करता है। हड्डियों और दांतों के डेवलप्मेंट और मजबूती के लिए कैल्शियम बहुत जरूरी होता है। वहीं बच्चों के लिए तो यह पोषक तत्व और भी ज्यादा जरूरी हो जाता है क्योंकि बढ़ती उम्र में हड्डियों और दांतों का विकास हो रहा होता है, जिसके लिए कैल्शियम बहुत जरूरी है।

बच्चों में कैल्शियम की कमी के लक्षण
बच्चों में कैल्शियम की कमी के लक्षणों को समझना थोड़ा मुश्किल है। इसलिए, उनमें कैल्शियम की कमी को जानने के लिए बताए गए इन लक्षणों पर नजर रखना जरूरी है।
- जब बच्चा सो रहा हो उस दौरान उसके तकिए के नीचे और बालों में पसीना दिखाई देना।
- बच्चे का अजीब तरह से व्यवहार करना जैसे बहुत ज्यादा गुस्सा दिखाना, बेचैनी होना और उन्हें नियंत्रित करने में मुश्किल होना
- दांत का गठन देर से होता है और, बड़ा होने पर, दांतों में ढीलापन और असमान संरेखण जैसे दोष होते हैं।
- आगे की ओर निकला हुआ पेट, जो मेंढक के पेट के समान दिख सकता है।
- मानसिक एकाग्रता का खराब स्तर।
- उसका आसपास के वातावरण के प्रति उदासीन दृष्टिकोण।
- भूख न लगना।
- खराब इम्युनिटी सिस्टम के कारण रोगों के प्रति अधिक संवेदनशील हो जाना।
- रात के समय सोने में कठिनाई होना और रात के समय डर लगने के कारण अधिक रोना ।
- मस्तिष्क में ऑक्सीजन की खराब आपूर्ति के कारण दौरे और ऐंठनजैसी समस्या हो सकती है
- असामान्य रूप से चेहरे का हिलना, जैसे जीभ और होंठो का हिलना, आंखों का फड़कना आदि।
- खराब विकास और जोड़ों में विकृति।
- कम रक्तचाप।
- हाथों और पैरों मेंऐंठन, जो एक दौरे के समान दिखता है। यह एक खतरनाक लक्षण है और यदि इसका उपचार जल्दी नहीं किया जाता है, तो यह शिशु की मृत्यु का कारण बन सकता है।

डॉक्टर ने बताया कि बच्चों को अधिक से अधिक मात्रा में कैल्शियम युक्त चीजें खाने के लिए दें। दूध, दही खाने-पीने को दें। जन्म के बाद बच्चे को सूरज की रोशनी में जरूर लिटाएं। इससे बच्चे के शरीर में विटामिन डी का स्तर बढ़ेगा। विटामिन डी के अवशोषण से कैल्शियम की मात्रा बढ़ती है। शिशु में कैल्शियम की कमी है, तो उसे मां का दूध जरूर पिलाना चाहिए। बच्चे को गाय का दूध या पाउडर वाला दूध ना पिलाएं। इससे उनके शरीर में कैल्शियम की कमी हो सकती है। 6 महीने तक बच्चे के लिए मां के दूध से बेहतर कोई और आहार नहीं है। जब बच्चा बड़ा होने लगे, तो उन्हें दूध, दही, डेयरी प्रोडक्ट्स का सेवन अधिक कराएं।

