हल्द्वानी: नहीं टूट रहा चुफाल का तिलिस्म
नरेन्द्र देव सिंह, अमृत विचार, हल्द्वानी। पिथौरागढ़ जनपद की डीडीहाट विधानसभा सीट भाजपा का गढ़ बन चुकी है। यहां से मौजूदा विधायक और कैबिनेट मंत्री बिशन सिंह चुफाल लगातार पांच बार विधायक चुने जा चुके हैं। एक समय में इस सीट पर उक्रांद का भी अच्छा जनाधार होता था लेकिन अब सबकुछ इतिहास बन चुका …
नरेन्द्र देव सिंह, अमृत विचार, हल्द्वानी। पिथौरागढ़ जनपद की डीडीहाट विधानसभा सीट भाजपा का गढ़ बन चुकी है। यहां से मौजूदा विधायक और कैबिनेट मंत्री बिशन सिंह चुफाल लगातार पांच बार विधायक चुने जा चुके हैं। एक समय में इस सीट पर उक्रांद का भी अच्छा जनाधार होता था लेकिन अब सबकुछ इतिहास बन चुका है।
डीडीहाट विधानसभा सीट में कनालीछीना, डीडीहाट और मुनाकोट विकासखंड आते हैं। भौगोलिक परिदृश्य की बात करें तो मुनाकोट और कनालीछीना को मिलाकर आधा हिस्सा नेपाल सीमा से लगता है। डीडीहाट विधानसभा क्षेत्र का एक हिस्सा पिथौरागढ़ और गंगोलीहाट विधानसभा सीट से लगता है।
मौजूदा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का पैतृक निवास भी डीडीहाट विधानसभा में आता है। इस क्षेत्र का ऐतहासिक महत्तव भी है। यहां पाल की राजाओं की राजधानी अस्कोट भी स्थित है। पिथौरागढ़ से अल्मोड़ा आने पर रास्ते में डीडीहाट पड़ता है।डीडीहाट विधानसभा क्षेत्र में वर्तमान में 82741 वोटर हैं। यहां ठाकुर मतदाताओं की संख्या ज्यादा है।
साथ ही अनुसूचित जाति के मतदाताओं की भी अच्छी जनसंख्या है। हालांकि यहां अल्पसंख्यक मतदाता न के बराबर हैं। उत्तर प्रदेश के समय में यहां से 1996 में भाजपा ने बिशन सिंह चुफाल को उम्मीदवार बनाया था। तब बिशन भाजपा के युवा चेहरा थे। उन्होंने इस सीट को जीत लिया। उसके बाद से अभी तक वह यहां से लगातार चुनाव जीत रहे हैं। उनके गढ़ को कोई भी चुनौती नहीं दे पाया है। कांग्रेस ने भी कई बार कोशिश की लेकन चुफाल हमेशा अविजित रहे।
कहा जाता है कि सहज सुलभ होने की वजह से चुफाल हमेशा मतदाताओं की पहल पसंद बनते हैं। साथ ही वह चुनाव जीतने के बाद भी क्षेत्र में सक्रिय रहते हैं। कांग्रेस उनकी कभी काट नहीं निकाल पाई। 1996 से उन्होंने जो लकीर खींची थी वह अभी तक लंबी होती जा रही है।
:कांग्रेस ने दिया प्रदीप पाल को मौका
हल्द्वानी। कांग्रेस ने यहां से प्रदीप सिंह पाल को मैदान में उतारा है। वह पहले भी यहां से चुनाव लड़ चुके हैं। इस सीट पर कांग्रेस वर्ष 1984 के बाद से चुनाव हार रही है। मात्र वर्ष 1993 में कांग्रेस को जीत मिली। डीडीहाट सीट का पूर्व इतिहास देखा जाए तो कांग्रेस यहां से ब्राहृम्ण को प्रत्याशी बनाती आई है। डीडीहाट सीट बनने के बाद यहां से लगातार तीन बार कांग्रेस के स्वर्गीय गोपाल दत्त्त ओझा विधायक चुने गए। जनता पार्टी के बनने के बाद हुए चुनाव में जनसंघ के स्वर्गीय नारायण सिंह भैंसोड़ा विधायक चुने गए। वर्ष 1980 के चुनाव में फिर से कांग्रेस के स्व. चारु चंद्र ओझा विधायक चुने गए। वर्ष 1984 में उक्रांद के काशी सिंह ऐरी विधायक चुने गए। वर्ष 1991 में काशी सिंह ऐरी जीते। वर्ष 1993 में कांग्रेस के स्वर्गीय लीला राम शर्मा विधायक चुने गए।
उक्रांद ने भी दिखाया है यहां से दमखम
हल्द्वानी। उक्रांद नेता काशी सिंह ऐरी का भी एक समय यहां अच्छा जनाधार था। 1991 विधानसभा चुनाव में ऐरी ने यह सीट जीत ली थी। 1996 के विधानसभा चुनाव में उन्हें 23658 मत मिले थे। 2002 में भी उक्रांद यहां पर दूसरे नंबर पर रही थी। 2007 के विधानसभा चुनाव में फारवर्ड ब्लॉक को 5858 मत मिले थे। साल 2017 में निर्दलीय किशन सिंह भंडारी दूसरे स्थान पर रहे थे। कांग्रेस ने बिशन सिंह चुफाल के सामने सबसे अच्छा प्रदर्शन 2007 में किया था। तक वह भाजपा से करीब 2300 वोट से पीछे रह गए थे।
मूनाकोट में आगे रहने वाला बनेगा विजेता
विधानसभा क्षेत्र में पड़ने वाले मूनाकोट में 11000 मतदाता आते हैं। सभी प्रत्याशियों का पूरा जोर है कि यहां से ज्यादा से ज्यादा मत लिए जाएं। इस बार डीडीहाट विधानसभा क्षेत्र से भाजपा, कांग्रेस, आप, यूकेडी, सपा के अलावा दो निर्दलीय प्रत्याशी चुनावी मैदान में हैं। मूनाकोट के 70 गांवों के मतदाताओं को लुभाने के लिए सब प्रयास कर रहे हैं।
विकास यहां भी मुद्दा
चुफाल पांच बार यहां से विधायक बने। मंत्री भी बनाए गए। लेकिन विकास अभी भी यहां बड़ा मुद्दा है। रोजगार यहां पहली जरूरत है। यहां युवाओं को रोजगार के लिए मैदानी इलाकों में जाना पड़ता है। साथ ही पेयजल, स्वास्थ्य, शिक्षा जैसी किल्लतें यहां भी बनी हुई हैं। डीडीहाट विकास का रास्ता अभी भी नहीं ढूंढ पाया है।
धामी का गांव और हरीश रावत का नाम
डीडीहाट विधानसभा सीट से हरीश रावत के चुनाव लड़ने की बात सामने आई थी। हालांकि बाद में वह रामनगर होते हुए लालकुआं चुनाव लड़ने के लिए चले गए। मुख्यमंत्री धामी का यहां पैतृक गांव है। इसलिए यह सीट हॉट सीट बन गई है। चुफाल राज्य में इस समय कैबिनेट मंत्री हैं। उनके सामने अपनी सीट बचाने के साथ ही धामी की इज्जत रखने की भी चुनौती होगी।
1996 विधानसभा चुनाव (अविभाजित उत्तर प्रदेश)
बिशन सिंह चुफाल 29729 भाजपा
काशी सिंह एरी 23658 उक्रांद
2002 विधानसभा चुनाव
बिशन सिंह चुफाल 13104 भाजपा
घनश्याम जोशी 8609 उक्रांद
रमेश चंद्र कापड़ी 7655 कांग्रेस
2007 विधानसभा चुनाव
बिशन सिंह चुफाल 12512 भाजपा
हेम पंत 10218 कांग्रेस
गजेंद्र सिंह 5858 फारवर्ड ब्लॉक
2012 विधानसभा चुनाव
बिशन सिंह चुफाल 21089 भाजपा
रेवती जोशी 10472 कांग्रेस
जगजीवन कन्याल 10183 बसपा
2017 विधानसभा चुनाव
बिशन सिंह चुफाल 17362 भाजपा
किशन भंडारी 15024 निर्दलीय
प्रदीप सिंह पाल 14470 कांग्रेस
